सिद्धू मूसेवाला के छोटे भाई के लिए Z+ सुरक्षा की मांग: वकील ने अमित शाह को लिखा पत्र
दिवंगत पंजाबी गायक शुभदीप सिंह सिद्धू उर्फ सिद्धू मूसेवाला के परिवार की जान पर मंडराते खतरे को लेकर एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता जताई गई है। सुप्रीम कोर्ट और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के जाने-माने अधिवक्ता तथा काउंसिल ऑफ लॉयर्स के चेयरमैन वासु रंजन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक विस्तृत और आपातकालीन पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने सिद्धू मूसेवाला के माता-पिता—सरदार बलकौर सिंह और माता चरण कौर—सहित उनके नवजात छोटे भाई के लिए केंद्र सरकार से तुरंत 'जेड प्लस' (Z+) श्रेणी की शीर्ष सुरक्षा मुहैया कराने की पुरजोर मांग की है। वकील ने आशंका व्यक्त की है कि कुख्यात अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर सिंडिकेट और सक्रिय आपराधिक तत्व मूसेवाला के इस मासूम भाई और उनके परिवार को अपनी प्रतिशोध की आग का नया निशाना बना सकते हैं। इस संवेदनशील विषय पर गृह मंत्रालय से शीर्ष खुफिया एजेंसियों के जरिए तत्काल थ्रेट असेसमेंट (खतरे का मूल्यांकन) कराने का आग्रह किया गया है, जिसने मानसा से लेकर चंडीगढ़ और दिल्ली के सुरक्षा हलकों में हड़कंप मचा दिया है।
कनाडा के मंच पर दिखा मासूम भाई: सार्वजनिक पहचान बढ़ने से गैंगस्टरों की रडार पर परिवार
केंद्रीय गृह मंत्री को प्रेषित आधिकारिक पत्र में वकील वासु रंजन ने घटनाक्रम की पृष्ठभूमि का विस्तार से हवाला दिया है। उन्होंने स्मरण कराया कि 29 मई 2022 को पंजाब के मानसा जिले के जवाहरके गांव में हथियारबंद गैंगस्टरों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाकर सिद्धू मूसेवाला की निर्मम हत्या कर दी थी। उस नृशंस हत्याकांड के गहरे घाव आज भी मूसेवाला के प्रशंसकों और परिवार के दिलों में ताजा हैं। वकील ने पत्र में बताया कि हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो व्यापक रूप से सामने आया है, जिसमें मूसेवाला के छोटे भाई को कनाडा में आयोजित एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मंच पर देखा गया। अधिवक्ता के मुताबिक, उस नन्हे बच्चे के हाव-भाव, मासूम अंदाज और चेहरे की बनावट पूरी तरह सिद्धू मूसेवाला की जीवंत याद दिलाते हैं। उन्होंने भारी चिंता जताते हुए रेखांकित किया कि मूसेवाला की विराट संगीत विरासत और जनसमर्थन से जुड़ी यह बढ़ती सार्वजनिक पहचान असामाजिक तत्वों, विरोधी गिरोहों और अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर नेटवर्क की आंखों में खटक सकती है, जिससे इस मासूम और उसके माता-पिता की सुरक्षा पर बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
प्रशिक्षित कमांडो, सुरक्षा जैमर और अंतरराज्यीय समन्वय: Z+ सुरक्षा में क्या-क्या शामिल करने की मांग?
