Para Asian Games 2026: बिना हाथों वाली तीरंदाज शीतल देवी का 'गोल्डन डबल'

Para Asian Games 2026: बिना हाथों वाली तीरंदाज शीतल देवी का 'गोल्डन डबल'

जापान के आइची नागोया में चल रहे पैरा एशियाई खेलों में भारत की असाधारण तीरंदाज शीतल देवी ने अपने अदम्य साहस, अद्वितीय तकनीक और अचूक निशाने से दुनिया को अचंभित कर दिया है। बिना हाथों के केवल पैरों और ठुड्डी के सहारे तीर कमान साधने वाली 19 वर्षीय शीतल देवी ने गुरुवार को महज दो घंटे के भीतर दो ऐतिहासिक स्वर्ण पदक अपनी झोली में डालकर तिरंगे की शान को नई बुलंदी दी। उनके इस दोहरे स्वर्णिम धमाके और एथलेटिक्स ट्रैक पर भारतीय खिलाड़ियों के शानदार जलवे के दम पर भारत के कुल पदकों की संख्या 88 पर पहुंच गई है। एक ही दिन में भारतीय एथलीटों ने सात स्वर्ण सहित कुल 26 पदक जीतकर पदक तालिका में जबरदस्त उछाल हासिल किया। शीतल का यह गोल्डन डबल अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में भारतीय पैरा एथलीटों के बढ़ते दबदबे और कभी हार न मानने वाले जज्बे की अमर गाथा बन गया है।

शीतल देवी का गोल्डन डबल: मिक्स्ड टीम में इंडोनेशिया को हराया, फिर व्यक्तिगत फाइनल में सिंगापुर को रौंदा

मौजूदा विश्व चैंपियन और दुनिया की नंबर एक पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने रेंज पर कदम रखते ही अपने चिर-परिचित शांत और आक्रामक अंदाज से विरोधी खेमों में हलचल मचा दी। शीतल ने दिन की शुरुआत कंपाउंड मिक्स्ड टीम ओपन स्पर्धा के खिताबी मुकाबले से की, जहां उन्होंने अपने साथी तीरंदाज तोमन कुमार के साथ मिलकर इंडोनेशियाई जोड़ी टियोडोरा आडिया फेरेली और केन स्वागुमिलांग को बेहद रोमांचक मुकाबले में 151-148 के अंतर से पराजित कर भारत का स्वर्ण पदक बरकरार रखा। इस खिताबी जीत के ठीक बाद, बिना किसी थकान के शीतल महिलाओं की व्यक्तिगत कंपाउंड स्पर्धा के फाइनल में उतरीं। स्वर्ण पदक के इस मुकाबले में उनका सामना सिंगापुर की अनुभवी तीरंदाज अलीम नूर सैयदिया से था। शीतल ने पैरों से धनुष को खींचकर ठुड्डी के लॉक से एक के बाद एक परफेक्ट टेन और नाइन के निशाने साधे और सिंगापुर की प्रतिद्वंद्वी को 142-139 के स्कोर से हराकर व्यक्तिगत स्वर्ण पदक भी अपने नाम कर लिया। दो घंटे से भी कम समय में दो गोल्ड मेडल जीतकर शीतल ने नया कीर्तिमान रच दिया।

सुवर्णा राज ने चक्का फेंक में खोला स्वर्ण का खाता: शैलेश कुमार ने हाई जंप में बनाया खेल रिकॉर्ड

ट्रैक एंड फील्ड में गुरुवार की स्वर्णिम शुरुआत 44 वर्षीय अनुभवी व्हीलचेयर एथलीट सुवर्णा राज ने की। महिलाओं की एफ54 चक्का फेंक (डिस्कस थ्रो) स्पर्धा में सुवर्णा ने 15.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो फेंकते हुए भारत के लिए दिन का पहला स्वर्ण पदक जीता। इसके तुरंत बाद पुरुषों की ऊंची कूद (हाई जंप) टी63 स्पर्धा में शैलेश कुमार ने अपनी अद्भुत छलांग से स्टेडियम में बैठे दर्शकों को रोमांचित कर दिया। शैलेश ने 1.89 मीटर की शानदार छलांग लगाकर न केवल स्वर्ण पदक अपने नाम किया, बल्कि पैरा एशियाई खेलों का नया रिकॉर्ड भी स्थापित किया। युवाओं के लिए प्रेरणा बने शैलेश की इस ऐतिहासिक छलांग ने भारतीय एथलेटिक्स दल के आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा दिया।

400 मीटर ट्रैक पर अंजनाबेन और दिलीप का दबदबा: धर्मराज सोलाईराज ने लंबी कूद में रचा एशियाई रिकॉर्ड

गुरुवार को रनिंग ट्रैक पर भारतीय स्प्रिंटर्स की रफ्तार के आगे एशियाई प्रतिद्वंद्वी पूरी तरह बेबस नजर आए। महिलाओं की 400 मीटर टी47 रेस में अंजनाबेन बुंबाडिया ने हवा से बातें करते हुए 59.97 सेकेंड के समय के साथ पहला स्थान हासिल कर स्वर्णिम सफलता दर्ज की। ठीक इसी तरह पुरुषों की 400 मीटर टी47 स्पर्धा में दिलीप महादू गावित ने अपनी बिजली जैसी गति का प्रदर्शन किया और 48.27 सेकेंड में फिनिश लाइन पार कर भारत की झोली में एक और चमचमाता गोल्ड मेडल डाल दिया। दिन का सबसे जोरदार समापन पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में हुआ, जहां टी44/टी62/टी64 की संयुक्त श्रेणी में धर्मराज सोलाईराज ने 7.15 मीटर की विशाल छलांग लगाकर अपना एशियाई खिताब बरकरार रखा और एक नया एशियाई रिकॉर्ड भी अपनी झोली में डाल लिया।

भारत के 88 पदकों में एथलेटिक्स का सबसे बड़ा योगदान: बैडमिंटन, तैराकी और टेबल टेनिस में भी बरसे पदक

पैरा एशियाई खेलों में भारतीय दल की यह अब तक की सबसे प्रभावशाली और संतुलित पदक दौड़ साबित हो रही है। भारत ने अब तक 21 स्वर्ण, 26 रजत और 41 कांस्य सहित कुल 88 पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। भारत के इस शानदार अभियान की रीढ़ एथलेटिक्स टीम बनी हुई है, जिसने अकेले 52 पदकों (18 स्वर्ण, 16 रजत और 18 कांस्य) पर कब्जा जमाया है। गुरुवार को तीरंदाजी में स्वाति चौधरी, एथलेटिक्स में प्रीति पाल, मोहम्मद बासिल, अकीरा नंदन बोनाथू, जयंती बेहरा, वरुण भाटी, तेजलबेन दामोर, बैडमिंटन में मनीषा रामदास और तैराकी में कपिल कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के लिए रजत पदक जीते। वहीं बैडमिंटन डबल्स में प्रमोद भगत व मनीषा रामदास, कृष्णा नागर व नित्या सिवन, सिंगल्स में सुहास एलवाई, तैराकी में रवि बुडुगिना, स्वातिक पटेल, तेजस नंदनकुमार, एथलेटिक्स में राकेशभाई भट्ट, राहुल, रवन्नी वलसैननी तथा टेबल टेनिस में स्टार खिलाड़ी भाविना पटेल व शुभम वाधवा की जोड़ी ने कांस्य पदक जीतकर भारत की मेडल टैली को 88 के पार पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।