अमित शाह के दौरे से ठीक पहले बड़ा सियासी मोड़: संघर्ष कमेटी और परविंदर झोटा के पिता के रास्ते अलग

अमित शाह के दौरे से ठीक पहले बड़ा सियासी मोड़: संघर्ष कमेटी और परविंदर झोटा के पिता के रास्ते अलग

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे को लेकर जहां एक तरफ राज्यभर में राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर हैं, वहीं दूसरी ओर मालवा बेल्ट के मानसा जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पंजाब में नशे के खिलाफ मुखर आवाज उठाने वाले चर्चित कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के मामले में अब तक कंधे से कंधा मिलाकर चल रही संयुक्त संघर्ष कमेटी और परविंदर के परिवार के बीच अचानक गहरी दरार पैदा हो गई है। महीनों तक एक ही मंच से प्रशासन और सरकार के खिलाफ हुंकार भरने वाले दोनों पक्षों के बीच मतभेद इतने गहरे हो चुके हैं कि अब रास्ते पूरी तरह जुदा नजर आ रहे हैं। इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब परविंदर झोटा के पिता ने संघर्ष कमेटी के फैसलों और कार्यशैली से खुद को पूरी तरह अलग करते हुए यह सार्वजनिक ऐलान कर दिया कि उनका परिवार केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का न केवल सीधे तौर पर स्वागत करेगा, बल्कि उनके समक्ष अपनी मांगें और पक्ष भी स्वतंत्र रूप से रखेगा। इस अप्रत्याशित कदम ने स्थानीय प्रशासन से लेकर सूबे के सियासी गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है।

आखिर क्यों आई संघर्ष कमेटी और झोटा के पिता के बीच कड़वाहट और दूरियां

परविंदर सिंह झोटा की रिहाई और उन पर दर्ज मुकदमों को रद्द कराने के लिए मानसा में विभिन्न जनसंगठनों, किसान जत्थेबंदियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को मिलाकर एक संयुक्त संघर्ष कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी ने लंबे समय तक धरने-प्रदर्शनों, रैलियों और प्रशासनिक घेराव के जरिए मामले को राज्य स्तर पर गरमाए रखा। हालांकि, अंदरूनी सूत्रों और पारिवारिक बयानों के मुताबिक पिछले कुछ समय से कमेटी के कुछ पदाधिकारियों और परिवार के बीच रणनीति को लेकर गंभीर असहमति उभरने लगी थी। परविंदर झोटा के पिता का मानना है कि संघर्ष कमेटी के कुछ लोग इस मुद्दे का इस्तेमाल अपनी निजी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और सियासी रोटियां सेकने के लिए कर रहे थे, जिससे उनके बेटे के कानूनी मामले और रिहाई की मुख्य लड़ाई कमजोर पड़ रही थी। परिवार का आरोप है कि आंदोलन के नाम पर लिए जाने वाले कई महत्वपूर्ण फैसलों में उन्हें भरोसे में नहीं लिया जा रहा था। जब केंद्रीय गृहमंत्री के दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शन या ज्ञापन सौंपने की रणनीति पर चर्चा हुई, तो मतभेद खुलकर सतह पर आ गए और आखिरकार पिता ने कमेटी के नेतृत्व वाली रणनीति से किनारा करना ही बेहतर समझा।

परिवार खुद करेगा गृहमंत्री का इस्तकबाल: मंच से सीधे संवाद साधने की नई रणनीति

संघर्ष कमेटी से नाता तोड़ने के तुरंत बाद परविंदर झोटा के पिता और उनके नजदीकी पारिवारिक सदस्यों ने एक बैठक कर अपनी आगामी रणनीति को स्पष्ट कर दिया है। परिवार का कहना है कि वे किसी टकराव, उग्र विरोध या राजनीतिक हंगामे का हिस्सा बनने के बजाय देश के गृहमंत्री से सीधे मिलकर अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने साफ किया कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जब इस क्षेत्र में पहुंचेंगे, तो परिवार पारंपरिक और सम्मानजनक तरीके से उनका खुद स्वागत करेगा। इस मुलाकात के दौरान परिवार की ओर से अमित शाह को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा जाएगा, जिसमें पंजाब में नशा तस्करी के खिलाफ आवाज उठाने के चलते परविंदर झोटा पर दर्ज मुकदमों, पुलिसिया कार्रवाई की निष्पक्ष केंद्रीय जांच और उनके साथ हुए कथित अन्याय की पूरी दास्तान दर्ज होगी। परिवार का तर्क है कि देश के गृहमंत्री के पास आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का सर्वोच्च अधिकार है, ऐसे में टकराव के बजाय उनसे सीधे मिलकर इंसाफ की गुहार लगाना ज्यादा व्यावहारिक और असरदार रास्ता है।

संघर्ष कमेटी के रुख पर असमंजस और स्थानीय स्तर पर बढ़ता दबाव

परविंदर झोटा के परिवार द्वारा अचानक उठाए गए इस स्वतंत्र कदम से संघर्ष कमेटी के खेमे में भारी खलबली मच गई है। कमेटी के वरिष्ठ नेता अब तक इस आंदोलन को एक बड़े जन-आंदोलन के रूप में पेश करते हुए सरकार और प्रशासन पर दबाव बना रहे थे। लेकिन जिस शख्स के नाम पर पूरा संघर्ष खड़ा किया गया, उसी के परिवार द्वारा आंदोलन की कमान से खुद को अलग कर लेने के बाद कमेटी के रणनीतिकारों के सामने बड़ा धर्मसंकट खड़ा हो गया है। स्थानीय नेताओं के बीच अब इस बात पर मंथन चल रहा है कि क्या अमित शाह के दौरे के दौरान पूर्व निर्धारित विरोध कार्यक्रम को जारी रखा जाए या फिर रणनीति में कोई बड़ा बदलाव किया जाए। यदि संघर्ष कमेटी परिवार के फैसले के विपरीत जाकर कड़ा विरोध दर्ज कराती है, तो उस पर मुद्दे का राजनीतिकरण करने के आरोप और गहरे हो सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ, यदि कमेटी पीछे हटती है, तो उसकी अब तक की साख और आंदोलन की धार कुंद पड़ने का खतरा बना हुआ है।

अमित शाह के आगमन से पहले सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर

इस बड़े और अचानक बदले घटनाक्रम के बाद जिला प्रशासन और खुफिया सुरक्षा एजेंसियों के कान पूरी तरह खड़े हो गए हैं। केंद्रीय गृहमंत्री का दौरा बेहद संवेदनशील सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत आयोजित होता है। एक तरफ जहां संघर्ष कमेटी के कुछ धड़ों द्वारा विरोध या काले झंडे दिखाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, वहीं दूसरी तरफ झोटा के परिवार द्वारा सार्वजनिक स्वागत और ज्ञापन सौंपने की योजना को देखते हुए पुलिस-प्रशासन बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। मानसा और आसपास के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं, नाकाबंदी बढ़ा दी गई है और दोनों गुटों की हर हलचल पर पैनी नजर रखी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि परविंदर झोटा के पिता की केंद्रीय नेतृत्व या गृहमंत्री से सीधे बातचीत सफल रहती है, तो यह पंजाब में नशा विरोधी अभियानों और स्थानीय राजनीति के समीकरणों को एक नया मोड़ दे सकती है।