सुप्रीम कोर्ट से यस बैंक को करारा झटका: ₹8,415 करोड़ के AT-1 बॉन्ड राइट-ऑफ को रद्द करने का फैसला बरकरार
घरेलू शेयर बाजार के कारोबारी सत्र में उस वक्त हड़कंप मच गया जब निजी क्षेत्र के दिग्गज कर्जदाता यस बैंक (Yes Bank) के शेयरों पर बिकवाली का प्रचंड दबाव देखने को मिला। सुप्रीम कोर्ट ने यस बैंक और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को बड़ा कानूनी झटका देते हुए ₹8,415 करोड़ मूल्य के एडिशनल टियर-1 (AT-1) बॉन्ड्स को बट्टे खाते (राइट-ऑफ) में डालने के फैसले को पूरी तरह गैरकानूनी करार देने वाले बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। शीर्ष अदालत द्वारा बैंक व नियामक की अपीलों को खारिज किए जाने की खबर जैसे ही ट्रेडिंग स्क्रीन पर चमकी, दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों ने ताबड़तोड़ बिकवाली शुरू कर दी। देखते ही देखते यस बैंक का शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर करीब 20 प्रतिशत तक लुढ़क गया, जिससे बैंक का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) चंद मिनटों में हजारों करोड़ रुपये घट गया।
क्या है ₹8,415 करोड़ का AT-1 बॉन्ड विवाद? 2020 के रीकंस्ट्रक्शन से जुड़े हैं तार
यह पूरा कानूनी विवाद मार्च 2020 का है, जब यस बैंक गंभीर वित्तीय संकट में फंस गया था और भारतीय रिजर्व बैंक ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नेतृत्व में एक कंसोर्टियम बनाकर बैंक का पुनर्गठन (Reconstruction Scheme) लागू किया था। उस दौरान बैंक के प्रशासक ने पूंजी पर्याप्तता और बेल-आउट योजना के तहत निवेशकों द्वारा खरीदे गए ₹8,415 करोड़ के एडिशनल टियर-1 (AT-1) बॉन्ड को पूरी तरह से शून्य (राइट-ऑफ) करने का आदेश जारी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ संस्थागत निवेशकों, म्यूचुअल फंड्स और खुदरा बॉन्डधारकों ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जनवरी 2023 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बॉन्डधारकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि प्रशासक के पास अंतिम योजना अधिसूचित होने से पहले इन बॉन्डों को राइट-ऑफ करने का कानूनी अधिकार नहीं था। इसके बाद यस बैंक और आरबीआई ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है।
बैंक की बैलेंस शीट पर गहराएगा दबाव, क्या चुकाने होंगे ₹8,415 करोड़?
बाजार विश्लेषकों और ब्रोकरेज फर्मों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला यस बैंक की वित्तीय स्थिति के लिए एक बहुत बड़ा जोखिम बनकर उभरा है। यदि बैंक को इन बॉन्ड्स की पूरी मूल राशि ब्याज सहित बहाल करनी पड़ती है या निवेशकों को भुगतान करना पड़ता है, तो बैंक पर लगभग ₹8,415 करोड़ (संभावित ब्याज जोड़कर यह देनदारी और अधिक हो सकती है) का तत्काल वित्तीय बोझ आ सकता है। चूंकि बैंक ने अपनी पिछली बैलेंस शीट में इसके लिए कोई बड़ा आकस्मिक प्रावधान (Provisioning) नहीं किया था, इसलिए यह देनदारी सीधे तौर पर बैंक के टियर-1 कैपिटल रेशियो और लाभप्रदता को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि रेटिंग एजेंसियों और बड़े फंड हाउसों ने शेयर में तुरंत सतर्क रुख अपनाते हुए जोखिम कम करने के लिए बिकवाली का रास्ता चुना।
तकनीकी स्तर पर टूटा शेयर, आगे क्या हैं निवेशकों के लिए विकल्प?
दिन के कारोबार में Yes Bank का शेयर ₹21 के स्तर से फिसलकर ₹18 से ₹19 के दायरे में आ गया, जो इसके प्रमुख तकनीकी सपोर्ट स्तरों का टूटना माना जा रहा है। तकनीकी जानकारों का कहना है कि जब तक बैंक प्रबंधन सुप्रीम कोर्ट के विस्तृत आदेश पर अपनी आधिकारिक सफाई या आगामी कानूनी समीक्षा (रिव्यू पिटीशन) को लेकर स्पष्ट बयान नहीं देता, तब तक शेयर में अत्यधिक अस्थिरता बनी रह सकती है। खुदरा निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाजी में 'गिरते हुए चाकू को पकड़ने' (Catching a falling knife) की कोशिश न करें और कानूनी स्थिति व बैंक के पूंजी अनुपात पर पड़ने वाले असर का पूरा ब्यौरा सामने आने तक नए निवेश से परहेज करें।