भड़की हिंसा पर बोले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, बाहरी लोगों के दिल में नफरत का लगाया आरोप
फ्रांस की राजधानी पेरिस सहित कई प्रमुख शहरों में जीवन-यापन की लागत, महंगाई और सरकारी सेवाओं में बदहाली को लेकर शुरू हुए जन-आक्रोश ने जब आगजनी, लूटपाट और हिंसक टकराव का रूप ले लिया, तो इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर से भी तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। पेरिस की सड़कों पर टूटे शीशों, जलाई गई गाड़ियों और 143 साल पुराने ऐतिहासिक लिमोज सिटी हॉल में लगाई गई आग के मंजर पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद आक्रामक अंदाज में टिप्पणी की है। ट्रंप ने फ्रांस की इस सुलगती स्थिति के लिए सीधे तौर पर इमिग्रेशन (बाहरी प्रवासियों के आगमन) को जिम्मेदार ठहराते हुए फ्रांसीसी सरकार को अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमाएं तुरंत बंद करने की चेतावनी दे डाली है।
'ट्रुथ सोशल' पर ट्रंप की दो टूक: 'दिलों में नफरत भरे लोगों ने देश को तोड़ दिया'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक कड़ा बयान साझा करते हुए लिखा, "फ्रांस जल रहा है! एक बिल्कुल अलग दुनिया से आए लोगों के अप्रवासन—ऐसे लोग जिनके दिलों में नफरत भरी है—ने उस कभी महान रहे देश को तबाह कर दिया है। इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, अपने बॉर्डर बंद करो और देश पर नियंत्रण अपने हाथ में लो!" ट्रंप ने अपने पुराने बयानों को दोहराते हुए तंज कसा कि फ्रांस क्रांतियों के लिए जाना जाता है और अब वहां के हालात पूरी तरह बेकाबू हो चुके हैं। उन्होंने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए चेताया कि यदि सख्त कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और विकराल हो जाएगी।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी साधी लिबरल नीतियों पर निशाना
डोनाल्ड ट्रंप के साथ-साथ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी फ्रांस के घटनाक्रम को लेकर पश्चिमी देशों की उदारवादी नीतियों पर तीखा प्रहार किया। वेंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि पश्चिमी लिबरल सरकारों ने दयालुता और विविधता (डाइवर्सिटी) के नाम पर तीसरी दुनिया के लोगों को बिना सोचे-समझे अपने देशों में बसाया, लेकिन उनके समाज में घुलने-मिलने और सांस्कृतिक अनुकूलता के बुनियादी सवालों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। वेंस ने कहा कि लिमोज के ऐतिहासिक सिटी हॉल का जलना एक दुखद चेतावनी है और वे प्रार्थना करते हैं कि फ्रांस अपनी बाकी ऐतिहासिक धरोहरों को जलने से बचाने के लिए इस पागलपन को रोके। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी जनता को आगाह किया कि डेमोक्रेट्स अमेरिका को भी इसी रास्ते पर ले जाना चाहते हैं।
महंगाई के खिलाफ 5 लाख से अधिक लोग सड़कों पर, सैकड़ों गिरफ्तार
फ्रांस के गृह मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन में 5.5 लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतरे थे, जबकि ट्रेड यूनियनों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों की संख्या 8 लाख के पार थी। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से बढ़ती खाद्य और ऊर्जा कीमतों, गिरती मजदूरी और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांगों को लेकर आयोजित किए गए थे। हालांकि कई शहरों में असामाजिक तत्वों, उपद्रवियों और हिंसक गिरोहों ने भीड़ की आड़ में दुकानों में लूटपाट की और पुलिस पर पेट्रोल बम फेंके। फ्रांसीसी सुरक्षा बलों ने हिंसक घटनाओं के बाद पूरे देश से सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। फिलहाल फ्रांस सरकार ने दंगाइयों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने और उपद्रवियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।