OTT डेब्यू करने से घबरा रहे थे सनी देओल, बोले- 'मैं 60 साल का हो गया हूं, तो अब क्या...
हिंदी सिनेमा में अपनी गरजदार आवाज, ढाई किलो के हाथ और बड़े पर्दे पर हैंडपंप उखाड़ देने वाले एक्शन से दशकों तक राज करने वाले सनी देओल आज भी दर्शकों के दिलों पर छाए हुए हैं। 'गदर 2' की ऐतिहासिक सफलता के बाद अभिनेता के पास बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स की कतार लगी हुई है। इसी बीच जहां बॉलीवुड के तमाम दिग्गज स्टार्स डिजिटल दुनिया यानी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर वेब सीरीज और ओरिजिनल फिल्मों का रुख कर रहे हैं, वहीं खुद सनी देओल शुरुआती दिनों में ओटीटी पर कदम रखने को लेकर बेहद असहज और संकोची थे।
हाल ही में एक बातचीत के दौरान सनी देओल ने अपने डिजिटल डेब्यू और आधुनिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स को लेकर अपनी पुरानी हिचकिचाहट पर खुलकर बात की। उन्होंने बेहद सादगी और बेबाकी से स्वीकार किया कि एक समय ऐसा था जब वे इस माध्यम को अपनाने से कतरा रहे थे और उनके मन में उम्र और किरदारों को लेकर कई तरह के असमंजस चल रहे थे।
"मैं 60 साल का हो गया हूं, तो अब क्या मैं...": सनी देओल का चौंकाने वाला खुलासा
सनी देओल ने अपने करियर के उस दौर को याद करते हुए बताया जब फिल्ममेकर्स और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स उनके पास नए जमाने की स्क्रिप्ट्स और वेब सीरीज के प्रस्ताव लेकर आ रहे थे। उस समय उनके दिमाग में अपनी स्थापित छवि और उम्र को लेकर गहरा द्वंद्व चल रहा था।
सनी देओल ने कहा, "जब ओटीटी का दौर तेजी से बढ़ा और लोग मेरे पास कॉन्सेप्ट लेकर आने लगे, तो मैं अंदर से थोड़ा घबराया हुआ था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं इसमें कैसे फिट बैठूंगा। मैंने खुद से और मेकर्स से कहा कि भाई, अब मैं 60 साल का हो चुका हूं, इस उम्र में आकर अब मैं क्या नया और अलग करूंगा? क्या दर्शक मुझे उस छोटे पर्दे और उस तरह के डार्क या एक्सपेरिमेंटल फॉर्मैट में स्वीकार करेंगे?"
अभिनेता का मानना था कि वे पारंपरिक सिनेमाई दौर के कलाकार हैं, जहां शुक्रवार को थिएटर में सीटी बजने और तालियों की गूंज से काम का मूल्यांकन होता था। ऐसे में डिजिटल स्पेस की अलग व्याकरण, एपिसोडिक फॉर्मेट और बिना बॉक्स ऑफिस का माहौल उन्हें थोड़ा अजीब और डरावना लगता था।
क्या थी झिझक की सबसे बड़ी वजह?
सनी देओल की इस हिचकिचाहट के पीछे केवल उम्र का आंकड़ा नहीं था, बल्कि कुछ बुनियादी सिनेमाई कारण भी थे:
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लार्ज-दैन-लाइफ छवि: सनी देओल की पहचान हमेशा से बड़े पर्दे के विशाल हीरो (Larger-than-life) के रूप में रही है। उन्हें डर था कि मोबाइल स्क्रीन और लैपटॉप पर उनके एक्शन और इमोशंस का वह व्यापक असर कहीं खो न जाए।
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कंटेंट का मिजाज: ओटीटी पर अक्सर बनने वाली बहुत ज्यादा डार्क, गाली-गलौज और रियलिस्टिक कहानियों की तुलना में सनी देओल हमेशा संपूर्ण पारिवारिक मनोरंजन और मुख्यधारा की भावनात्मक कहानियों के पक्षधर रहे हैं।
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कमबैक और दर्शकों का प्यार: 'गदर 2' से पहले एक लंबा दौर ऐसा था जब उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रही थीं, जिससे नए प्रयोग करने को लेकर वे अतिरिक्त सतर्क थे।
सोच में आया बदलाव: अब नए माध्यमों को अपनाने के लिए तैयार
हालांकि समय के साथ और दर्शकों के बदलते नजरिए को देखकर सनी देओल की सोच में भी सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने महसूस किया कि ओटीटी केवल सीमाओं को तोड़ने का माध्यम है, जहां एक मंझे हुए अभिनेता को अपनी अभिनय क्षमता के अनछुए पहलुओं को दिखाने का पूरा मौका मिलता है।
सनी देओल ने कहा कि जब उन्होंने देखा कि दुनिया भर में अच्छे और मजबूत किरदारों की उम्र से कोई सीमा तय नहीं होती, बल्कि कहानी में दम होना चाहिए, तब उनका संकोच दूर हुआ। आज के दौर में वे अच्छे विषयों, ऐतिहासिक गाथाओं और मजबूत पटकथाओं के साथ डिजिटल और सिनेमाई दोनों दुनिया में संतुलन बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। बड़े पर्दे पर उनकी आगामी बहुप्रतीक्षित फिल्मों के साथ-साथ फैंस को उम्मीद है कि जब भी यह दिग्गज एक्शन स्टार किसी डिजिटल सीरीज या फिल्म में कदम रखेगा, तो वहां भी उनका वही रौब और दबदबा देखने को मिलेगा।