पहाड़ी लुक में कंगना रनौत का खूबसूरत फोटोशूट, बताया अपना फेवरिट लोकगीत और गहरा मतलब
बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने एक बार फिर अपनी मिट्टी और परंपरा से जुड़े अंदाज से फैंस का ध्यान खींच लिया है। मनाली की वादियों के बीच कंगना ने पारंपरिक पहाड़ी पोशाक में एक खास फोटोशूट कराया है, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। हाथ में रंग-बिरंगे फूल थामे और खूबसूरत बगीचे की पृष्ठभूमि में उन्होंने कई मनमोहक पोज दिए हैं। इस लुक की सबसे खास बात यह रही कि कंगना ने इसकी स्टाइलिंग पूरी तरह खुद की है, जिसमें हिमाचली सादगी, नफासत और पहाड़ों की शांत संस्कृति की स्पष्ट झलक देखने को मिल रही है।
तस्वीरें साझा करते हुए कंगना ने प्रशंसकों से पूछा कि उन्हें उनका यह 'पहाड़ी लड़की' वाला अंदाज कैसा लगा। उनके इस देसी और सादगी भरे अवतार की इंटरनेट पर जमकर सराहना हो रही है। फैंस का कहना है कि ग्लैमर की चकाचौंध से दूर अपनी जड़ों का प्रतिनिधित्व करने में कंगना हमेशा सबसे आगे रहती हैं। उनके पहनावे से लेकर उनकी मुस्कान तक, हर फ्रेम में हिमाचल प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और स्थानीय विरासत का प्रभाव साफ नजर आ रहा है।
बचपन का सबसे पसंदीदा लोकगीत 'अम्मा पुछदी' और उसका अनदेखा दर्द
इस खूबसूरत फोटोशूट के साथ कंगना ने केवल तस्वीरें ही पेश नहीं कीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के एक बेहद भावुक लोकगीत की चर्चा भी छेड़ी। कंगना ने लिखा कि हिमाचल का पारंपरिक संगीत बहुत ही अंडर-रेटेड (कम आंका गया) रहा है, जबकि उसमें अद्भुत भावनात्मक गहराई छिपी होती है। उन्होंने बताया कि 'अम्मा पुछदी' बचपन से ही उनके दिल के सबसे करीब और पसंदीदा गीतों में से एक रहा है। इस गीत की धुन जितनी शांत और सुकून देने वाली है, इसके बोल उतने ही मर्मस्पर्शी और संवेदनशील हैं।
कंगना ने इस लोकगीत का भावार्थ समझाते हुए लिखा कि यह एक मां और बेटी के खूबसूरत रिश्ते और संवाद को बयां करता है। गीत में एक फिक्रमंद मां यह जानना चाहती है कि आखिर उसकी लाडली बेटी की भूख क्यों मर गई है और वह गुमसुम क्यों रहने लगी है। वहीं दूसरी ओर, बेटी अपने मन में उठे प्रेम रोग और विरह की व्यथा को सीधे शब्दों में बयां नहीं कर पाती। वह अपने प्रेमी के प्रति नाराजगी और शिकायत जताने के लिए मोर के नाम का सहारा लेती है। प्रतीकों और रूपकों के जरिए भावनाओं को व्यक्त करने की यह कला ही इस लोकगीत को अनूठा और खास बनाती है।
पहाड़ के शांत स्वभाव जैसी सादगी और प्रशंसकों का जबरदस्त प्यार
कंगना ने इस गीत की तुलना पहाड़ी लोगों के मूल स्वभाव से करते हुए लिखा कि यह धुन ठीक वैसी ही है जैसे यहां के लोग होते हैं—शांत, सौम्य, गहरे और जीवन को खुशी देने वाले। पहाड़ों में भावनाओं का प्रदर्शन कभी उग्र नहीं होता, बल्कि इशारों और ठहराव में सब कुछ कह दिया जाता है। कंगना की इस भावनात्मक व्याख्या ने सोशल मीडिया यूजर्स का दिल जीत लिया है। कमेंट सेक्शन में लोग न केवल उनके पारंपरिक लिबास की तारीफ कर रहे हैं, बल्कि हिमाचल के अनसुने लोक संगीत को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर सामने लाने के लिए उनका आभार भी जता रहे हैं।
गौरतलब है कि कंगना रनौत जब भी अपने गृह राज्य हिमाचल में होती हैं, वे वहां के मंदिरों, स्थानीय खान-पान, पहनावों और कला को प्रमोट करने का कोई मौका नहीं छोड़तीं। हाल ही में मनाली के ऐतिहासिक श्री हिडिंबा देवी मंदिर में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से उनकी शिष्टाचार भेंट भी चर्चा में रही थी। इसके तुरंत बाद सामने आए इस पहाड़ी फोटोशूट और लोकगीत के संदेश ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कंगना अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं से कितनी गहराई से जुड़ी हुई हैं।