मां बनने के बाद टीवी पर शिफ्ट टाइमिंग पर अदिति शर्मा के बेबाक बोल; कलर्स के नए शो से की वापसी

मां बनने के बाद टीवी पर शिफ्ट टाइमिंग पर अदिति शर्मा के बेबाक बोल; कलर्स के नए शो से की वापसी

हिंदी सिनेमा और छोटे पर्दे की संजीदा अदाकारा अदिति शर्मा ने ढाई साल के लंबे मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी ब्रेक) के बाद अभिनय की दुनिया में धमाकेदार वापसी की है। रणवीर सिंह और अनुष्का शर्मा के साथ सुपरहिट बॉलीवुड फिल्म 'लेडीज वर्सेस रिकी बहल' में अपनी सादगी और बेहतरीन अदाकारी से दर्शकों के दिलों में खास पहचान बनाने वाली अदिति अब कलर्स चैनल के नए धारावाहिक 'शायद यही है प्यार' में मुख्य भूमिका निभाती नजर आ रही हैं। दो बच्चों की मां बनने के बाद जब अधिकांश अभिनेत्रियां काम के सख्त घंटे और शिफ्ट की सीमाएं तय करने लगती हैं, तब अदिति शर्मा ने टीवी इंडस्ट्री के कठिन वर्क-कल्चर और लंबी शिफ्ट्स को लेकर एक बेहद परिपक्व और बेबाक बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि टेलीविजन एक ऐसा संवेदनशील और दबाव वाला माध्यम है जहां टेलीकास्ट की समयसीमा सबसे ऊपर होती है, इसलिए अगर शो के प्रसारण को बचाने के लिए उन्हें सेट पर 16 घंटे भी काम करना पड़े तो वे बिना किसी नखरे के पूरी लगन से काम करने के लिए तैयार हैं। अभिनेत्री की यह वापसी मातृत्व और पेशेवर महत्वाकांक्षाओं के बीच एक खूबसूरत और प्रेरणादायी संतुलन की मिसाल बन गई है।

सास-बहू के ड्रामे से अलग चुनौतीपूर्ण किरदारों की तलाश: 35 की उम्र और शादी के सामाजिक दबाव की कहानी

टेलीविजन पर चलने वाले पारंपरिक सास-बहू धारावाहिकों की भीड़ के बीच अपने लिए अलग और सार्थक भूमिका चुनने के सवाल पर अदिति शर्मा ने अपनी सोच स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वे कभी भी ऐसे आसान किरदारों की ओर आकर्षित नहीं होतीं जिन्हें करना सुरक्षित लगे, बल्कि वे हमेशा ऐसी बहुस्तरीय और महिला प्रधान भूमिकाएं निभाना चाहती हैं जिन्हें करने से पहले सेट पर नर्वसनेस महसूस हो और भीतर एक डर बना रहे। अदिति के अनुसार, अभिनय का असली मजा तभी आता है जब पात्र समाज की वास्तविक महिलाओं की रोजमर्रा की चुनौतियों को पर्दे पर जीवंत करे। उन्होंने अपने नए शो 'शायद यही है प्यार' के किरदार का उदाहरण देते हुए बताया कि इसमें उनकी भूमिका 35 वर्ष की एक ऐसी आधुनिक कामकाजी महिला की है जिसकी शादी अभी नहीं हुई है। भारतीय समाज में जैसे ही कोई महिला 30 का आंकड़ा पार करती है, रिश्तेदार और समाज उस पर करियर छोड़कर पहले शादी करने का भारी दबाव बनाने लगते हैं। अदिति ने कहा कि जब लेखक ने उन्हें केंद्र में रखकर यह पटकथा लिखी, तो उन्हें लगा कि यह संघर्ष देश की लाखों आधुनिक युवतियों का है और वे तुरंत इस प्रोजेक्ट से जुड़ गईं।

बढ़ती उम्र और शादी के बाद इंडस्ट्री में बदलाव: क्या अभिनेत्रियों के लिए बदल रहा है दौर?

मनोरंजन जगत में वर्षों से यह कड़वी सच्चाई रही है कि अभिनेत्रियों की शादी होने या उम्र बढ़ने के बाद उन्हें मुख्य भूमिकाओं से दरकिनार कर दिया जाता था, लेकिन अदिति शर्मा मौजूदा दौर में इस परिदृश्य को तेजी से बदलता हुआ देख रही हैं। दो प्यारे बच्चों की मां अदिति ने बताया कि अब टेलीविजन और सिनेमा दोनों जगहों पर वरिष्ठ और अनुभवी महिला कलाकारों को ध्यान में रखकर दमदार पटकथाएं लिखी जा रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि समाज आखिर महिलाओं को ही उम्र और पारिवारिक दायरों की पाबंदियों में बांधने की कोशिश क्यों करता है। जब पुरुष कलाकार उम्र के किसी भी पड़ाव पर पिता बनने के बाद बेरोकटोक काम कर सकते हैं, तो महिलाओं के लिए यह रुकावट क्यों बने। अदिति ने कहा कि आज शादी और बच्चे होने के बावजूद अभिनेत्रियों को बेहतरीन मुख्य किरदार ऑफर हो रहे हैं, जो भारतीय मनोरंजन उद्योग में आ रहे एक बेहद सकारात्मक और प्रगतिशील बदलाव का स्पष्ट संकेत है।

