अकाली नेताओं की धमकियों से खौफ में पीड़ित महिलाएं, पहुंचीं अकाल तख्त; बर्खास्त नेत्री ने मांगी पुलिस सुरक्षा

अकाली नेताओं की धमकियों से खौफ में पीड़ित महिलाएं, पहुंचीं अकाल तख्त; बर्खास्त नेत्री ने मांगी पुलिस सुरक्षा

अमृतसर। शिरोमणि अकाली दल के कुछ प्रभावशाली नेताओं की कथित धमकियों और दबाव के बाद पीड़ित महिलाओं ने सिखों की सर्वोच्च धार्मिक पीठ श्री अकाल तख्त साहिब का रुख किया है। खौफ और मानसिक तनाव के बीच सचखंड श्री हरमंदिर साहिब परिसर स्थित अकाल तख्त सचिवालय पहुंची इन महिलाओं ने जत्थेदार के नाम ज्ञापन सौंपकर इंसाफ और सुरक्षा की गुहार लगाई है। वहीं, हाल ही में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित की गई वरिष्ठ महिला नेत्री ने खुद को और अपने परिवार को जानलेवा खतरे की आशंका जताते हुए पंजाब पुलिस के उच्चाधिकारियों से तत्काल पुख्ता सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है। इस घटनाक्रम ने पंथिक और राजनीतिक हलकों में तीखा भूचाल ला दिया है।

न्याय की गुहार लेकर अकाल तख्त साहिब की चौखट पर पहुंचीं महिलाएं

श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय पहुंची पीड़ित महिलाओं ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी आपबीती सुनाई। महिलाओं का आरोप है कि अकाली दल के कुछ प्रभावशाली नेता और उनके करीबी लगातार उन्हें मामले को दबाने, शिकायत वापस लेने और चुप्पी साधने के लिए धमका रहे हैं।

पीड़िताओं ने बताया कि लगातार फोन कॉल्स, अज्ञात लोगों द्वारा रेकी और सामाजिक बहिष्कार की धमकियों के चलते उनका अपने ही घरों में रहना दूभर हो गया है। जब स्थानीय स्तर पर उन्हें कोई ठोस सहारा नजर नहीं आया, तब वे पंथ की सर्वोच्च अदालत यानी मीरी-पीरी के प्रतीक श्री अकाल तख्त साहिब के दर पर पहुंचीं। उन्होंने जत्थेदार साहिब से मामले में तुरंत दखल देने और पंथिक मर्यादा के तहत दोषियों को तलब कर पीड़ितों को इंसाफ दिलाने की अपील की है।

बर्खास्त महिला नेत्री का सनसनीखेज आरोप: 'मेरी जान को सीधा खतरा'

दूसरी तरफ, पार्टी से हाल ही में बाहर का रास्ता दिखाई गईं महिला नेत्री ने खुले तौर पर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने संगठन के भीतर महिलाओं के साथ हो रहे अन्याय और कुछ पदाधिकारियों के गलत रवैये के खिलाफ आवाज उठाई, तो उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें ही अनुशासनहीनता का ठप्पा लगाकर पार्टी से बाहर निकाल दिया गया।

महिला नेत्री ने पुलिस महानिदेशक (DGP) और संबंधित जिला पुलिस प्रमुख को औपचारिक शिकायत पत्र भेजकर अपनी और अपने परिजनों की जान पर मंडरा रहे खतरे से अवगत कराया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें लगातार अज्ञात नंबरों से फोन आ रहे हैं और किसी भी वक्त उन पर हमला हो सकता है। नेत्री ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक बदले की भावना से उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है और अगर उनके या उनके परिवार के साथ कोई अनहोनी होती है, तो उसके लिए पार्टी के शीर्ष पदों पर बैठे संबंधित नेता सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे।

पुलिस प्रशासन हरकत में: शिकायतों की जांच और सुरक्षा का आकलन

मामले के तूल पकड़ने और धार्मिक पीठ तक पहुंचने के बाद स्थानीय प्रशासन और पंजाब पुलिस हरकत में आ गई है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, महिला नेत्री और अन्य पीड़ितों की ओर से दी गई लिखित दरख्वास्तों की गंभीरता से समीक्षा की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून के दायरे में रहकर हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है। जिन नंबरों से धमकी भरे कॉल्स आने का दावा किया गया है, उनकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) खंगाली जा रही हैं। सुरक्षा खतरे के वास्तविक आकलन (Threat Perception) के आधार पर संबंधित महिला नेत्री को आवश्यक सुरक्षा गार्ड्स मुहैया कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, साथ ही पीड़ितों के रिहायशी इलाकों में गश्त बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

पंजाब की सियासत में गरमाया पंथिक व महिला सुरक्षा का मुद्दा

शिरोमणि अकाली दल पहले से ही संगठनात्मक चुनौतियों और राजनीतिक पुनर्गठन के दौर से गुजर रहा है। ऐसे संवेदनशील समय में महिलाओं द्वारा सीधे अकाली नेताओं पर प्रताड़ना व धमकियों के आरोप लगाना और अकाल तख्त साहिब तक मामला पहुंचना पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

महिला सुरक्षा और पंथिक आचार संहिता से जुड़े इस विवाद ने विपक्षी दलों को भी अकाली दल पर हमलावर होने का सीधा मौका दे दिया है। सामाजिक संगठनों और महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने भी मामले की निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच की मांग तेज कर दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से इस शिकायत पर क्या रुख अपनाया जाता है और पुलिस प्रशासन दोषियों के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई करता है।