Asian Para Games 2026: हेनी और संदीप ने वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ जीता गोल्ड

Asian Para Games 2026: हेनी और संदीप ने वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ जीता गोल्ड

जापान के आइची-नागोया में खेले जा रहे पैरा एशियाई खेल 2026 में भारतीय एथलीटों ने अपने अदम्य साहस, असाधारण प्रतिभा और अटूट जज्बे के दम पर नया इतिहास रच दिया है। प्रतियोगिता के शानदार शुक्रवार को भारतीय दल ने न केवल पदकों की झड़ी लगाई, बल्कि वैश्विक मंच पर दो-दो नए वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित कर तिरंगे की शान को नई बुलंदियों पर पहुंचा दिया। पुरुषों की भाला फेंक (जेवलिन थ्रो) स्पर्धा में भारत के स्टार पैरा एथलीट हेनी ने विश्व रिकॉर्ड दूरी नापते हुए देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाया, तो वहीं ट्रैक पर संदीप कुमार ने 400 मीटर दौड़ में बिजली जैसी रफ्तार दिखाते हुए नया कीर्तिमान स्थापित कर दूसरा गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इसके अलावा पैरा तीरंदाजी रेंज से भी देश के लिए दोहरी खुशखबरी आई, जहां पुरुषों की युगल टीम ने गोल्ड और महिलाओं की जोड़ी ने ऐतिहासिक सिल्वर मेडल हासिल किया। इन ऐतिहासिक सफलताओं के साथ ही प्रतियोगिता में भारत के पदकों का कुल आंकड़ा अब 100 के ऐतिहासिक मील के पत्थर को पार कर चुका है, जिससे समूचे देश में जश्न का माहौल है।

हेनी का जेवलिन थ्रो में नया वर्ल्ड रिकॉर्ड: 60.49 मीटर की थ्रो के साथ जीता स्वर्णिम मेडल

पुरुषों के एफ37/38 जेवलिन थ्रो इवेंट के फाइनल मुकाबले में भारतीय भाला फेंक एथलीट हेनी ने ऐसा चमत्कारिक प्रदर्शन किया जिसे खेल प्रेमी लंबे समय तक याद रखेंगे। अपने शुरुआती प्रयासों में बेहतरीन लय दिखाने के बाद हेनी ने अपने आखिरी और निर्णायक प्रयास में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। उनका भाला हवा को चीरते हुए 60.49 मीटर की अभूतपूर्व दूरी पर जाकर गिरा। इस थ्रो के साथ उन्हें कुल 1,116 प्वाइंट्स मिले, जो इस श्रेणी में एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बन गया। इस स्वर्णिम थ्रो के सामने विदेशी प्रतिद्वंद्वी बेबस नजर आए। ईरान के दिग्गज एथलीट होर्मोज सेइदिकाजपाउंजी 50.68 मीटर की थ्रो और 1,009 अंकों के साथ रजत पदक पर ही संतोष कर सके, जबकि चीन के चेंगजेई यू ने 943 अंकों के साथ कांस्य पदक हासिल किया। उल्लेखनीय है कि हेनी का इन खेलों में यह दूसरा पदक है; इससे महज दो दिन पहले उन्होंने एफ37 डिस्कस थ्रो इवेंट में भी भारत के लिए शानदार रजत पदक जीता था।

संदीप कुमार ने ट्रैक पर लगाई तूफानी दौड़: 52.28 सेकंड के नए कीर्तिमान से दहला स्टेडियम

ट्रैक इवेंट्स में भारत के पैरा धावक संदीप कुमार ने अपनी गति और स्टेमिना का ऐसा लोहा मनवाया कि नागोया का स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। पुरुषों की टी44/64 श्रेणी की 400 मीटर रेस में संदीप ने शुरुआत से ही आक्रामक दौड़ लगाई और विरोधी धावकों को कोई मौका नहीं दिया। उन्होंने महज 52.28 सेकंड में फिनिश लाइन पार कर एक नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया और भारत की झोली में एक और चमचमाता गोल्ड मेडल डाल दिया। इस रोमांचक रेस में सऊदी अरब के स्टार एथलीट एलसाना नाउर 53.13 सेकंड का समय लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। इसी स्पर्धा में भारत का गौरव और बढ़ गया जब देश के एक अन्य होनहार धावक अजय कुमार ने 53.61 सेकंड का समय निकालते हुए तीसरा स्थान हासिल किया और ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत को डबल पोडियम फिनिश दिलाई।

पैरा आर्चरी में हरविंदर-विजय की जोड़ी ने लहराया परचम: चीन को 5-1 से रौंदकर जीता गोल्ड

तीरंदाजी के मैदान पर भी भारतीय पैरा तीरंदाजों ने चीनी चुनौती को पूरी तरह ध्वस्त करते हुए अपनी श्रेष्ठता साबित की। पुरुषों के रिकर्व डबल्स के खिताबी मुकाबले में भारत के अनुभवी तीरंदाज हरविंदर सिंह और विजय सुंडी की जोड़ी ने सटीक निशानों की झड़ी लगा दी। गोल्ड मेडल मैच में भारतीय जोड़ी का सामना मेजबान एशियाई महाशक्ति चीन की बेहद मजबूत जोड़ी से था। हरविंदर और विजय ने दबाव के पलों में गजब का मानसिक संतुलन दिखाया और चीनी तीरंदाजों को 5-1 के विशाल अंतर से करारी शिकस्त देकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। भारतीय तीरंदाजों द्वारा हर सेट में लगाए गए लगातार 10 और 9 अंकों के तीरों ने प्रतिद्वंद्वी टीम के हौसले पस्त कर दिए और भारत को पोडियम के शीर्ष पर पहुंचा दिया।

महिला रिकर्व डबल्स में भावना और पूजा का ऐतिहासिक रजत: पहली बार भारत ने रचा यह कीर्तिमान

निशानेबाजी और पुरुषों की तीरंदाजी के साथ-साथ भारत की बेटियों ने भी पैरा आर्चरी में नया इतिहास रचकर देश का मान बढ़ाया। महिला रिकर्व डबल्स के फाइनल मुकाबले में भारत की भावना चौधरी और पूजा की जोड़ी ने फाइनल तक का सफर तय कर सभी को प्रभावित किया। खिताबी भिड़ंत में उन्हें चीन की मजबूत टीम के हाथों 6-0 से हार का सामना जरूर करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद इस भारतीय जोड़ी ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली। भावना और पूजा पैरा एशियाई खेलों के इतिहास में महिला रिकर्व डबल्स स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाली भारत की पहली जोड़ी बन गई हैं। इस ऐतिहासिक सिल्वर मेडल ने यह साबित कर दिया कि भारतीय महिला तीरंदाज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे कठिन और अनुभवी प्रतिद्वंद्वियों को सीधी चुनौती देने में सक्षम हैं