पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी से परगट सिंह का इनकार: बोले- सबकी भूमिका तय, हर नेता को दिखानी होगी अपनी 'ड्रिबलिंग'

पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी से परगट सिंह का इनकार: बोले- सबकी भूमिका तय, हर नेता को दिखानी होगी अपनी 'ड्रिबलिंग'

चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह ने पार्टी के भीतर किसी भी तरह की गुटबाजी या अंतर्कलह की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। पदभार संभालने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए पूर्व ओलंपियन ने अपने चिर-परिचित खेल के अंदाज में सियासी विरोधियों और पार्टी के नेताओं को दो टूक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कोई बिखरा हुआ कुनबा नहीं बल्कि एक मजबूत टीम है, जहां हर खिलाड़ी की जिम्मेदारी और जगह पहले से तय है। 2027 के चुनावी दंगल में उतरने से पहले उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अब मैदान में सिर्फ बातें नहीं, बल्कि हर नेता को अपनी राजनीतिक 'ड्रिबलिंग' और टाइमिंग साबित करनी होगी।

'राजनीति भी हॉकी की तरह': मैदान में हर खिलाड़ी का रोल पहले से तय

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने चरणजीत सिंह चन्नी, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच कथित मतभेदों को लेकर सवाल पूछा, तो परगट सिंह ने मुस्कुराते हुए खेल का उदाहरण सामने रख दिया। उन्होंने कहा कि जैसे हॉकी या फुटबॉल के मैदान पर फॉरवर्ड, हाफ-बैक और फुल-बैक की अलग-अलग जिम्मेदारियां होती हैं, वैसे ही संगठन में हर नेता का अपना दायरा और भूमिका है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि टीम तभी जीतती है जब हर खिलाड़ी अपनी जगह पर डटकर खेले और गेंद को सही समय पर साथी खिलाड़ी की तरफ पास करे। कोई भी नेता अकेले पूरे मैच का नतीजा नहीं बदल सकता। परगट सिंह ने कहा कि चरणजीत सिंह चन्नी पार्टी के बेहद वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं, वहीं राजा वड़िंग ने संगठन को आक्रामक तेवर दिए हैं। इन सभी नेताओं का अनुभव और ऊर्जा पार्टी की सबसे बड़ी ताकत है, न कि कमजोरी।

मतभेद और मनभेद में फर्क: लोकतंत्र में विचार अलग हो सकते हैं, लक्ष्य नहीं

परगट सिंह ने कहा कि एक जीवंत लोकतांत्रिक पार्टी में नेताओं के अलग-अलग नजरिए और विचार हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि उनके बीच कोई निजी 'मनभेद' है। उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी पार्टियां कांग्रेस की अंदरूनी चर्चाओं को बेवजह गुटबाजी का रंग देने की कोशिश कर रही हैं।

उन्होंने साफ लफ्जों में चेतावनी दी कि संगठन में अनुशासनहीनता या निजी स्वार्थ के लिए कोई जगह नहीं होगी। हाईकमान ने उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसका मुख्य मकसद सभी खेमों को विश्वास में लेकर एक ऐसी रणनीति बनाना है, जिसमें हर कार्यकर्ता खुद को अहम हिस्सा महसूस करे। जो नेता जमीनी स्तर पर जनता के मुद्दों को उठाएगा और कार्यकर्ताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेगा, पार्टी में उसी का कद बड़ा होगा।

पंजाब के असल मुद्दों पर केंद्रित रहेगा एजेंडा: जनता के बीच जाएगी कांग्रेस

नए प्रदेश अध्यक्ष ने दोहराया कि उनका ध्यान पार्टी के अंदरूनी विवादों पर समय गंवाने के बजाय पंजाब की जनता से जुड़े जलते सवालों पर रहेगा। उन्होंने राज्य की मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब में कानून-व्यवस्था, नशाखोरी, किसानों की समस्याएं, स्वास्थ्य सेवाएं और युवाओं के विदेश पलायन जैसे गंभीर संकट मुंह बाए खड़े हैं।

कांग्रेस अब सड़कों पर उतरकर इन मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाएगी। परगट सिंह के मुताबिक, पार्टी का कार्यकर्ता जब अपने इलाके में जनता के हक के लिए आवाज उठाएगा, तो किसी के पास आपसी खींचतान में उलझने की फुर्सत ही नहीं बचेगी। ब्लॉक और जिला स्तर पर जल्द ही संगठनात्मक बैठकें शुरू होंगी, जहां सीधे कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया जाएगा।

2027 का रोडमैप: एकजुटता ही सत्ता में वापसी की एकमात्र चाबी

विधानसभा चुनाव 2027 की रूपरेखा खींचते हुए परगट सिंह ने कहा कि पंजाब के लोग अब पारंपरिक बयानबाजी से आगे बढ़कर ठोस समाधान चाहते हैं। कांग्रेस का इतिहास संकट के दौर से उबरकर दोबारा खड़े होने का रहा है।

उन्होंने कहा कि जब टीम के सभी ग्यारह खिलाड़ी एक ही दिशा में गोल करने के इरादे से दौड़ते हैं, तभी विरोधी डिफेंस टूटता है। माझा, मालवा और दोआबा के सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ समन्वय बनाकर एक संयुक्त कैंपेन तैयार किया जाएगा। परगट सिंह के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि वे अनुशासन और परफॉर्मेंस के दम पर ही पंजाब कांग्रेस की गाड़ी को आगे खींचने का इरादा रखते हैं।