Asian Para Games 2026: बैडमिंटन कोर्ट पर भारत का डबल गोल्ड धमाका

Asian Para Games 2026: बैडमिंटन कोर्ट पर भारत का डबल गोल्ड धमाका

जापान के आइची-नागोया में चल रहे पैरा एशियाई खेल 2026 में भारतीय शटलरों ने अपने जोशीले और आक्रामक खेल से बैडमिंटन कोर्ट पर तिरंगे का परचम बुलंद कर दिया है। शुक्रवार की सुबह भारतीय खेल प्रशंसकों के लिए ऐतिहासिक खुशियां लेकर आई, जब भारत के पैरा-बैडमिंटन दल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में दो स्वर्ण और दो रजत पदक अपनी झोली में डाल लिए। अपने अंतिम और सबसे निर्णायक पड़ाव पर पहुंच चुके इन खेलों में भारतीय बैडमिंटन सितारों ने उम्मीद से बढ़कर खेल दिखाया और देश की पदक तालिका को एक नई रफ्तार दी। मेंस सिंगल्स की एसएल3 (SL3) कैटेगरी में जहां दो भारतीय दिग्गजों के बीच खिताबी भिड़ंत देखने को मिली, वहीं एसएल4 (SL4) वर्ग में भारतीय खिलाड़ी ने इंडोनेशिया के मजबूत प्रतिद्वंद्वी को एकतरफा शिकस्त देकर सोने पर कब्जा जमाया। महिला वर्ग में भी भारतीय चुनौती ने फाइनल तक का सफर तय कर देश के लिए बहुमूल्य रजत पदक सुनिश्चित किया।

ऑल इंडिया फाइनल में नीतेश कुमार की ऐतिहासिक जीत: पैरालंपिक चैंपियन प्रमोद भगत को सीधे गेमों में दी मात

मेंस सिंगल्स एसएल3 इवेंट का खिताबी मुकाबला भारतीय बैडमिंटन इतिहास के सबसे यादगार पलों में से एक बन गया, क्योंकि इस वर्ग का फाइनल पूरी तरह 'ऑल इंडिया मुकाबला' था। आमने-सामने थे भारत के दो शीर्ष पैरा-शटलर—नीतेश कुमार और तोक्यो पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता दिग्गज खिलाड़ी प्रमोद भगत। कोर्ट पर दोनों ही खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त रैली, ड्रॉप शॉट्स और नेट प्ले का रोमांचक खेल देखने को मिला। हालांकि, युवा जोश और सटीक रणनीति के दम पर नीतेश कुमार ने पूरे मुकाबले पर अपनी पकड़ बनाए रखी। नीतेश ने अपने सीनियर और अनुभवी हमवतन प्रमोद भगत को सीधे गेमों में 21-18, 21-16 से हराकर पैरा एशियाई खेलों का प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। वहीं, कड़े संघर्ष के बाद प्रमोद भगत को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। भारत के लिए यह मुकाबला इसलिए बेहद खास रहा क्योंकि जीत किसी की भी होती, गोल्ड और सिल्वर दोनों पदक भारत की ही झोली में आने पहले से तय थे।

नवीन शिवकुमार ने इंडोनेशियाई दीवार को किया ध्वस्त: एसएल4 वर्ग में एकतरफा अंदाज में जीता दूसरा गोल्ड

मेंस सिंगल्स एसएल4 इवेंट में भारत के उभरते हुए स्टार शटलर नवीन शिवकुमार ने ऐसा आक्रामक और सधा हुआ खेल दिखाया कि विरोधी खेमा दंग रह गया। फाइनल मुकाबले में नवीन का सामना इंडोनेशिया के शीर्ष पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी फ्रेडी सेतियावान से था। अंतरराष्ट्रीय सर्किट पर बेहद चपल माने जाने वाले सेतियावान को नवीन ने पहले ही अंक से बैकफुट पर धकेल दिया। नवीन ने तेजतर्रार स्मैश और कोर्ट कवरेज के दम पर पहले गेम को 21-9 के भारी अंतर से जीतकर मुकाबला अपने पक्ष में झुका लिया। दूसरे गेम में सेतियावान ने वापसी की भरसक कोशिश की और अंकों का अंतर कम करने का प्रयास किया, लेकिन नवीन ने अपनी नसों पर गजब का नियंत्रण रखते हुए दूसरा गेम भी 21-17 से जीत लिया। इस शानदार और एकतरफा खिताबी जीत के साथ नवीन शिवकुमार ने भारत को बैडमिंटन में दिन का दूसरा स्वर्ण पदक दिलाकर इतिहास रच दिया।

महिला वर्ग में सुमति सिवान का शानदार संघर्ष: एसएच6 फाइनल में चीनी दिग्गज से हारकर जीता सिल्वर

महिला वर्ग के एसएच6 (SH6) सिंगल्स फाइनल में भारत की प्रतिभावान पैरा-शटलर सुमति सिवान ने देश के लिए एक और पदक पक्का किया। सुमति ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए फाइनल का टिकट कटाया था। खिताबी भिड़ंत में उनका सामना चीन की बेहद ताकतवर और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में शीर्ष पर चल रहीं फेंगमेई ली से हुआ। घरेलू परिस्थितियों और जबरदस्त पावर गेम का फायदा उठाते हुए चीनी खिलाड़ी ने मुकाबले की शुरुआत से ही दबाव बना लिया। सुमति ने कई बेहतरीन रैलियों में वापसी करने का प्रयास किया, लेकिन फेंगमेई ली की आक्रामकता और सटीक कोर्ट प्लेसमेंट के आगे उनकी रणनीति पूरी तरह सफल नहीं हो सकी। सुमति को इस कड़े मुकाबले में 12-21, 13-21 से हार का सामना करना पड़ा। इस परिणाम के बाद सुमति सिवान को रजत पदक से संतोष करना पड़ा, लेकिन एशियाई खेलों के इस बड़े मंच पर भारत के लिए सिल्वर मेडल जीतना भी उनके करियर की एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।

पैरा एशियाई खेलों में भारत की मेडल बारिश: 100 से अधिक पदकों के साथ वैश्विक मंच पर दबदबा

जापान के आइची-नागोया में आयोजित हो रहे इन खेलों में शुक्रवार का दिन भारतीय दल के लिए स्वर्णिम साबित हो रहा है। सुबह से ही ट्रैक एंड फील्ड, आर्चरी और बैडमिंटन के विभिन्न इवेंट्स में भारतीय एथलीटों ने लगातार पोडियम फिनिश हासिल की है। बैडमिंटन में आए इन चार पदकों (2 गोल्ड और 2 सिल्वर) ने भारत की समग्र रैंकिंग और मेडल टैली को जबरदस्त मजबूती प्रदान की है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय पैरा-एथलीटों की यह निरंतर सफलता देश में पैरा-स्पोर्ट्स के लिए तैयार किए गए आधुनिक बुनियादी ढांचे, विश्वस्तरीय कोचिंग और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) जैसी सरकारी पहलों के सकारात्मक परिणामों को दर्शाती है। बैडमिंटन कोर्ट से आई इस दोहरी स्वर्णिम गूंज ने पूरे देश के खेल प्रेमियों को रोमांचित कर दिया है और भविष्य के पैरालंपिक खेलों के लिए भी मजबूत उम्मीदें जगा दी हैं।