पंजाब विधानसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पेश
पंजाब की सियासत और देश के संवैधानिक ढांचे के भीतर एक बहुत बड़ा राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। चंडीगढ़ स्थित पंजाब विधानसभा में शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक निंदा और जांच से जुड़ा प्रस्ताव पेश किया गया। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने चुनाव आयोग पर मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर हेरफेर करने, गरीबों व अल्पसंख्यकों के नाम काटने और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से समझौता करने का बेहद संगीन आरोप लगाया है। इस तीखे प्रस्ताव के जरिए आम आदमी पार्टी ने सीधे तौर पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ-साथ केंद्र की एनडीए सरकार को बाहर व भीतर से समर्थन दे रहे प्रमुख घटक दलों को भी कठघरे में खड़ा कर दिया। सदन में चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के विधायकों ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू (TDP) और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (JDU) का नाम लेकर कहा कि भाजपा को सत्ता के शीर्ष पर बनाए रखने वाले सहयोगी दल भी चुनाव आयोग में चल रही इस कथित धांधली के लिए उतने ही जिम्मेदार हैं जितनी केंद्र सरकार।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में पेश किया प्रस्ताव: मतदाता सूची से नाम हटाने पर चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करने की मांग
पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ औपचारिक प्रस्ताव सदन के पटल पर रखा। प्रस्ताव पेश करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर गहरा संकट होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र का अस्तित्व केवल संविधान में निहित समानता, सामाजिक न्याय और जनता की सर्वोच्च संप्रभुता पर टिका हुआ है, और मतदान का अधिकार इस पूरी व्यवस्था की सबसे मजबूत रीढ़ है। चीमा ने आरोप लगाया कि देशभर में सुनियोजित तरीके से लाखों वास्तविक और पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूचियों से हटाए जा रहे हैं। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के दौरान नियमों को ताक पर रखकर वैध मतदाताओं को उनके संवैधानिक मताधिकार से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा की जा रही इन संदिग्ध कार्यवाहियों ने समूची चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता और संवैधानिक विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं, जिसकी स्वतंत्र और उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराना अपरिहार्य हो चुका है।
बाबा साहेब के मताधिकार के संघर्ष की दिलाई याद: गरीबों और दलितों को निशाना बनाने का लगाया गंभीर आरोप
सदन को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के ऐतिहासिक संघर्षों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने सदन को याद दिलाया कि आजादी से पहले औपनिवेशिक दौर में भारत के भीतर वोट डालने का अधिकार केवल समाज के गिने-चुने, संपन्न, अमीर और कुलीन वर्गों तक ही सीमित था। उस समय केवल बड़े वकीलों, डॉक्टरों, न्यायाधीशों, जागीरदारों और राजा-महाराजाओं को ही वोट डालने की कानूनी अनुमति थी। यह बाबा साहेब का ही अथक संघर्ष और दूरदृष्टि थी कि उन्होंने देश के हर गरीब, मजदूर, वंचित, शोषित, दलित और अनुसूचित जाति-जनजाति के नागरिक को एक वोट और एक मूल्य का पवित्र अधिकार दिलाया। चीमा ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आज स्वतंत्र भारत में उसी लोकतांत्रिक अधिकार पर कुठाराघात किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत भाजपा विरोधी रुख रखने वाले कमजोर तबकों, अल्पसंख्यकों और दलितों के वोट वोटर लिस्ट से गायब किए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या के समान है।
फर्जी दस्तावेजों से वोट काटने का सनसनीखेज दावा: कर्नाटक के मंत्री और अरविंद केजरीवाल के संदर्भ से साधा निशाना
विधानसभा में अपने भाषण के दौरान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने अन्य राज्यों के मामलों का हवाला देकर इसे एक राष्ट्रीय स्तर की साजिश करार दिया। उन्होंने कर्नाटक के राजस्व मंत्री के साथ हुई अपनी हालिया बातचीत का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां किस प्रकार कथित तौर पर फर्जी और जाली दस्तावेज तैयार कर बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के सामने पेश किए गए, ताकि गरीब बस्तियों और विपक्षी दलों के पारंपरिक समर्थकों के नाम वोटर लिस्ट से डिलीट कराए जा सकें। इसके साथ ही उन्होंने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा उठाए गए मुद्दों का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में भी विधानसभा चुनावों से पहले करीब 40 हजार वैध मतदाताओं के नाम संदिग्ध रूप से काट दिए गए थे। चीमा ने जोर देकर कहा कि किसी भी वास्तविक नागरिक को गैरकानूनी और असंवैधानिक तरीकों से वोट डालने से रोकना सीधे तौर पर संविधान की मूल भावना पर हमला है, जिसे कोई भी लोकतांत्रिक समाज कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता।
नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू की चुप्पी पर बरसीं AAP विधायक: NDA के सहयोगियों को ठहराया बराबर का कसूरवार
सदन में प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी की महिला विधायक इंद्रजीत कौर और सर्वजीत कौर मनुके ने आक्रामक रुख अपनाते हुए एनडीए के क्षेत्रीय घटक दलों को जमकर लताड़ा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के विवादास्पद कदमों और मतदाता सूची की धांधली के मामले में केवल भाजपा को ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार को बैसाखी दे रहे एनडीए के सहयोगी दलों को भी जनता की अदालत में जवाब देना होगा। विधायकों ने जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू का नाम लेते हुए कहा कि जब देश के संवैधानिक संस्थानों की निष्पक्षता तार-तार हो रही है और मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण (SIR) में भारी अनियमितताएं सामने आ रही हैं, तब इन वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी दर्शाती है कि वे सत्ता के स्वार्थ में लोकतंत्र के दमन के मूक गवाह बने हुए हैं। आप विधायकों ने कहा कि यदि सहयोगी दल समय रहते हस्तक्षेप नहीं करेंगे, तो इतिहास उन्हें लोकतंत्र की हत्या में बराबर का हिस्सेदार मानेगा।
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और CEC को भेजी जाएगी प्रस्ताव की आधिकारिक कॉपी: दोषी पाए जाने पर आपराधिक केस की मांग
पंजाब विधानसभा में ध्वनिमत से आगे बढ़े इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार और देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्थाओं से स्वतंत्र, पारदर्शी और जवाबदेह चुनाव प्रक्रिया की बहाली के लिए तत्काल कड़े कदम उठाने की मांग की गई है। प्रस्ताव में विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल और उनके प्रशासनिक नेतृत्व में मतदाता सूचियों से संबंधित लिए गए फैसलों की जांच के लिए एक स्वायत्त और निष्पक्ष जांच तंत्र गठित किया जाए। इसमें यह भी स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया कि यदि जांच के दौरान चुनाव आयोग या प्रशासन के किसी भी अधिकारी के खिलाफ जानबूझकर वोट काटने या साजिश रचने के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता और संबंधित कानूनों के तहत तत्काल आपराधिक मुकदमा दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) कुलतार सिंह संधवां और सदन की सहमति से पारित इस ऐतिहासिक प्रस्ताव की आधिकारिक प्रति अब भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त को औपचारिक कार्रवाई के लिए सीधे भेजी जा रही है।