अखिलेश ने तीसरे कैंडिडेट पर लगाया ब्रेक: यूपी से निर्विरोध चुने जाएंगे भाजपा के 8 और सपा के 2 राज्यसभा उम्मीदवार

अखिलेश ने तीसरे कैंडिडेट पर लगाया ब्रेक: यूपी से निर्विरोध चुने जाएंगे भाजपा के 8 और सपा के 2 राज्यसभा उम्मीदवार

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 रिक्त सीटों के लिए चल रही सियासी खींचतान आखिरकार बिना किसी चुनावी मुकाबले के समाप्त हो गई है। नामांकन के आखिरी दिन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीसरा प्रत्याशी उतारने की अटकलों पर पूर्णविराम लगाते हुए मैदान से कदम पीछे खींच लिए। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि पार्टी राज्यसभा की एक अतिरिक्त सीट के फेर में उलझने के बजाय अपना पूरा ध्यान 2027 के विधानसभा चुनाव और प्रदेश की 403 सीटों के संगठनात्मक लक्ष्य पर केंद्रित रखेगी।

सपा के इस रणनीतिक फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में मतदान की नौबत पूरी तरह समाप्त हो गई है। 10 सीटों के सापेक्ष केवल 10 ही वैध प्रत्याशी मैदान में हैं, जिसके चलते भारतीय जनता पार्टी के 8 और समाजवादी पार्टी के 2 उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया है।

निर्विरोध चुने जाने वाले उम्मीदवारों की पूरी सूची

दल उम्मीदवार का नाम पृष्ठभूमि / राजनीतिक पहचान
सपा प्रो. रामगोपाल यादव वरिष्ठ राष्ट्रीय महासचिव व सांसद
सपा धनराज परिमल नथवानी वरिष्ठ कॉरपोरेट अधिकारी
भाजपा धर्मपाल सिंह यूपी कैबिनेट मंत्री (ओबीसी - लोधी)
भाजपा राधाकांत ओझा पूर्व अध्यक्ष, HC बार एसोसिएशन (ब्राह्मण)
भाजपा प्रकाश पाल प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा ओबीसी मोर्चा (पाल/गडेरिया)
भाजपा विद्यासागर सोनकर पूर्व सांसद व वरिष्ठ नेता (दलित - खटीक)
भाजपा गोपी कृष्ण पांडेय वरिष्ठ संघ व संगठन कार्यकर्ता (ब्राह्मण)
भाजपा प्रियंका सिंह रावत पूर्व सांसद, बाराबंकी (दलित - पासी)
भाजपा राम प्रताप सिंह चौहान पूर्व विधायक, आगरा (राजपूत)
भाजपा श्रुति गंगवार महिला व सामाजिक कार्यकर्ता (ओबीसी - कुर्मी)

क्यों पीछे हटे अखिलेश यादव? संख्याबल और क्रॉस-वोटिंग का डर

उत्तर प्रदेश विधानसभा के मौजूदा अंकगणित के मुताबिक, राज्यसभा की एक सीट निकालने के लिए लगभग 37 प्रथम वरीयता वोटों की दरकार थी।

  • सपा का गणित: सपा और उसके सहयोगी दलों के पास दो सीटें (रामगोपाल यादव और धनराज नथवानी) सुरक्षित रूप से जिताने के बाद केवल 28 से 29 अतिरिक्त वोट ही शेष बच रहे थे।

  • तीसरे प्रत्याशी की कमी: तीसरा उम्मीदवार जिताने के लिए सपा को कम से कम 8 से 9 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत थी, जो बिना एनडीए या बागी विधायकों की क्रॉस-वोटिंग के संभव नहीं था।

  • फूट का जोखिम: पिछले राज्यसभा चुनाव में सपा के कई विधायकों ने बगावत करते हुए भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी। हाल ही में कुछ अन्य सपा विधायकों की सत्ता पक्ष के शीर्ष नेताओं से मुलाकातों ने पार्टी आलाकमान को असहज कर दिया था। ऐसे में अखिलेश यादव ने कोई नया सियासी जोखिम न लेते हुए मुकाबले से हटना ही बेहतर समझा।

एनडीए का किला रहा अभेद्य, सभी 8 सीटों पर जीत

सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 290 से अधिक विधायकों का ठोस संख्याबल था। भाजपा ने इस बार अपने पुराने केंद्रीय मंत्रियों और पूर्व सांसदों के टिकट काटकर संघ और संगठन के समर्पित व जमीनी कार्यकर्ताओं को टिकट दिया है। भाजपा के आठों उम्मीदवारों की जीत के लिए आवश्यक 296 वोटों का आंकड़ा एनडीए अपने सहयोगी दलों (अपना दल एस, रालोद, सुभासपा, निषाद पार्टी) और निर्दलीय विधायकों के सहयोग से आसानी से जुटाने की स्थिति में था।

सपा के पीछे हटने से भाजपा को अपने सभी आठ उम्मीदवारों को बिना किसी मशक्कत या व्हिप के तनाव के सीधे संसद के उच्च सदन भेजने में सफलता मिल गई है।

आगे की औपचारिक प्रक्रिया

निर्वाचन आयोग की समय-सारिणी के अनुसार नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की निर्धारित समयसीमा समाप्त होते ही रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा सभी 10 प्रत्याशियों के निर्विरोध निर्वाचन का औपचारिक प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश की इस राज्यसभा जंग के शांत होने के बाद अब दोनों ही खेमों का पूरा फोकस आगामी राजनीतिक लड़ाइयों और 2027 के विधानसभा चुनावी चक्रव्यूह पर टिक गया है।