ITBP चीफ बोले- हमारे 'शौर्य कमांडो' तैयार, LAC पर ड्रैगन को मिलेगा करारा जवाब

ITBP चीफ बोले- हमारे 'शौर्य कमांडो' तैयार, LAC पर ड्रैगन को मिलेगा करारा जवाब

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील खबर सामने आई है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने खुलासा किया है कि अरुणाचल प्रदेश के अग्रिम सीमावर्ती क्षेत्रों में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ विभिन्न बिंदुओं पर गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। इस सामरिक चुनौती का डटकर मुकाबला करने के लिए आईटीबीपी ने 'शौर्य कमांडो' नाम से एक बेहद घातक और विशेष स्ट्राइक यूनिट तैयार की है। महानिदेशक ने स्पष्ट किया कि इन शौर्य कमांडो ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ हालिया गतिरोध और आमने-सामने की स्थितियों के दौरान अपनी अद्वितीय लड़ाकू क्षमताओं और साहस का लोहा मनवाया है। चीन के साथ लगती 3,488 किलोमीटर लंबी दुर्गम सीमा की रक्षा को अभेद्य बनाने के उद्देश्य से अब आईटीबीपी की प्रत्येक बॉर्डर बटालियन में इन विशेष प्रशिक्षित कमांडो की नियमित तैनाती की जा रही है, जिससे किसी भी आकस्मिक घुसपैठ का फौरन मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।

अलवर में 65वें स्थापना दिवस से पहले गरजे आईटीबीपी चीफ: पारंपरिक तरीकों से नहीं, नई तकनीक से हारेगा चीन

राजस्थान के अलवर स्थित आईटीबीपी प्रशिक्षण केंद्र में जवानों को संबोधित करते हुए महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने आधुनिक युद्धक्षेत्र की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। बल के 65वें स्थापना दिवस (24 अक्टूबर) की पूर्व संध्या पर उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि भारत के सबसे बड़े सामरिक प्रतिद्वंद्वी चीन से निपटने के लिए अब केवल पारंपरिक सीमा सुरक्षा और पेट्रोलिंग के पुराने तरीके पर्याप्त नहीं हैं। हिमालय के अति-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम और भूगोल की विषमताओं के बीच दुश्मन के मंसूबों को नाकाम करने के लिए अब उच्च तकनीक, रियल-टाइम सर्विलांस और अचूक स्ट्राइक क्षमता की दरकार है। इसी विजन के तहत आईटीबीपी ने अपनी संगठनात्मक संरचना में बड़े बदलाव किए हैं और हर स्तर पर तकनीकी कौशल को अनिवार्य कर दिया है ताकि दुर्गम बर्फीली चोटियों पर चीनी सैनिकों के किसी भी दुस्साहस को पलक झपकते ही बेअसर किया जा सके।

ड्रोन वॉरफेयर पर 4,000 करोड़ का मेगा प्लान: गलवान जैसी झड़पों से निपटने के लिए नया स्ट्राइक कोर्स

आधुनिक युद्धकला में मानवरहित विमानों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए आईटीबीपी ने अपनी हर सीमा-रक्षक बटालियन में विशेष 'ड्रोन प्लाटून' का गठन किया है। आईटीबीपी प्रमुख ने जानकारी दी कि बल को केंद्र सरकार से 400 करोड़ रुपये का प्रारंभिक विशेष फंड प्राप्त हुआ है, जिसका 70 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर ड्रोन युद्धक क्षमताओं और तकनीकी अपग्रेडेशन पर खर्च किया जा रहा है। इसके साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बल के आधुनिकीकरण के लिए 4,000 करोड़ रुपये की व्यापक परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है, जिसमें से 1,000 करोड़ रुपये का बड़ा बजट अत्याधुनिक ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम्स की खरीद के लिए सुरक्षित रखा गया है। जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक आमने-सामने की खूनी झड़प, जिसमें 20 भारतीय शूरवीरों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था, से सबक लेते हुए बल ने एक नया 'स्ट्राइक कोर्स' तैयार किया है। इस कोर्स के माध्यम से जवानों को बिना हथियारों के घातक कॉम्बैट और क्लोज-क्वार्टर बैटल की गहन ट्रेनिंग दी जा रही है। डीजी कपूर ने पुष्टि की कि साल 2027 के अंत तक पूरी फोर्स को इस विशिष्ट स्ट्राइक ट्रेनिंग से लैस कर दिया जाएगा।

अंडरग्राउंड बंकर और सोलर इंफ्रास्ट्रक्चर: माइनस 40 डिग्री तापमान में भी तैनात रहेंगे लड़ाके

सैनिकों की सुरक्षा और अग्रिम चौकियों को किसी भी संभावित हवाई या आर्टिलरी हमले से सुरक्षित रखने के लिए सीमा पर बुनियादी ढांचे का स्वरूप पूरी तरह बदला जा रहा है। आईटीबीपी प्रमुख ने बताया कि संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में सतह के ऊपर बनी पारंपरिक संरचनाओं के बजाय अब अत्याधुनिक 'अंडरग्राउंड शेल्टर' (भूमिगत बंकर) बनाए जा रहे हैं, ताकि किसी भी प्रत्यक्ष टकराव की स्थिति में सैनिकों के जानमाल के जोखिम को न्यूनतम किया जा सके। इसके अलावा लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित चौकियों पर जवानों के जीवन को सुगम बनाने के लिए बैरकों को थर्मल इंसुलेटेड बनाया जा रहा है, चौबीसों घंटे बिजली के लिए भारी क्षमता वाले सोलर वॉटर हीटर और आधुनिक जनरेटर सेट स्थापित किए जा रहे हैं। शून्य से 40 डिग्री नीचे के तापमान में सैन्य वाहनों को जाम होने से बचाने के लिए विशेष 'कोल्ड-स्टार्ट किट' उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे आपात स्थिति में सैन्य वाहनों की त्वरित रवानगी सुनिश्चित हो सके।

विपक्ष का केंद्र सरकार पर तीखा हमला: जयराम रमेश ने उठाया पेट्रोलिंग प्वाइंट्स और 60 हजार मेगावाट बांध का मुद्दा

आईटीबीपी प्रमुख के इस बयान के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में सीमा सुरक्षा को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए केंद्र सरकार की चीन नीति पर कड़े सवाल दागे हैं। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के साथ चल रहे गतिरोध पर आईटीबीपी के जवानों और शौर्य कमांडो की वीरता की जमकर सराहना की, लेकिन साथ ही उन्होंने सीमा पर बने हालात को लेकर सरकार की कथित खामोशी की आलोचना की। जयराम रमेश ने दावा किया कि स्थानीय लोगों और इनपुट्स के अनुसार, लद्दाख की तरह ही अरुणाचल प्रदेश में भी भारतीय सेना की पहुंच कुछ पारंपरिक पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक सीमित हो गई है। कांग्रेस नेता ने ड्रैगन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के गांवों और कस्बों के नाम बदलने की एकतरफा हरकतों और सीमा के ठीक पार तिब्बत में 60,000 मेगावाट क्षमता वाले विशालकाय बांध के निर्माण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह परियोजना भारत की पर्यावरण और जल सुरक्षा के लिए एक गंभीर रणनीतिक खतरा बन रही है, जिस पर सरकार को संसद और जनता के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए।