पंजाब सरकार को ₹400 करोड़ का भारी नुकसान, ED की जांच में खुला बड़ा खेल

पंजाब सरकार को ₹400 करोड़ का भारी नुकसान, ED की जांच में खुला बड़ा खेल

पंजाब के रियल एस्टेट और शहरी विकास के सबसे पॉश इलाके मोहाली में जमीन आवंटन को लेकर एक बहुत बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) द्वारा नियमों को ताक पर रखकर जमीन अधिग्रहण से प्रभावित भू-मालिकों (आउस्टीज) को बाजार मूल्य बढ़ने के बावजूद वर्षों पुराने दामों पर आवासीय प्लॉट आवंटित करने के मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तीखे सवाल खड़े किए हैं। ईडी की प्रारंभिक वित्तीय जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस संदिग्ध प्रक्रिया से पंजाब सरकार के खजाने को लगभग 400 करोड़ रुपये का सीधा राजस्व नुकसान होने का अनुमान है। जब पूरे पंजाब और ट्राइसिटी में जमीन की कीमतें आसमान छू रही थीं, तब गमाडा के जिम्मेदार अधिकारियों ने कथित तौर पर नियमों की मनमानी व्याख्या करते हुए चुनिंदा लाभार्थियों को रियायती और पुराने दरों पर आवंटन पत्र बांटे। इस खुलासे के बाद मोहाली से लेकर चंडीगढ़ तक प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

₹25 हजार का प्लॉट ₹65 हजार पहुंचा: फिर भी वर्षों तक पुरानी दरों पर क्यों जारी हुए आवंटन पत्र?

पंजाब सरकार की 'आउस्टी पॉलिसी' के तहत जब किसी सार्वजनिक विकास परियोजना या नए आवासीय व व्यावसायिक सेक्टर को विकसित करने के लिए किसानों और स्थानीय लोगों की पैतृक जमीन अधिग्रहित की जाती है, तो उन्हें वित्तीय मुआवजे के अलावा निर्धारित रियायती दरों पर आवासीय प्लॉट देने का स्पष्ट कानूनी प्रावधान होता है। इस नीति का मूल उद्देश्य विस्थापित परिवारों का पुनर्वास सुनिश्चित करना था। हालांकि, ईडी की जांच में यह गंभीर विसंगति पकड़ी गई कि जमीन के सर्कल और बाजार रेट में कई गुना इजाफा होने के बाद भी आवंटन की दरों को संशोधित नहीं किया गया। जांच के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018-19 में जब इन प्लॉटों का बेस रेट 25 हजार रुपये प्रति वर्ग गज निर्धारित था, वह अगले कुछ वर्षों में बढ़कर वर्ष 2025-26 तक 65 हजार रुपये प्रति वर्ग गज के पार पहुंच गया। इसके बावजूद गमाडा ने नए बढ़े हुए बाजार भाव को लागू करने के बजाय लगातार पुरानी दरों पर ही आवंटन पत्र (अलॉटमेंट लेटर्स) जारी किए। दरों के इसी भारी अंतर ने सीधे-सीधे सरकारी खजाने पर करीब 400 करोड़ रुपये की गहरी चोट पहुंचाई है।

सेक्टर-82 अल्फा और सेक्टर-66 बीटा में 441 प्लॉट आवंटित: 169 फाइलें अभी भी जांच के दायरे में

