बेअदबी, नशा, 5 लाख करोड़ का कर्ज और किसानों के मुद्दे पर मान सरकार को घेरा
पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र की शुरुआत के साथ ही राज्य का राजनीतिक पारा चरम पर पहुंच गया है। विधानसभा परिसर में सदन की कार्यवाही शुरू होने से ऐन पहले मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा की अगुआई में कांग्रेस विधायकों ने हाथों में सरकार की कथित नाकामियों का विस्तृत कच्चा-चिट्ठा लिए विधानसभा के प्रवेश द्वार पर जोरदार नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायक दल ने औपचारिक रूप से सरकार के खिलाफ एक तीखा 'लानत पत्र' (चार्जशीट रूपी निंदा पत्र) जारी किया। इस पत्र में बेअदबी के संवेदनशील मामलों में इंसाफ में हो रही देरी, राज्य में पैर पसारते जानलेवा नशे के कारोबार, सिर चढ़ते पांच लाख करोड़ के कर्ज, अवैध रेत खनन, बेकाबू गैंगस्टरों के तांडव और मंडियों में धान खरीद के संकट को लेकर सत्तारूढ़ आप सरकार पर चौतरफा और तीखे हमले किए गए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने से पहले बड़े-बड़े वादे करने वाली पार्टी आज पंजाब के बुनियादी और ज्वलंत सवालों पर जनता को जवाब देने से भाग रही है।
बेअदबी मामलों में इंसाफ पर सवाल: डेरा प्रमुख पर केस चलाने की मंजूरी में देरी का लगाया गंभीर आरोप
कांग्रेस पार्टी द्वारा जारी किए गए 'लानत पत्र' में वर्ष 2015 के श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के पवित्र और अत्यंत संवेदनशील मामलों को सबसे प्रमुखता से उठाया गया। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले चौबीस घंटे के भीतर इंसाफ दिलाने की हुंकार भरने वाली आम आदमी पार्टी की सरकार आज मुख्य षड्यंत्रकारियों और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को लटकाने में लगी है। पत्र में सीधा सवाल दागा गया कि इस बहुचर्चित मामले में नामजद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाफ मुकदमा चलाने की कानूनी मंजूरी देने में सरकार ने इतनी लंबी हिचकिचाहट क्यों दिखाई। कांग्रेस विधायकों ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि पंजाब की भावनाओं से जुड़े इस संवेदनशील मामले के मुकदमों को राज्य से बाहर स्थानांतरित करवाने की प्रक्रिया में राज्य सरकार के लचर रवैये ने परोक्ष रूप से मदद पहुंचाई, जिससे पीड़ितों और सिख संगत को समय पर न्याय मिलने की उम्मीदों को गहरा आघात पहुंचा है।
नशे की महामारी और जेलों से गैंगस्टरों का नेटवर्क: केजरीवाल की 3 महीने वाली गारंटी पर तंज
राज्य में युवाओं की नसों में घुलते नशे और बिगड़ती कानून व्यवस्था के मुद्दे पर कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के पुराने बयानों को याद दिलाते हुए कड़ा प्रहार किया। पत्र में पूछा गया कि चुनाव से पहले पंजाब से महज तीन महीने के भीतर नशा पूरी तरह खत्म करने की जिस बहुप्रचारित गारंटी का ढोल पीटा गया था, उसका क्या हुआ। कांग्रेस ने नशे के काले कारोबार के खिलाफ जनआंदोलन चलाने वाले परमिंदर सिंह झोटा की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग की। इसके साथ ही पत्र में मोहनजीत सिंह की नृशंस पिटाई और गुलजार सिंह व बिक्रमजीत सिंह की हत्याओं का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया कि आज पंजाब में नशा तस्करों के खिलाफ आवाज उठाने वालों की जान सुरक्षित नहीं है। संगठित अपराध और गैंगस्टरों के आतंक पर बोलते हुए कांग्रेस ने जेल की सलाखों के पीछे से कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के दो-दो वीडियो इंटरव्यू प्रसारित होने की घटना को पंजाब पुलिस और खुफिया तंत्र की ऐतिहासिक विफलता करार दिया। विधायकों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही जांच का हवाला देकर दावा किया कि राज्य में पुलिस और आपराधिक गिरोहों के बीच बने नापाक गठजोड़ की कलई अब पूरी तरह खुल चुकी है।
पंजाब पर चढ़ा ₹5 लाख करोड़ का कर्ज: 20 हजार करोड़ के अवैध खनन राजस्व के दावों की मांगी रिपोर्ट
पंजाब की खस्ताहाल होती वित्तीय स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आप सरकार के बेतरतीब वित्तीय प्रबंधन और अंधाधुंध विज्ञापनों के कारण राज्य पर कुल सार्वजनिक कर्ज का बोझ बढ़कर 5 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक और खतरनाक आंकड़े को पार कर गया है। कांग्रेस ने पत्र के जरिए सवाल उठाया कि सरकारी खजाने को भरने के नाम पर राज्य के सार्वजनिक संस्थानों और संपत्तियों को बेचने की जो नीति अपनाई जा रही है, उस पर श्वेत पत्र जारी किया जाना चाहिए। इसके अलावा, चुनाव पूर्व आप नेताओं द्वारा राज्य में अवैध रेत खनन को पूरी तरह बंद कर सरकारी खजाने में हर साल 20 हजार करोड़ रुपये का भारी राजस्व लाने का जो दावा किया गया था, उसका हिसाब मांगते हुए कांग्रेस ने कहा कि आज भी राज्य की नदियों और खड्डों में खनन माफिया बेखौफ होकर प्राकृतिक संसाधनों की लूट मचा रहे हैं और सरकारी खजाना खाली पड़ा है।
शंभू बॉर्डर, बांधों पर सीआईएसएफ और धान खरीद में ₹3600 करोड़ का नुकसान: अन्नदाताओं के मुद्दे पर घेरा
किसानों और कृषि संकट को लेकर भी कांग्रेस ने 'लानत पत्र' में राज्य और केंद्र सरकार दोनों को आड़े हाथों लिया। पत्र में आरोप लगाया गया कि किसान आंदोलन के दौरान शंभू और खनौरी बॉर्डर पर लंबे समय तक सड़कें बंद कराकर आम जनता और किसानों को परेशान किया गया। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि पंजाब की सीमा के भीतर किसानों पर हरियाणा पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले और कथित गोलियां चलाने की घटनाओं पर राज्य सरकार ने कड़ा संप्रभु रुख क्यों नहीं अपनाया। इसके अतिरिक्त, डैम सेफ्टी एक्ट के क्रियान्वयन, पंजाब के ऐतिहासिक बांधों पर केंद्र सरकार के सीधे दखल और वहां सीआईएसएफ (CISF) की तैनाती पर राज्य सरकार की चुप्पी को पंजाब के जल अधिकारों पर सीधा कुठाराघात बताया गया। वर्तमान धान के सीजन का जिक्र करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया कि समय पर सुचारू खरीद और उठान न होने के कारण मंडियों में किसानों से प्रति क्विंटल 200 रुपये तक की अवैध कटौती की जा रही है, जिससे राज्य के किसानों को लगभग 180 लाख मीट्रिक टन धान की फसल पर करीब ₹3,600 करोड़ का भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसके साथ ही सरकारी कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित पड़े महंगाई भत्ते (DA) के एरियर का भुगतान न करने पर भी सरकार की तीखी आलोचना की गई।