डेथ होक्स के बीच याद आया नाना पाटेकर का वो किस्सा, जब किसानों के लिए ठुकरा दी थी 1.5 करोड़ की कार

डेथ होक्स के बीच याद आया नाना पाटेकर का वो किस्सा, जब किसानों के लिए ठुकरा दी थी 1.5 करोड़ की कार

सोशल मीडिया पर दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की बेबुनियाद अफवाहें फैलने के बाद जहां एक तरफ प्रशंसकों ने राहत की सांस ली है कि अभिनेता पूरी तरह स्वस्थ हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके सादगी भरे जीवन और समाजसेवा से जुड़े पुराने प्रेरक किस्से एक बार फिर इंटरनेट पर छा गए हैं। बॉलीवुड में अपनी बेबाक अदाकारी और करोड़ों दिलों पर राज करने वाले नाना पाटेकर का असल जीवन चकाचौंध से कोसों दूर रहा है। ऐसा ही एक दिल छू लेने वाला वाकया तब का है, जब उन्होंने अपने एक सपने को सिर्फ इसलिए कुर्बान कर दिया ताकि वह रकम लाचार और कर्ज में डूबे किसान परिवारों की जिंदगी संवारने के काम आ सके।

आमतौर पर फिल्म इंडस्ट्री के सितारे करोड़ों की गाड़ियां, आलीशान बंगले और भव्य लाइफस्टाइल के लिए जाने जाते हैं, लेकिन नाना पाटेकर की सोच हमेशा से विपरीत रही है। वे कई दशकों से महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों और संकट में घिरे अन्नदाताओं के लिए मसीहा बनकर खड़े रहे हैं। जब उनके निधन की झूठी खबरें उड़ीं, तो फैंस ने उनके इसी त्याग और महानता को याद करते हुए बताया कि क्यों नाना पाटेकर सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

जब 1.5 करोड़ की लग्जरी गाड़ी खरीदने का इरादा किसानों के आंसुओं के आगे बदला

यह किस्सा उस समय का है जब नाना पाटेकर एक बेहद महंगी और आधुनिक लग्जरी गाड़ी खरीदने का विचार कर रहे थे। उस गाड़ी की कीमत लगभग 1.5 करोड़ रुपये थी और उन्होंने उसे खरीदने की पूरी तैयारी भी कर ली थी। लेकिन उसी दौरान महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा इलाकों में भीषण सूखे के चलते कई किसानों की आत्महत्या की दर्दनाक खबरें सामने आईं। जब नाना पाटेकर ने उन पीड़ित परिवारों की बदहाली और बेबसी को करीब से देखा, तो उनका दिल दहल गया।

नाना पाटेकर ने खुद एक बातचीत में साझा किया था कि उस वक्त उनके अंतर्मन ने उन्हें झकझोर दिया। उन्होंने सोचा कि वे जिस 1.5 करोड़ रुपये की गाड़ी में महज कुछ घंटे का सफर तय करेंगे, उसी रकम से सैकड़ों अनाथ बच्चों की पढ़ाई, विधवाओं की आर्थिक मदद और दर्जनों गांवों में पानी के संकट को हमेशा के लिए दूर किया जा सकता है। इस एक विचार ने उनके फैसले को पल भर में बदल दिया। उन्होंने तुरंत उस महंगी गाड़ी को खरीदने का विचार हमेशा के लिए छोड़ दिया और वह पूरी धनराशि सूखा पीड़ित परिवारों और राहत कार्यों के लिए समर्पित कर दी।

'नाम फाउंडेशन' के जरिए बदली हजारों गांवों और परिवारों की तकदीर

नाना पाटेकर की यह मदद केवल एक बार की आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रही। साल 2015 में उन्होंने अपने साथी अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर 'नाम फाउंडेशन' (NAAM Foundation) की नींव रखी। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य उन किसानों की मदद करना था जो सूखे और भारी कर्ज के बोझ तले अपनी जान गंवा रहे थे। नाना ने केवल अपनी जेब से दान नहीं दिया, बल्कि खुद तपती धूप में गांवों में जाकर पीड़ित परिवारों से मिले और विधवा माताओं को आर्थिक संबल प्रदान किया।

नाम फाउंडेशन ने महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जल संरक्षण का काम किया। नदियों और नालों को गहरा और चौड़ा करने से लेकर चेक डैम बनाने तक, नाना की इस पहल ने कई बंजर गांवों में हरियाली वापस ला दी। जहां किसान बूंद-बूंद पानी को तरसते थे, वहां भूजल स्तर में भारी सुधार हुआ। इतना बड़ा सामाजिक बदलाव लाने के बावजूद नाना पाटेकर कभी अपनी इस सेवा का ढिंढोरा नहीं पीटते, बल्कि इसे अपना नागरिक कर्तव्य मानते हैं।

करोड़ों कमाने के बाद भी 1BHK और सादगी भरा जीवन जीते हैं नाना

नाना पाटेकर का यह फैसला उनके समग्र व्यक्तित्व का एक छोटा सा हिस्सा भर है। आज भी जब कई सितारे मुंबई में अरबों के पेंटहाउस में रहते हैं, नाना पाटेकर अपनी मां के साथ मुंबई के एक बेहद साधारण 1BHK फ्लैट में वर्षों तक रहे और ज्यादातर समय अपने पुणे के खड़कवासला स्थित फॉर्महाउस पर बिताते हैं, जहां वे खुद खेती करते हैं। वे आज भी सादे सूती कुर्ते-पायजामे में घूमते हैं और दिखावे से पूरी तरह दूर रहते हैं।

यही कारण है कि जब भी सोशल मीडिया पर क्लिकबेट या व्यूज बटोरने के लिए उनके नाम पर फर्जी 'डेथ होक्स' जैसी खबरें गढ़ी जाती हैं, तो जनता का गुस्सा फूट पड़ता है। फैंस का कहना है कि जिस इंसान ने अपनी लग्जरी छोड़कर देश के अन्नदाताओं की सांसें बचाने के लिए अपना जीवन लगा दिया, उनके बारे में इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना अफवाहें फैलाना बेहद शर्मनाक है। नाना पाटेकर आज भी पूरी तरह स्वस्थ हैं और समाज के लिए निरंतर सक्रिय रहकर मिसाल पेश कर रहे हैं।