IUML इतिहास में पहली बार: मुस्लिम लीग ने हिंदू नेता सी. श्याम सुंदर को बनाया प्रदेश उपाध्यक्ष
केरल की राजनीति और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के इतिहास में एक ऐसा अप्रत्याशित और ऐतिहासिक मोड़ आया है जिसने राज्य के सियासी पंडितों को हैरान कर दिया है। आज़ादी के बाद से मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय के अधिकारों और प्रतिनिधित्व की राजनीति करने वाली मुस्लिम लीग ने पहली बार किसी हिंदू नेता को राज्य उपाध्यक्ष जैसे बेहद प्रभावशाली सांगठनिक पद पर नियुक्त किया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सैय्यद सादिक अली शिहाब थंगल द्वारा घोषित नए संगठनात्मक ढांचे में 61 वर्षीय सी. श्याम सुंदर को यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। पारंपरिक रूप से मुस्लिम बहुल प्रतिनिधित्व वाली पार्टी में एक सवर्ण हिंदू नेता का इस मुकाम तक पहुंचना केवल एक पद की नियुक्ति नहीं, बल्कि केरल की गठबंधन राजनीति में एक बड़े वैचारिक और रणनीतिक बदलाव का सीधा संदेश माना जा रहा है।
कौन हैं सी. श्याम सुंदर? वामपंथी छात्र राजनीति से लेकर मुस्लिम लीग के शीर्ष पद तक का सफर
सी. श्याम सुंदर मध्य केरल के अलप्पुझा जिले के हरिपद क्षेत्र के एक बेहद प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक नायर राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। केरल विधानसभा के पहले अध्यक्ष और दिग्गज कम्युनिस्ट नेता रहे आर. शंकरनारायणन थम्बी उनके रिश्ते में मामा (चाचा) थे। राजनीतिक जीवन की शुरुआत में श्याम सुंदर पूरी तरह वामपंथी विचारधारा से जुड़े थे और वे सीपीआई(एम) की युवा शाखा डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) में लंबे समय तक सक्रिय रहे। डीवाईएफआई के प्रदेश कोषाध्यक्ष और राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख पदों पर रहने के बाद वामपंथी दल में अंदरूनी गुटबाजी के चलते उन्होंने 2010 में वामपंथ को अलविदा कह दिया। इसके बाद उन्होंने किसी मुख्यधारा की 'सेक्युलर' पार्टी की बजाय मुस्लिम लीग का दामन थामकर सभी को चौंका दिया था। पिछले 15 वर्षों से वे आईयूएमएल के एक समर्पित व निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहे थे और पार्टी की राज्य सचिवालय इकाई का हिस्सा भी रह चुके हैं।
इडुक्की और पथानामथिट्टा का जिम्मा: मुस्लिम लीग का दक्षिण केरल में जनाधार विस्तार का मिशन
प्रदेश उपाध्यक्ष बनने के साथ ही मुस्लिम लीग आलाकमान ने सी. श्याम सुंदर को इडुक्की और पथानामथिट्टा जिलों का संगठनात्मक प्रभार सौंपा है। राजनीतिक भूगोल के लिहाज से यह फैसला बेहद रणनीतिक है, क्योंकि उत्तरी केरल (विशेषकर मलप्पुरम और कोझिकोड) में मुस्लिम लीग की जड़ें जितनी गहरी हैं, दक्षिणी और मध्य केरल के पहाड़ी व मध्यवर्ती जिलों में उसका प्रभाव उतना ही सीमित रहा है। पथानामथिट्टा और इडुक्की जैसे क्षेत्रों में ईसाई और हिंदू आबादी का बाहुल्य है। ऐसे में एक सम्मानित नायर पृष्ठभूमि वाले हिंदू चेहरे को इन जिलों का प्रभारी बनाकर मुस्लिम लीग यह संदेश देना चाहती है कि वह सिर्फ एक समुदाय विशेष की पार्टी नहीं है, बल्कि वह दक्षिण केरल के गैर-मुस्लिम मतदाताओं और प्रभावशाली सामाजिक वर्गों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने के लिए तैयार है।
'कट्टरपंथी' छवि का मुकाबला और माकपा के हमलों की धार कुंद करने की रणनीति
मुस्लिम लीग द्वारा यह कदम उठाए जाने के पीछे मौजूदा राजनीतिक दबाव और बहुकोणीय चुनौतियां सबसे बड़ी वजह मानी जा रही हैं। केरल की सत्ताधारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) लगातार मुस्लिम लीग पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और रूढ़िवादी धार्मिक संगठनों के आगे झुकने का आरोप लगाती रही है। दूसरी तरफ, मुस्लिम समुदाय के भीतर से भी कुछ कट्टरपंथी व पारंपरिक समूहों का पार्टी पर दबाव बना रहता है। ऐसे दोहरे संकट के बीच सी. श्याम सुंदर को इतना ऊंचा ओहदा देकर मुस्लिम लीग ने खुद को एक समावेशी, सर्व-समावेशी और बहुलतावादी दल के रूप में पेश करने का दांव चला है। इससे पार्टी न केवल वाम मोर्चे के सांप्रदायिक हमलों की धार कुंद करने में सक्षम होगी, बल्कि कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के भीतर भी गैर-मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी स्वीकार्यता को मजबूती से स्थापित कर पाएगी।
'एक व्यक्ति, एक पद' नीति और भविष्य की चुनावी राजनीति पर इसका बड़ा प्रभाव
यह नियुक्ति मुस्लिम लीग में चल रहे एक बड़े आंतरिक प्रशासनिक सुधार का भी परिणाम है, जिसके तहत पार्टी ने 'एक व्यक्ति, एक पद' (One Person, One Post) के सिद्धांत को कड़ाई से लागू किया है। इसके तहत हाल ही में चुने गए विधायकों और जन-प्रतिनिधियों को संगठन के प्रमुख पदों से मुक्त कर संगठन को नए और जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं के हवाले किया गया है। सी. श्याम सुंदर ने अपनी पदोन्नति के बाद स्पष्ट किया कि वे पिछले 15 वर्षों से बिना किसी स्वार्थ के पार्टी से जुड़े रहे हैं और यह पद उनके काम का सम्मान है। इससे पहले भी मुस्लिम लीग ने दलित महिला नेत्री जयन्ती राजन को राष्ट्रीय सहायक सचिव बनाकर संगठन का विस्तार किया था। अब सी. श्याम सुंदर का राज्य उपाध्यक्ष बनना यह साफ संकेत देता है कि मुस्लिम लीग भविष्य के विधानसभा और संसदीय चुनावों में अपनी पुरानी पहचान के दायरे को तोड़कर केरल के संपूर्ण सामाजिक ताने-बाने में गहरी पैठ बनाने की दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है।