स्मित मच्छार की बहादुरी पर क्यों चुप्पी साधे हैं CJP नेता? अभिजीत दीपके की सोशल मीडिया पर हुई घेराबंदी
फ्लाईदुबई (Flydubai) की दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान में अप्रत्याशित संकट के दौरान अदम्य साहस का परिचय देने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार (Smit Machchhar) की बहादुरी की गूंज इस वक्त पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। कॉकपिट में सह-पायलट द्वारा किए गए जानलेवा हमले और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने जिस सूझबूझ से विमान को संभाला और सऊदी अरब के ताबूक में सुरक्षित आपात लैंडिंग कराकर 174 से अधिक यात्रियों की जान बचाई, उसकी चौतरफा सराहना हो रही है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से लेकर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने भारतीय पायलट के इस शौर्य को सलाम किया है। लेकिन देश में जहां हर कोई इस जांबाज पायलट के जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहा है, वहीं डिजिटल राजनीति और सोशल मीडिया पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। हर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर मुखर रहने वाली 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) और इसके संस्थापक अभिजीत दीपके (Abhijeet Dipke) की इस मामले पर चुप्पी को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें घेरना शुरू कर दिया है।
स्मित मच्छार ने कैसे बचाई सैकड़ों जानें?
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घटना के अनुसार, उड़ान के दौरान बीच हवा में सह-पायलट ने हिंसक रुख अख्तियार करते हुए कैप्टन स्मित मच्छार पर जानलेवा हमला कर दिया और विमान पर कब्जा करने की कोशिश की। हमले में लहुलूहान होने के बाद भी कैप्टन स्मित ने कॉकपिट का नियंत्रण अपने हाथ से नहीं जाने दिया:
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- गंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने विमान को अनियंत्रित होने से बचाया और 14,000 फीट के अचानक आए फॉल को काबू में किया।
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- उन्होंने तुरंत इमरजेंसी कोड ट्रांसमिट किया और नजदीकी सुरक्षित रनवे की तलाश करते हुए सऊदी अरब के ताबूक एयरपोर्ट पर विमान की सफल इमरजेंसी लैंडिंग कराई।
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- इस ऐतिहासिक सूझबूझ ने न केवल 174 से अधिक मुसाफिरों की जान बचाई, बल्कि हवा में एक बहुत बड़े आतंकी या आत्मघाती षड्यंत्र को नाकाम कर दिया।
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CJP और अभिजीत दीपके की चुप्पी पर क्यों भड़के यूजर्स?
अभिजीत दीपके, जो सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के जरिए युवाओं, बेरोजगारी, सरकारी नीतियों और वैश्विक घटनाक्रमों पर लगातार सक्रिय रहते हैं, इस बड़े राष्ट्रीय गौरव के पल पर पूरी तरह शांत नजर आए।
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (X और इंस्टाग्राम) पर यूजर्स ने उनकी इस खामोशी को आड़े हाथों लिया:
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सिलेक्टिव एक्टिविज्म का आरोप: यूजर्स का कहना है कि जो सीजेपी नेता और डिजिटल इनफ्लुएंसर्स देश के हर छोटे-बड़े विवाद पर तुरंत मीम्स, थ्रेड्स और तीखी प्रतिक्रियाएं पोस्ट करते हैं, वे एक भारतीय पायलट के इस ऐतिहासिक शौर्य और बहादुरी पर एक शब्द भी क्यों नहीं बोल पा रहे हैं?
- वैश्विक सराहना बनाम घरेलू खामोशी: जहां पीएम मोदी ने खुद पायलट के परिवार से बात कर उनका हौसला बढ़ाया और नेतन्याहू ने उन्हें 'सच्चा नायक' करार दिया, वहीं सीजेपी से जुड़े प्रमुख चेहरों (अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रंका आदि) की ओर से कोई पोस्ट सामने न आने को ट्रोलर्स ने उनकी 'राजनीतिक हिचक' बताया।
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ट्रोलिंग और तीखे कमेंट्स: कई यूजर्स ने दीपके के पुराने ट्वीट्स के नीचे कमेंट करते हुए लिखा कि क्या देश के एक बहादुर बेटे की जांबाजी पर गर्व करने के लिए भी किसी राजनीतिक नफे-नुकसान का आकलन किया जा रहा है?
क्या है सीजेपी खेमे का रुख?
हालांकि इस चौतरफा ट्रोलिंग के बीच सीजेपी से जुड़े कुछ समर्थकों का तर्क है कि उनका प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से घरेलू नागरिक मुद्दों, शिक्षा सुधार, बेरोजगारी और व्यंग्य केंद्रित राजनीति के लिए है, इसलिए हर अंतरराष्ट्रीय या एविएशन घटना पर आधिकारिक बयान की उम्मीद करना अनुचित है।
इसके बावजूद, स्मित मच्छार की बहादुरी जिस तरह से वैश्विक स्तर पर भारत के साहस का प्रतीक बन चुकी है, उसमें एक लोकप्रिय युवा आंदोलन के अगुआ का मौन रहना सोशल मीडिया पर चर्चा और तीखी बहस की मुख्य वजह बना हुआ है।