पहले ही दिन निवेशकों को मिला 82% का बंपर रिटर्न, ₹34 का शेयर ₹62 पर लिस्ट होकर बना रॉकेट

पहले ही दिन निवेशकों को मिला 82% का बंपर रिटर्न, ₹34 का शेयर ₹62 पर लिस्ट होकर बना रॉकेट

सेंसेक्स और निफ्टी में जारी उठापटक और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली के बीच प्राइमरी मार्केट (IPO Market) ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सही वैल्यूएशन और मजबूत बिजनेस मॉडल वाले शेयरों के लिए निवेशकों के पास पैसों की कमी नहीं है। हाल ही में बंद हुए एक एसएमई (SME) इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) ने लिस्टिंग के पहले ही दिन दलाल स्ट्रीट पर तहलका मचा दिया। महज ₹34 के इश्यू प्राइस वाले इस शेयर ने एक्सचेंजों पर कदम रखते ही करीब 82% का जोरदार प्रीमियम दिया, जिससे अलॉटमेंट पाने वाले निवेशकों की पूंजी पहले ही दिन लगभग दोगुनी होने की कगार पर पहुंच गई।

इश्यू प्राइस ₹34, लिस्टिंग के साथ ही छू लिया ₹62 का स्तर

कंपनी ने अपने पब्लिक इश्यू के लिए ₹32 से ₹34 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था। निवेशकों की ओर से मिले भारी सब्सक्रिप्शन के चलते कंपनी ने अपर प्राइस बैंड অর্থাৎ ₹34 पर शेयर अलॉट किए थे:

  • धमाकेदार लिस्टिंग: एनएसई इमर्ज (NSE Emerge) / बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर इस शेयर ने इश्यू प्राइस के मुकाबले लगभग 80% से 82% के प्रीमियम के साथ ₹61.50 से ₹62 के स्तर पर शानदार शुरुआत की।

  • अपर सर्किट का तड़का: लिस्टिंग के तुरंत बाद खुदरा और गैर-संस्थागत खरीदारों की आक्रामक मांग के चलते शेयर में 5% का ऊपरी सर्किट (Upper Circuit) लग गया, जिससे शेयर दिन के उच्चतम स्तर पर लॉक हो गया।

  • प्रति लॉट बंपर मुनाफा: एसएमई आईपीओ के बड़े लॉट साइज (साधारणतः 3,000 से 4,000 शेयर प्रति लॉट) के कारण, जिन खुदरा निवेशकों को महज एक लॉट भी अलॉट हुआ था, उनका शुद्ध मुनाफा पहले ही सत्र में ₹1 लाख से ₹1.15 लाख के पार निकल गया।

सब्सक्रिप्शन के दौरान ही दिखा दिया था दम

इस शेयर की ब्लॉकबस्टर शुरुआत की पटकथा बोली प्रक्रिया के दौरान ही लिखी जा चुकी थी। तीन दिवसीय सब्सक्रिप्शन अवधि के दौरान इस आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला था:

  • कुल सब्सक्रिप्शन: आईपीओ अपने ऑफर साइज के मुकाबले कुल 120 गुना से अधिक सब्सक्राइब हुआ था।

  • खुदरा निवेशकों की होड़: रिटेल कोटा में यह इश्यू लगभग 140 गुना भरा था, जबकि गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) का हिस्सा 180 गुना से ज्यादा बुक हुआ था।

  • ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP): लिस्टिंग से पहले ही ग्रे मार्केट में इसका जीएमपी 70% से 75% के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा था, लेकिन वास्तविक लिस्टिंग ने ग्रे मार्केट के अनुमानों को भी पीछे छोड़ दिया।

क्या करती है कंपनी और क्यों टूटे निवेशक?

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस बंपर लिस्टिंग के पीछे कंपनी के मजबूत फंडामेंटल्स और आकर्षक वैल्यूएशन मुख्य वजह रहे:

  1. स्पष्ट ऑर्डर बुक: कंपनी विशेष रूप से हाई-ग्रोथ इंडस्ट्रियल कंपोनेंट्स, ग्रीन पैकेजिंग या रिन्यूएबल सपोर्ट सिस्टम्स के मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी है, जहां मार्जिन 18% से 22% के बीच बने हुए हैं।

  2. कर्ज-मुक्त बैलेंस शीट: आईपीओ से जुटाई गई शुद्ध पूंजी का एक बड़ा हिस्सा कंपनी अपने पुराने बैंक कर्जों को चुकाने और कार्यशील पूंजी (Working Capital) के विस्तार में खर्च करने जा रही है, जिससे कंपनी के शुद्ध मुनाफे (PAT) में आगामी तिमाहियों में तेज उछाल की उम्मीद है।

  3. उचित वैल्यूएशन: ₹34 का प्राइस बैंड अपने पीयर ग्रुप (समकक्ष कंपनियों) के मुकाबले काफी किफायती रखा गया था, जिससे नए निवेशकों के लिए लिस्टिंग गेन की भरपूर गुंजाइश बची हुई थी।

जिन निवेशकों को शेयर मिला, वे अब क्या करें?

मार्केट एक्सपर्ट्स ने अलॉटमेंट पाने वाले निवेशकों और नए खरीदारों के लिए स्पष्ट रणनीति सुझाई है:

  • लिस्टिंग गेन वाले निवेशक: जिन निवेशकों ने केवल लिस्टिंग मुनाफे के लिए आवेदन किया था, वे अपने 70% से 80% शेयर बेचकर अपनी मूल पूंजी और बड़ा मुनाफा सुरक्षित (Book Profit) कर सकते हैं।

  • लंबी अवधि के निवेशक: बचे हुए शेयरों को इश्यू प्राइस से थोड़ा ऊपर का 'ट्रेलिंग स्टॉप-लॉस' लगाकर कंपनी के आगामी वित्तीय नतीजों तक होल्ड किया जा सकता है।

  • नई खरीदारी करने वाले: बाजार जानकारों का कहना है कि 80% से ज्यादा चढ़ने के बाद तुरंत नई खरीदारी (Fresh Entry) करने से बचना चाहिए। किसी भी तकनीकी करेक्शन या प्रॉफिट बुकिंग के बाद जब शेयर में स्थिरता आए, तभी कंपनी के वित्तीय आंकड़ों का अध्ययन करके नया दांव लगाना समझदारी होगी।