16 घंटे की शूटिंग और मातृत्व का संतुलन: पति सरवर आहूजा के त्याग ने बनाया सफर आसान

टेलीविजन सेट्स पर 14 से 16 घंटे तक चलने वाली मैराथन शिफ्ट्स और बच्चों की देखभाल के बीच संतुलन साधने के रहस्य से पर्दा उठाते हुए अदिति शर्मा ने अपने पति और मशहूर अभिनेता सरवर आहूजा के अटूट सहयोग को इसका पूरा श्रेय दिया। अदिति ने बेहद संजीदगी से कहा कि उनकी बेटी अभी दो साल की भी नहीं हुई है और ऐसे नाजुक वक्त में आप अपने मासूम बच्चों को सिर्फ नौकरों या सहायकों के भरोसे नहीं छोड़ सकते। माता-पिता में से किसी एक का हर समय बच्चों के पास मौजूद होना बेहद आवश्यक होता है। उन्होंने भावुक होकर बताया कि जब उन्होंने ढाई साल के ब्रेक के बाद इस नए शो को स्वीकार करने का फैसला किया, तो उनके पति सरवर ने अपनी अभिनय परियोजनाओं से खुद एक कदम पीछे खींच लिया ताकि वे घर पर बच्चों की पूरी जिम्मेदारी संभाल सकें। अदिति ने कहा कि उनकी कई सहेलियां कॉर्पोरेट जगत में काम करती हैं, जो मातृत्व के बाद पारिवारिक सहयोग न मिलने के कारण अपने करियर में दोबारा नहीं लौट सकीं, लेकिन सरवर के इस निस्वार्थ त्याग और समझदारी की वजह से ही वे आज बिना किसी मानसिक तनाव के सेट पर 16 घंटे पसीना बहा पा रही हैं।

सुपरहिट फिल्मों के दौर में टीवी का रुख क्यों किया: 'गंगा' से लेकर 'अंग्रेज' तक का सफर

अदिति शर्मा ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए उस अहम फैसले की वजह भी साझा की जब वे बड़े पर्दे की फिल्मों को छोड़कर छोटे पर्दे पर आई थीं। साल 2015 में जब उनका चर्चित धारावाहिक 'गंगा' शुरू हुआ था, उसी समय उनकी पहली पंजाबी फिल्म 'अंग्रेज' बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी और वे हिंदी तथा दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी सक्रिय थीं। उस समय कई करीबी लोगों ने उन्हें फिल्मों को छोड़कर टीवी न करने की सलाह दी थी। इस पर अदिति ने साफ किया कि उन्हें सिर्फ बड़े पोस्टरों पर अपना चेहरा चमकाने या ऐसी बड़ी फिल्मों में काम करने की कोई लालसा नहीं थी जहां उनके किरदार के पास करने के लिए कुछ सार्थक न हो। वे सिर्फ स्क्रीन टाइम बढ़ाने के बजाय ऐसे किरदारों की तलाश में थीं जो कहानी की रीढ़ हों। जब उन्हें 'गंगा' जैसी मजबूत सामाजिक कहानी मिली तो उन्होंने बिना किसी झिझक के टीवी को चुना और अपनी कला से घर-घर में अमिट छाप छोड़ी।

20 की उम्र के आकर्षण से परिपक्व प्रेम तक: शादी के इतने वर्षों बाद क्या है प्यार की असली परिभाषा?

अपने नए शो 'शायद यही है प्यार' के शीर्षक से जुड़े सवाल पर बात करते हुए अदिति शर्मा ने प्यार के बदलते आयामों को बेहद खूबसूरती से बयां किया। उन्होंने हंसते हुए कहा कि जब इंसान 20 साल का होता है और स्कूल या कॉलेज में किसी को देखकर पेट में तितलियां उड़ने लगती हैं, तो लगता है कि वही सच्चा प्यार है। लेकिन उम्र, अनुभव और जीवन के उतार-चढ़ावों के साथ प्यार की परिभाषा पूरी तरह बदल जाती है। अदिति और सरवर आहूजा ने शादी से पहले एक-दूसरे को लंबे समय तक डेट किया और अब उनकी शादी को भी कई साल बीत चुके हैं। अभिनेत्री का मानना है कि समय के साथ प्यार केवल आकर्षण नहीं रहता, बल्कि वह एक-दूसरे के सुख-दुख को बिना कहे समझना, एक-दूसरे की खुशियों और करियर का सम्मान करना और जीवन के हर मुश्किल मोड़ पर चट्टान की तरह एक-दूसरे के साथ खड़े रहना बन जाता है; और असल मायनों में यही सच्चा प्यार है।