चंडीगढ़ में निगम चुनाव से पहले मची उद्घाटन की होड़: जनता की गाढ़ी कमाई पर राजनीतिक क्रेडिट लेने का खेल...

चंडीगढ़ में निगम चुनाव से पहले मची उद्घाटन की होड़: जनता की गाढ़ी कमाई पर राजनीतिक क्रेडिट लेने का खेल...

सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ में आगामी नगर निगम चुनावों की सुगबुगाहट तेज होते ही शहर की राजनीतिक फिजा में अचानक 'उद्घाटन उत्सव' का दौर शुरू हो गया है। विभिन्न वार्डों में महीनों से अटके पड़े या हाल ही में पूरे हुए विकास कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास की मानो झड़ी लग गई है। सड़क, पार्क, सामुदायिक भवन और स्ट्रीट लाइट जैसी नागरिक सुविधाओं के उद्घाटन कार्यक्रमों में पार्षदों और भावी प्रत्याशियों द्वारा जिस तरह का शक्ति प्रदर्शन किया जा रहा है, उसने जनता और स्थानीय संगठनों के कान खड़े कर दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा एतराज जताते हुए प्रतिष्ठित नागरिक संस्था सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन (SIA) ने चुनाव से ठीक पहले सार्वजनिक धन के राजनीतिक दुरुपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। एसोसिएशन का साफ आरोप है कि जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स के पैसे से बनने वाली परियोजनाओं को राजनीतिक दलों और उनके नेताओं द्वारा अपनी 'निजी जागीर' या 'पारिवारिक उपलब्धि' के तौर पर पेश किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर चुनावी आचार संहिता की भावना और प्रशासनिक शुचिता का खुला उल्लंघन है।

सरकारी खजाने पर निजी चमक-दमक: SIA ने उठाई सख्त गाइडलाइंस की मांग

सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन (SIA) के प्रतिनिधियों ने प्रशासन को पत्र भेजकर मांग की है कि चुनाव से ठीक पहले होने वाले इन राजनीतिक उद्घाटन समारोहों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। एसोसिएशन का कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि या पार्षद को अपने कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों और उपलब्धियों का ब्यौरा जनता के बीच रखने का पूरा लोकतांत्रिक हक है। लेकिन जब सरकारी खजाने, नगर निगम के फंड या टैक्सपेयर्स के पैसों से तैयार बुनियादी ढांचे के उद्घाटन पट्टिकाओं (Plaques) पर नेताओं के बड़े-बड़े नाम चस्पा कर उन्हें निजी लाभ के लिए प्रचारित किया जाता है, तो यह जनता के साथ धोखा है। SIA ने रेखांकित किया कि सरकारी धन से होने वाले किसी भी प्रोजेक्ट का उद्घाटन केवल सक्षम प्रशासनिक प्राधिकारी (Competent Authority) की औपचारिक अनुमति और तय कानूनी नियमों के तहत ही होना चाहिए, न कि किसी पार्टी विशेष के चुनावी एजेंडे को हवा देने के लिए।

जनता का पैसा, नेताओं का प्रचार: सवालों के घेरे में 'क्रेडिट वार'

चंडीगढ़ के लगभग हर वार्ड में इस समय विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच क्रेडिट लेने की होड़ मची हुई है। वर्षों से बदहाल पड़ी गलियों, पार्कों की बाउंड्री वॉल या ट्यूबवेल का काम जैसे ही पूरा होता है, तुरंत वहां पार्टी झंडों और समर्थकों की मौजूदगी में फीता काटने की तैयारी हो जाती है। स्थानीय नागरिकों का भी मानना है कि जब तक चुनाव दूर रहते हैं, तब तक अधिकारी और जनप्रतिनिधि फाइलों को दबाए बैठे रहते हैं, लेकिन जैसे ही मतदान का समय नजदीक आता है, ताबड़तोड़ काम दिखाकर वोटरों को लुभाने की कोशिशें तेज हो जाती हैं। एसोसिएशन ने चेताया है कि यदि चुनाव से पूर्व ऐसे प्रचार कार्यक्रमों पर समय रहते लगाम नहीं कसी गई, तो इससे चुनावी मैदान में सभी प्रत्याशियों के लिए बराबरी का मौका (Level Playing Field) खत्म हो जाएगा और प्रशासनिक मशीनरी की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े होंगे।

निष्पक्ष चुनाव और जवाबदेही के लिए सख्त कदम उठाने की अपील

एसोसिएशन ने राज्य चुनाव आयोग और चंडीगढ़ प्रशासन के आला अधिकारियों से अपील की है कि वे नगर निगम चुनाव की अधिसूचना से पहले ही सार्वजनिक परियोजनाओं के राजनीतिक इस्तेमाल को रोकने के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी आचार-नियमावली लागू करें। शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों का कहना है कि दलबदल और अंतिम पलों में होने वाली इस तरह की 'सस्ती पब्लिसिटी' से शहर की लोकतांत्रिक गरिमा गिरती है। जब तक जनता के पैसे की पाई-पाई का हिसाब और विकास कार्यों का वास्तविक श्रेय शहर के जागरूक नागरिकों को नहीं मिलेगा, तब तक जमीनी स्तर पर असली विकास संभव नहीं हो सकता। अब देखना यह होगा कि नागरिक मंचों की इस तीखी आपत्ति के बाद नगर निगम और स्थानीय प्रशासन इन बेतहाशा उद्घाटनों पर कोई सख्त पाबंदी लगाता है या फिर यह 'क्रेडिट वार' मतदान के दिन तक यूं ही जारी रहेगा।