अमित शाह के पंजाब दौरे से पहले अरविंद केजरीवाल का तीखा वार: बोले- अपने राज्यों में कानून-व्यवस्था संभलती नहीं
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे से ठीक पहले सूबे का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक बेहद तीखा और आक्रामक पोस्ट साझा करते हुए भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अमित शाह द्वारा पंजाब में नशे के कारोबार, नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड और कानून-व्यवस्था को लेकर भगवंत मान सरकार को घेरे जाने की तैयारियों के बीच केजरीवाल ने दौरे से 24 घंटे पहले ही काउंटर अटैक कर दिया है। केजरीवाल ने दो टूक शब्दों में कहा कि जिन लोगों से अपने राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था नहीं संभलती, वे अब पंजाब आकर कानून-व्यवस्था पर उपदेश देने की तैयारी कर रहे हैं। इस बयान ने राज्य में आप और भाजपा के बीच चल रही राजनीतिक जंग को और ज्यादा आक्रामक बना दिया है।
गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम लेकर भाजपा पर साधा तीखा निशाना
अरविंद केजरीवाल ने अपने आधिकारिक बयान में कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के आपराधिक नेटवर्क का सीधा हवाला देते हुए केंद्र और भाजपा शासित राज्यों की कार्यप्रणाली पर कड़े आरोप लगाए। केजरीवाल ने बेहद तल्ख लहजे में लिखा कि भाजपा शासित राज्यों में कानून का इकबाल पूरी तरह खत्म हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के सबसे बड़े गैंगस्टर को दामाद बनाकर रखा गया है और उसे भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में अपना आपराधिक नेटवर्क चलाने की खुली छूट और सारी सहूलियतें दी जा रही हैं। केजरीवाल ने जनता को आगाह करते हुए कहा कि ऐसे लोग अब पंजाब आकर ज्ञान बांटेंगे, लेकिन पंजाब के लोग भली-भांति जानते हैं कि भाजपा को वोट देने का मतलब सीधे तौर पर गैंगस्टरों को सूबे में न्योता देने जैसा साबित होगा। गुजरात की साबरमती जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई के कथित संपर्कों और गतिविधियों को लेकर केजरीवाल का यह बयान सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की सुरक्षा नीतियों पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है।
नशा, अदाणी पोर्ट और पुराने गठबंधन पर पहले भी साधा था निशाना
यह पहला मौका नहीं है जब अमित शाह के इस दौरे को लेकर केजरीवाल ने तीखे तेवर दिखाए हों। इससे पहले भी केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा मान सरकार पर नशे के मुद्दे को लेकर किए गए पोस्ट पर पलटवार करते हुए केजरीवाल ने भाजपा के पिछले 10 साल के अकाली-भाजपा गठबंधन के दौर की याद दिलाई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि 2007 से 2017 के बीच पंजाब को 'चिट्टे' की दलदल में धकेलने वाले लोग अब फिर से उसी धंधे के जरिए अपनी जमीन तलाश रहे हैं। आप प्रमुख ने देश के पश्चिमी तटों पर अदाणी पोर्ट के जरिए भारी मात्रा में पकड़े जा रहे ड्रग्स का जिक्र करते हुए पूछा था कि देश की सीमाओं और बंदरगाहों की सुरक्षा करने वाली केंद्रीय एजेंसियां नशे की इस विशाल खेप को रोकने में नाकाम क्यों साबित हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आज देश में सबसे ज्यादा नशा उन राज्यों में बिक रहा है जहां लंबे समय से भाजपा की सरकारें चल रही हैं, लेकिन अपनी कमियों को छिपाने के लिए पंजाब को बदनाम किया जा रहा है।
मानसा में परविंदर झोटा हत्याकांड और अमित शाह की रणनीति
अमित शाह के पंजाब दौरे के केंद्र में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का संवेदनशील मुद्दा मुख्य रूप से शामिल है। शाह मानसा पहुंचकर झोटा के परिजनों से मुलाकात करने वाले हैं, जहां परिवार ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर नशा तस्करों को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री इस दौरे के जरिए पंजाब में नशे, गैंगस्टर संस्कृति और गिरती कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार पर सीधे सवाल उठाने और केंद्र की जीरो-टॉलरेंस नीति को सामने रखने की तैयारी में हैं। भाजपा का आरोप है कि पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण से बाहर हो चुकी है और आम आदमी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है। ऐसे में शाह के दौरे से पहले ही अरविंद केजरीवाल ने लॉरेंस बिश्नोई और दूसरे राज्यों की अपराध दर का मुद्दा उछालकर इस पूरे विमर्श को भाजपा बनाम आप के सीधे टकराव में तब्दील कर दिया है।
2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पंजाब में आर-पार की जंग
पंजाब की राजनीति पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि यह बयानबाजी केवल किसी दौरे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 2027 के आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव की तय हो रही राजनीतिक बिसात है। भाजपा जहां खुद को पंजाब में एक मजबूत, कानून-व्यवस्था के प्रति सख्त और नशामुक्त विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है, वहीं आम आदमी पार्टी यह संदेश देने में जुटी है कि केंद्र खुद अपराधियों को रोकने में विफल रहा है और पंजाब के अधिकारों, पानी, और यूनिवर्सिटी जैसे संसाधनों पर कब्जा करना चाहता है। शाह के मानसा आगमन और केजरीवाल के इस जोरदार हमले के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्रीय गृह मंत्री पंजाब की धरती पर कदम रखते ही 'आप' संयोजक के इस तीखे बयान का क्या और किस अंदाज में जवाब देते हैं।