चले थे ईरान का नामोनिशां मिटाने, अपनी ही फजीहत करा बैठे डोनाल्ड ट्रंप? अमेरिका को लगा 31,943 करोड़ का भारी झटका
पश्चिम एशिया में ईरान की सैन्य शक्ति और उसके प्रभाव को नेस्तनाबूद करने का दावा करने वाले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक कूटनीति अब वाशिंगटन के लिए भारी फजीहत का सबब बन गई है। ईरान के खिलाफ शुरू किए गए अमेरिकी सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के ताजा आधिकारिक आंकड़े सामने आने के बाद पेंटागन से लेकर व्हाइट हाउस तक हड़कंप मच गया है। अमेरिकी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) और रक्षा विशेषज्ञों की हालिया समीक्षा के मुताबिक, इस युद्ध में अमेरिका ने अपने 81 अत्याधुनिक लड़ाकू विमान, ड्रोन और टोही हेलीकॉप्टर गंवा दिए हैं। इन तबाह या क्षतिग्रस्त हुए सैन्य साजो-सामान की कुल कीमत लगभग 3.3 अरब डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में करीब 31,943 करोड़ रुपये आंकी गई है।
मध्य पूर्व के रणक्षेत्र में जिस आसानी से जीत के दावे किए जा रहे थे, जमीनी हकीकत उसके ठीक उलट साबित हुई है। ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, सटीक मिसाइल हमलों और रणनीतिक जवाबी कार्रवाई ने अमेरिकी वायुसेना के दबदबे को गंभीर चुनौती दी है। वाशिंगटन में रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई की शुरुआत करते वक्त इस बात का सही अनुमान नहीं लगाया था कि ईरान जैसी क्षेत्रीय शक्ति से सीधा टकराव अमेरिकी खजाने और प्रतिष्ठा पर कितना भारी पड़ सकता है। 31 हजार करोड़ से ज्यादा के आधुनिक सैन्य विमानों का तबाह होना आधुनिक सैन्य इतिहास में महाशक्ति अमेरिका के लिए सबसे बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है।
12 F-15E जेट, पांचवीं पीढ़ी का F-35 और 45 रीपर ड्रोन हुए जमींदोज
रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों ने पूरी दुनिया के सैन्य विश्लेषकों को चौंका दिया है। अमेरिकी सेना ने इस मिशन के दौरान अपने सबसे भरोसेमंद और घातक माने जाने वाले 12 F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट खो दिए हैं। इससे भी बड़ा झटका तब लगा जब पांचवीं पीढ़ी का सबसे आधुनिक स्टील्थ फाइटर एयरक्राफ्ट F-35A लाइटनिंग-II भी इस युद्ध की भेंट चढ़ गया। अकेले एक F-35A की कीमत 9.2 करोड़ डॉलर (करीब 770 करोड़ रुपये) से अधिक है। इसके अलावा जमीनी हमलों के लिए मशहूर दो A-10 थंडरबोल्ट-II ग्राउंड-अटैक विमान और हवा में ईंधन भरने वाले सात KC-135 स्ट्रैटोटैंकर रीफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट भी नुकसान के दायरे में आए हैं।
आसमान में अमेरिका की आंख माने जाने वाले अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (UAV) के बेड़े को सबसे भारी तबाही झेलनी पड़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, सेना ने कुल 45 MQ-9 रीपर मल्टी-रोल ड्रोन गंवाए हैं। एक MQ-9 रीपर ड्रोन की कीमत 3 से 5 करोड़ डॉलर के बीच होती है। इसके अतिरिक्त एक हाई-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस MQ-4C ट्राइटन ड्रोन और तीन MQ-1 प्रीडेटर ड्रोन भी नष्ट हुए हैं। ईरान की वायु रक्षा प्रणालियों ने अमेरिकी ड्रोन तकनीक की अभेद्यता के दावों की हवा निकाल दी है।
E-3 सेंट्री सर्विलांस प्लेन का नुकसान: अमेरिकी हवाई खुफिया तंत्र को गहरी चोट
इस पूरे नुकसान में आर्थिक और रणनीतिक नजरिए से सबसे बड़ा झटका बोइंग 707 पर आधारित E-3 सेंट्री एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) विमान का नष्ट होना है। इस एक विमान की अनुमानित लागत करीब 27 करोड़ डॉलर (लगभग 2,250 करोड़ रुपये) है। अमेरिकी वायुसेना के पास ऐसे सर्विलांस विमानों की संख्या बेहद सीमित है और वर्ष 2015 तक केवल 32 ऐसे विमान ही पूरी तरह सक्रिय सेवा में थे।
इसके साथ ही दो MC-130J कमांडो-II स्पेशल ऑपरेशंस विमान, एक HH-60W जॉली ग्रीन-II सर्च-एंड-रेस्क्यू हेलीकॉप्टर, एक AH-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर, चार AH-6 लिटिल बर्ड लाइट अटैक हेलीकॉप्टर और एक MH-60 सी हॉक मैरीटाइम हेलीकॉप्टर भी इस संघर्ष में नष्ट या क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इस स्तर के अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सर्विलांस बेड़े का नुकसान अमेरिका के पूरे पश्चिम एशिया कमांड सिस्टम के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
फ्रेंडली फायर और जॉर्डन बेस पर स्ट्राइक: कैसे खुला सैन्य प्रबंधन का पोल
खुफिया दस्तावेजों और रिपोर्टों से यह भी खुलासा हुआ है कि नुकसान का कारण केवल ईरानी मिसाइलें ही नहीं थीं, बल्कि युद्ध के भारी दबाव में अमेरिकी और सहयोगी सेनाओं के बीच समन्वय की भारी खामियां भी जिम्मेदार रहीं। रिपोर्ट के अनुसार, 2 मार्च को कुवैत के हवाई क्षेत्र में 'फ्रेंडली फायर' (अपनों की ही गोलीबारी) की दुखद घटना में तीन F-15 जेट मार गिराए गए थे। वहीं अगले महीने ईरान की सीमा में एक और लड़ाकू विमान को मार गिराया गया।
इसके अतिरिक्त 9 और 10 सितंबर को जॉर्डन स्थित मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस पर ईरान द्वारा किए गए भीषण हवाई हमलों में कम से कम आठ अन्य F-15E विमानों को गहरा नुकसान पहुंचा। अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सीधे हमले झेलने और अपने ही एयर डिफेंस की गलतियों से विमान गंवाने की इन घटनाओं ने दुनिया भर में पेंटागन की तकनीकी श्रेष्ठता और कमान नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
28 अरब डॉलर के पार पहुंचा युद्ध का कुल खर्च, ट्रंप की नीतियों पर घर में ही घमासान
विमानों और ड्रोनों के सीधे 31,943 करोड़ रुपये के नुकसान के अलावा युद्ध संचालन की समग्र लागत भी बेकाबू हो चुकी है। कांग्रेसनल बजट ऑफिस (CBO) ने शुरुआत में इस सैन्य अभियान की लागत 21.7 अरब डॉलर आंकी थी। लेकिन अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के नवीनतम आकलन के अनुसार, हथियारों, मिसाइलों और लॉजिस्टिक्स के अत्यधिक इस्तेमाल के चलते यह खर्च बढ़कर 28.1 अरब डॉलर (करीब 2.35 लाख करोड़ रुपये) के पार पहुंच चुका है।