अधिवक्ता वासु रंजन ने पत्र में केवल औपचारिक सुरक्षा बढ़ाने की बात नहीं कही, बल्कि आधुनिक सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत एक पूर्ण और अभेद्य सुरक्षा चक्रव्यूह की रूपरेखा गृह मंत्रालय के समक्ष रखी है। उन्होंने सक्षम सुरक्षा एजेंसियों से विस्तृत इनपुट लेकर परिवार को केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (जैसे सीआरपीएफ या सीआईएसएफ) के ट्रेंड कमांडो द्वारा लैस जेड प्लस सुरक्षा घेरा प्रदान करने की अपील की है। मांग पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इस सुरक्षा प्रबंध में उच्च-स्तरीय क्लोज प्रोटेक्शन टीम (सीपीटी), एडवांस सिक्यूरिटी लायजन (एएसएल), काफिले के साथ चलने वाले अत्याधुनिक मोबाइल सुरक्षा जैमर और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बुलेटप्रूफ गाड़ियां शामिल की जानी चाहिए। इसके अलावा, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और चंडीगढ़ के बीच परिवार की लगातार होने वाली आवाजाही को देखते हुए राज्यों के पुलिस बलों के बीच मजबूत अंतरराज्यीय सुरक्षा समन्वय (Inter-State Coordination) और परिवार की विदेश यात्राओं के दौरान भारतीय दूतावासों के जरिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है।
गृह मंत्री अमित शाह से व्यक्तिगत मुलाकात का मांगा समय: परिवार दोबारा न झेले कोई त्रासदी
काउंसिल ऑफ लॉयर्स के चेयरमैन ने पत्र में बेहद भावुक अपील करते हुए कहा कि मूसेवाला परिवार पहले ही अपने इकलौते नौजवान बेटे को खोकर असहनीय पीड़ा और अवसाद से गुजर चुका है। बुढ़ापे में आईवीएफ तकनीक के जरिए जन्मे इस छोटे बच्चे का जीवन अनमोल है और किसी भी सूरत में परिवार को दोबारा किसी खौफनाक त्रासदी का सामना न करना पड़े, इसके लिए सरकार को हर संभव एहतियाती और निवारक कदम उठाने चाहिए। अधिवक्ता ने इस पूरे मामले की गंभीरता और संवेदनशील साक्ष्यों को आमने-सामने रखने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से व्यक्तिगत मुलाकात हेतु शीघ्र समय देने का विनम्र अनुरोध किया है। उन्होंने आग्रह किया है कि गृह मंत्रालय तत्काल प्रभाव से इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) जैसी शीर्ष खुफिया विंग्स को मूसेवाला परिवार पर मंडरा रहे खतरों का नए सिरे से व्यापक विश्लेषण करने का स्पष्ट आदेश जारी करे। इस पत्र की एक अधिकृत प्रति सीधे इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर को भी आवश्यक संज्ञान और अग्रिम कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई है।
किसी विशिष्ट धमकी का उल्लेख नहीं, लेकिन समय रहते एहतियात जरूरी: खुफिया समीक्षा की दरकार
पत्र की विधिक और तकनीकी बारीकियों पर गौर करें तो इसमें किसी खास गैंगस्टर या अंडरवर्ल्ड गिरोह द्वारा सीधे तौर पर दी गई किसी नई और विशिष्ट धमकी (स्पेसिफिक इनपुट) का उल्लेख नहीं किया गया है। बल्कि यह कदम एहतियाती तौर पर संभावित खतरे की गंभीरता को भांपते हुए उठाया गया है। पंजाब में गैंगवार, फिरौती सिंडिकेट और सीमा पार से संचालित होने वाले आपराधिक नेटवर्क के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए कानूनी जानकारों का मानना है कि ऐसे हाई-प्रोफाइल मामलों में किसी औपचारिक धमकी का इंतजार करना भारी भूल साबित हो सकता है। 2022 में सिद्धू की सुरक्षा में की गई अचानक कटौती के तुरंत बाद हुई त्रासदी से सबक लेते हुए, अब केंद्र और राज्य सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि वे बिना किसी प्रशासनिक हीला-हवाली के इस नन्हे बालक और उसके बुजुर्ग माता-पिता की सुरक्षा व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा करें ताकि किसी भी संभावित अनहोनी को समय रहते पूरी तरह से नाकाम किया जा सके।