IMC में बोले PM मोदी: DBT से बचे 5 लाख करोड़, डीपफेक और साइबर फ्रॉड पर दुनिया को दी दो टूक चेतावनी

IMC में बोले PM मोदी: DBT से बचे 5 लाख करोड़, डीपफेक और साइबर फ्रॉड पर दुनिया को दी दो टूक चेतावनी

नई दिल्ली में आयोजित 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस' (IMC) के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की डिजिटल शासन व्यवस्था और कल्याणकारी योजनाओं की सफलता का ऐतिहासिक रिपोर्ट कार्ड पेश किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के जरिए केंद्र सरकार ने अब तक लगभग 50 लाख करोड़ रुपये सीधे जरूरतमंद लाभार्थियों के बैंक खातों में बिना किसी बिचौलिए के ट्रांसफर किए हैं। इस पारदर्शी तकनीक का सबसे बड़ा असर यह हुआ कि सरकारी खजाने के करीब 5 लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने से बच गए। पीएम मोदी ने पुरानी व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यदि पहले की लचर व्यवस्था कायम रहती, तो यह 5 लाख करोड़ रुपये बिचौलियों और भ्रष्टाचारियों की जेबों में चले जाते। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिनकी काली कमाई और अवैध जरिया बंद हो गया है, वे मोदी से नाराजगी जाहिर करेंगे ही, लेकिन वे गलत तौर-तरीकों को पूरी तरह खत्म करने के लिए संकल्पबद्ध हैं।

किसान सम्मान निधि से 5G विस्तार तक: तकनीक से दूर हुई डिजिटल खाई

प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि आधुनिक तकनीक केवल बड़े शहरों या अमीर तबके तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने समाज के अंतिम छोर पर खड़े नागरिक के जीवन को सुगम बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे अन्नदाताओं के खातों में भेजी गई, जिसमें वे किसान भी शामिल हैं जिन्हें आजादी के दशकों बाद तक किसी सरकारी योजना का सीधा लाभ नहीं मिला था। उन्होंने बताया कि डिजिटल इंडिया अभियान के तहत देश के हर जिले तक 5G कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है, जिसने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और आम जनसेवाओं की गति को कई गुना बढ़ा दिया है। डिजिटल डिवाइड (डिजिटल खाई) को पाटने में भारत का यह मॉडल आज पूरी दुनिया के विकासशील और विकसित देशों के लिए अध्ययन का विषय बन चुका है।

'डीपफेक' बना सबसे बड़ा वैश्विक सिरदर्द: साइबर अपराध पर पीएम की दो टूक

प्रौद्योगिकी की शक्ति की सराहना करने के साथ ही प्रधानमंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दुरुपयोग और साइबर अपराधों के बढ़ते दायरे पर गंभीर चिंता व्यक्त की। पीएम मोदी ने 'डीपफेक' को मानवता और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती करार दिया। उन्होंने सचेत किया कि तकनीक तभी प्रभावी और टिकाऊ हो सकती है, जब उस पर आम नागरिक का अटूट विश्वास हो। आज तकनीक की आड़ में सीमा पार से अपराध का नया ढांचा खड़ा हो चुका है, जहां एक देश में बैठा अपराधी दूसरे देश के नागरिक की मदद से किसी तीसरे मुल्क में वित्तीय धोखाधड़ी या भ्रामक सूचनाएं फैलाने का षड्यंत्र रचता है। डीपफेक के माध्यम से पहचान चुराना, फर्जी ऑडियो-वीडियो बनाकर जनभावनाएं भड़काना और लोगों की जमा-पूंजी लूटना एक संगठित अंतरराष्ट्रीय उद्योग का रूप ले रहा है, जिसे नजरअंदाज करना आत्मघाती होगा।

डिजिटल धोखाधड़ी रोकने के लिए वैश्विक तंत्र की मांग: दुनिया के साथ अनुभव साझा करेगा भारत

प्रधानमंत्री ने जीएसएमए (GSMA), दुनियाभर के दूरसंचार परिचालकों (टेलीकॉम ऑपरेटर्स), टेक कंपनियों, वित्तीय संस्थाओं और वैश्विक सरकारों से एक संयुक्त वैश्विक फ्रेमवर्क बनाने की पुरजोर अपील की। उन्होंने कहा कि साइबर फ्रॉड को उस स्तर पर ही रोक दिया जाना चाहिए, जहां से वह नागरिकों के मोबाइल स्क्रीन तक पहुंचने की कोशिश करता है। भारत ने डिजिटल भुगतान सुरक्षा, डेटा प्रोटेक्शन और फ्रॉड डिटेक्शन के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर व्यापक अनुभव हासिल किया है, और देश इस दिशा में अपने तकनीकी मॉडल व सीख को पूरी दुनिया के साथ साझा करने के लिए तैयार है। उन्होंने साफ किया कि डिजिटल दुनिया में नागरिकों की सुरक्षा, डेटा की संप्रभुता और विश्वास की बहाली किसी एक देश की सीमा तक सीमित रहकर हासिल नहीं की जा सकती, बल्कि इसके लिए पूरे विश्व को एकजुट होकर कड़े मानक और नियम लागू करने होंगे।