जांच एजेंसी द्वारा जुटाए गए दस्तावेजी साक्ष्यों के मुताबिक, वर्ष 2019 से लेकर 2026 के बीच मोहाली के सबसे महंगे और तेजी से विकसित हो रहे आईटी सिटी क्षेत्र के दो प्रमुख सेक्टरों में कुल 441 बेशकीमती आवासीय प्लॉट आवंटित किए गए। इनमें आईटी सिटी के सेक्टर-82 अल्फा में 100 प्लॉट और सेक्टर-66 बीटा में 341 प्लॉट शामिल हैं। इन दोनों ही सेक्टरों में जमीन की मांग उद्योगपतियों, बिल्डरों और हाई-प्रोफाइल खरीदारों के बीच अत्यधिक रही है। इसके अलावा, इन्हीं दोनों सेक्टरों में 169 अन्य आवेदन अभी भी लंबित पाए गए हैं, जिनमें सेक्टर-82 अल्फा की 39 और सेक्टर-66 बीटा की 130 फाइलें शामिल हैं। यदि समय रहते ईडी की नजर इस संदिग्ध प्रक्रिया पर नहीं पड़ती, तो इन लंबित फाइलों पर भी पुरानी दरों के आधार पर ही आवंटन पत्र जारी कर दिए जाते, जिससे राज्य सरकार को और भी कई सौ करोड़ रुपये के अतिरिक्त वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ सकता था।

जून 2020 की हाई-लेवल बैठक आई रडार पर: वरिष्ठ अधिकारियों के फैसलों पर कस रहा कानूनी शिकंजा

ईडी की जांच का मुख्य केंद्र जून 2020 में आयोजित एक उच्चस्तरीय समिति की बैठक बन गई है। इस बैठक में गमाडा और पंजाब अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पुड्डा) के कई आला अधिकारियों ने भाग लिया था। बैठक के मिनट्स से यह बात सामने आई है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने वर्ष 2013 और वर्ष 2018 की आवासीय योजनाओं के सफल आवेदकों को केवल 25 हजार रुपये प्रति वर्ग गज की पुरानी दर पर ही प्लॉट आवंटित करने का खुला समर्थन किया था। समिति ने उस वक्त निर्देश दिया था कि सभी सफल पात्र आवेदकों को 15 दिनों की निर्धारित समयसीमा के भीतर आवंटन पत्र जारी किए जाएं। हालांकि, ईडी की पड़ताल में चौंकाने वाला सच यह सामने आया कि उन निर्देशों का पालन तय समय पर नहीं हुआ और उसके बाद के वर्षों में भी बिना किसी कानूनी समीक्षा के पुराने रेट पर धड़ल्ले से बैक-डेट या पुरानी फाइलों के आधार पर लेटर जारी होते रहे। जांच में मूल दस्तावेजों की उचित वैधानिक पड़ताल किए बिना चहेते आवेदकों को सीधे ड्रॉ में शामिल करने और समय पर आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी न करने जैसी गंभीर प्रक्रियागत अनियमितताएं भी पकड़ी गई हैं।

गमाडा दफ्तर में 3 दिन की मैराथन तलाशी: कंप्यूटर डेटा और फाइलें जब्त, विभाग ने साधी चुप्पी

घोटाले की वित्तीय कड़ियों को जोड़ने के लिए प्रवर्तन निदेशालय की विशेष टीमों ने पिछले महीने मोहाली स्थित गमाडा के मुख्य प्रशासनिक कार्यालय पर अचानक छापा मारा था। तीन दिनों तक चली इस मैराथन तलाशी और जब्ती अभियान के दौरान केंद्रीय एजेंसी ने भूमि अधिग्रहण, आउस्टी कोटा, फाइलों की मंजूरी और आवंटन ड्रॉ से जुड़े सैकड़ों महत्वपूर्ण गोपनीय रिकॉर्ड, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और डिजिटल बैकअप को अपने कब्जे में ले लिया था। इस पूरे विवाद और 400 करोड़ रुपये के कथित नुकसान पर जब पंजाब के आवास एवं शहरी विकास विभाग के शीर्ष अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने पूरे मामले से अनभिज्ञता जताई। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस जांच के तकनीकी निष्कर्षों की औपचारिक जानकारी नहीं है और वे संबंधित पत्रावलियों और रिकॉर्ड की आंतरिक समीक्षा कराने के बाद ही कोई आधिकारिक टिप्पणी या विभागीय जांच शुरू करेंगे।