चंडीगढ़ में चुनाव आयोग और SIR के खिलाफ कांग्रेस का हल्लाबोल, DC दफ्तर घेरने जा रहे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका

चंडीगढ़ में चुनाव आयोग और SIR के खिलाफ कांग्रेस का हल्लाबोल, DC दफ्तर घेरने जा रहे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका

केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने मोर्चा खोलते हुए जोरदार रोष प्रदर्शन किया। चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष एच.एस. लक्की और वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में सैकड़ों की तादाद में पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारी हाथों में तिरंगा, पार्टी के झंडे और निर्वाचन आयोग विरोधी तख्तियां थामे केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए उपायुक्त (DC) कार्यालय का घेराव करने आगे बढ़ रहे थे। हालांकि, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने कार्यालय से कुछ दूरी पहले ही भारी बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया, जिसके बाद पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की देखने को मिली।

प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने पहले से ही व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हुए थे। जैसे ही कांग्रेस नेताओं ने बैरिकेड्स लांघकर डीसी ऑफिस की ओर बढ़ने का प्रयास किया, पुलिस बल ने घेराबंदी मजबूत कर दी। कई कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और अंततः प्रमुख नेताओं सहित कई कार्यकर्ताओं को एहतियातन हिरासत में लेकर नजदीकी थाने ले जाया गया। कांग्रेस का आरोप है कि निर्वाचन आयोग अपनी संवैधानिक निष्पक्षता खो चुका है और सत्तारूढ़ दल के इशारे पर मतदाता सूचियों में हेरफेर किया जा रहा है।

SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में गड़बड़ियों पर गंभीर सवाल

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एच.एस. लक्की ने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के नाम पर बड़े पैमाने पर वास्तविक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काटे जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब निर्वाचन आयोग के भीतर ही फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज हो रही हैं, तो पूरे देश के नागरिकों को इस पर स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत निष्पक्ष चुनाव और हर नागरिक का मताधिकार है, लेकिन वर्तमान में जिस तरह से मतदाता सूचियों में संशोधन किए जा रहे हैं, उससे चुनावी पारदर्शिता पर गहरा संकट खड़ा हो गया है।

कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उन्हें तत्काल पद से हटाने की मांग उठाई। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकारें आती-जाती रहती हैं और चुनाव में जीत-हार लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता पर आंच नहीं आनी चाहिए। यदि जनता का भरोसा ही चुनावी व्यवस्था से उठ जाएगा, तो लोकतांत्रिक ढांचे की नींव कमजोर हो जाएगी।

कांग्रेस की मुख्य मांगें: हटाए गए नामों का डेटा सार्वजनिक करे आयोग

कांग्रेस नेतृत्व ने केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग के सामने कई अहम मांगें रखीं। पार्टी ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया के तहत जिन भी मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, उनका निर्वाचन क्षेत्रवार और राज्यवार पूरा ब्योरा बिना किसी देरी के सार्वजनिक किया जाए। इसके अलावा, नाम हटाने के क्या मानदंड तय किए गए थे और प्रभावित लोगों को नोटिस जारी किए गए या नहीं, इस पूरी प्रक्रिया का आधिकारिक ऑडिट जनता के सामने रखा जाना चाहिए।

पार्टी ने यह भी मांग की कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम दुर्भावनापूर्ण तरीके से या प्रशासनिक लापरवाही के चलते हटाए गए हैं, उन्हें बहाल करने के लिए एक सरल और त्वरित सिंगल-विंडो सिस्टम शुरू किया जाए। इसके साथ ही, चुनावी सॉफ्टवेयर और डिजिटल वोटर डेटा की सुरक्षा को लेकर सभी राजनीतिक दलों के साथ तकनीकी जानकारी साझा की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की डिजिटल धांधली की आशंका समाप्त हो सके।

लोकतंत्र बचाने के लिए जमीन से संसद तक संघर्ष का ऐलान

प्रदर्शन के बाद रिहा हुए नेताओं ने ऐलान किया कि यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि देश के संविधान और आम नागरिक के वोट के अधिकार की रक्षा की है। चंडीगढ़ कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि जब तक चुनाव आयोग अपनी कार्यप्रणाली में पूरी पारदर्शिता नहीं लाता और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लगे आरोपों का स्वतंत्र रूप से निपटारा नहीं होता, तब तक उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं। आने वाले दिनों में पार्टी इस मुद्दे को लेकर वार्ड और बूथ स्तर तक जन-जागरूकता अभियान चलाने और बड़े पैमाने पर हस्ताक्षर अभियान शुरू करने की योजना बना रही है।