ममता बनर्जी को SC से बड़ा झटका: 804 करोड़ वाले फ्रीज बैंक खातों को ऑपरेट करने की नहीं मिली इजाजत

ममता बनर्जी को SC से बड़ा झटका: 804 करोड़ वाले फ्रीज बैंक खातों को ऑपरेट करने की नहीं मिली इजाजत

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की उस विशेष याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (इंडियन बैंक) में डेबिट-फ्रीज किए गए चार प्रमुख बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति मांगी गई थी। इन चार बैंक खातों में करीब 804 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जमा है। शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में दखल देने से साफ इनकार करते हुए हाईकोर्ट से इस मामले की सुनवाई में तेजी लाने का आग्रह किया है।

'हम आर्टिकल 136 का इस्तेमाल नहीं करेंगे': सुप्रीम कोर्ट की दो-टूक

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ के समक्ष जब यह मामला सुनवाई के लिए पहुंचा, तो अदालत ने साफ कर दिया कि वह मामले के गुण-दोष (Merits) पर कोई फैसला नहीं सुना रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा:

  • अधिकार क्षेत्र का प्रयोग नहीं: बेंच ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत शीर्ष अदालत अपने असाधारण अधिकार क्षेत्र का उपयोग करते हुए इस स्तर पर हस्तक्षेप नहीं करना चाहती।

  • चुनाव चिह्न विवाद का पेंच: अदालत ने यह भी संज्ञान में लिया कि चुनाव आयोग (ECI) द्वारा पार्टी के चुनाव चिह्न को लेकर प्रक्रिया और कानूनी विवाद विचाराधीन है। ऐसे में जब तक यह तय नहीं हो जाता कि उस बड़ी धनराशि का वास्तविक और वैधानिक हकदार कौन है, तब तक खातों के संचालन पर अंतिम फैसला देना उचित नहीं है।

  • हाईकोर्ट से त्वरित सुनवाई का अनुरोध: सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि वह मामले की पेंडिंग याचिकाओं पर सुनवाई तेज करे और जल्द से जल्द अंतिम फैसला सुनाए।

अभिषेक मनु सिंघवी की दलील: 'पार्टी की ऑक्सीजन रुक गई है'

टीएमसी गुट की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में दलील दी कि बिना किसी न्यायिक आदेश या मजिस्ट्रेट की अनुमति के केवल पुलिस कार्रवाई के जरिए देश की तीसरी सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टी के खातों को फ्रीज कर दिया गया है।

सिंघवी ने तर्क रखा:

  • "किसी भी राजनीतिक दल के लिए बैंक खाते उसकी ऑक्सीजन की तरह होते हैं। पार्टी के छह राज्यों में कार्यालय हैं, राष्ट्रीय व राज्य मीडिया विंग्स हैं और देशभर में रोजमर्रा के खर्चे होते हैं। खातों को फ्रीज करके लोकतंत्र में एक राजनीतिक पार्टी का गला घोंटा जा रहा है। हाईकोर्ट के नियमित सुनवाई का इंतजार करने से पार्टी पंगु हो जाएगी।""

  • टीएमसी ने यह भी दावा किया कि खातों को फ्रीज करने से जुड़ी पुलिस एफआईआर में बुनियादी कानूनी खामियां थीं, इसलिए पार्टी को कम से कम इन खातों से संचालन की अंतरिम अनुमति दी जानी चाहिए।

क्या था कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला?

इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने 27 अगस्त को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को इन चार बैंक खातों को चलाने की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था।

हाईकोर्ट का तर्क था कि पहले ही एक पूर्व न्यायाधीश को विशेष अधिकारी नियुक्त कर पार्टी के रोजमर्रा के जरूरी खर्चों और कानूनी खर्चों को पूरा करने की सीमित व्यवस्था दी गई थी। यदि खातों को पूरी तरह से डी-फ्रीज या ऑपरेट करने का नया आदेश दिया जाता, तो इससे पहले के आदेश का प्रभाव कमजोर पड़ जाता। हाईकोर्ट के इसी रुख को चुनौती देते हुए तृणमूल कांग्रेस सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी, जहां से अब उसे खाली हाथ लौटना पड़ा है।

पार्टी के लिए बढ़ेगी आर्थिक और कानूनी चुनौती

सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस को अपनी सारी कानूनी लड़ाई कलकत्ता हाईकोर्ट में ही लड़नी होगी। खातों में बंद 804 करोड़ रुपये तक पहुंच न मिलने के कारण पार्टी के प्रशासनिक कामकाज, सांगठनिक अभियानों और कर्मचारियों के वेतन जैसे नियमित खर्चों के प्रबंधन में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।