अभिजीत दीपके को US से मिला खुला समर्थन: भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने भारत के SIR पर उठाए सवाल
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों को अब अमेरिका से सीधा राजनीतिक समर्थन मिल गया है। भारतीय मूल की प्रभावशाली अमेरिकी सांसद (डेमोक्रेटिक पार्टी) प्रमिला जयपाल (Pramila Jayapal) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर सार्वजनिक पोस्ट लिखकर भारत सरकार और निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है। प्रमिला जयपाल ने भारत में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि वे भारत के उन नागरिकों के साथ खड़ी हैं जो लोकतंत्र विरोधी कदमों के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं।
'13 करोड़ नाम हटाना ट्रंप जैसा हथकंडा': अमेरिकी सांसद का सीधा हमला
अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने अपने बयान में गंभीर आरोप लगाते हुए भारत की चुनावी प्रक्रिया की तुलना अमेरिका की आंतरिक राजनीति से कर दी। उन्होंने लिखा, "मैं भारत सरकार द्वारा मतदाता सूची से 13 करोड़ लोगों के नाम हटाने के कदम से बेहद चिंतित हूं। यह बिल्कुल वैसा ही हथकंडा प्रतीत होता है जैसा ट्रंप प्रशासन यहां अमेरिका में लोकतंत्र और वोटिंग अधिकारों को कमजोर करने के लिए अपना रहा है। दुनिया भर में लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा करना बेहद जरूरी है, और ऐसे समय में जन-आंदोलन आवश्यक हो जाते हैं।"
चुनाव आयोग का पक्ष और आंकड़ों की असलियत
गौरतलब है कि भारत में विपक्षी दलों और CJP द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के पहले तीन चरणों को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पहले ही स्पष्ट किया है कि SIR एक नियमित व संवैधानिक प्रक्रिया है जिसके तहत दोहरी प्रविष्टियों (डुप्लिकेट), मृत व्यक्तियों और स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम ही तकनीकी जांच के बाद हटाए जाते हैं। इसके अलावा, आयोग ने यह भी साफ किया है कि यदि किसी वास्तविक पात्र नागरिक का नाम छूट गया है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म 6 भरकर अपना नाम दोबारा आसानी से जुड़वा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के वकीलों का पलटवार: 'भारत को ज्ञान देने से पहले अपना होमवर्क करें'
अमेरिकी सांसद की इस टिप्पणी के बाद भारत में कानूनी और राजनीतिक हलकों से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व राज्यसभा सांसद महेश जेठमलानी ने प्रमिला जयपाल को जवाब देते हुए कहा कि उन्हें किसी दूसरे संप्रभु लोकतंत्र पर सवाल उठाने से पहले संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व कानून का थोड़ा अध्ययन करना चाहिए। जेठमलानी ने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका में भी जब कोई मतदाता अपना राज्य बदलता है, तो उसके नाम में संशोधन होता है। भारत के आंतरिक मामलों में बिना तथ्यों की पड़ताल किए इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी केवल एक खास राजनीतिक एजेंडे को हवा देने की कोशिश है।
विदेशी दखल और फंडिंग पर और तेज हुआ घमासान
प्रमिला जयपाल का यह बयान ऐसे नाजुक समय में आया है जब भारत में वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन द्वारा CJP और अभिजीत दीपके को अमेरिका से फंडिंग मिलने के गंभीर आरोप लगाए जा चुके हैं। जहां सत्ताधारी दल इसे देश के लोकतांत्रिक ढांचे को बाहर से प्रभावित करने की 'विदेशी टूलकिट' करार दे रहा है, वहीं अमेरिकी सांसद के इस खुले बयान ने भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक व राजनीतिक बहस को और गर्मा दिया है।