कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस में 'घर वापसी' पर बोले सचिन पायलट; पंजाब की सियासत में फिर मची हलचल
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य के राजनीतिक गलियारों में उस वक्त भारी हलचल मच गई, जब कांग्रेस के पंजाब मामलों के प्रभारी सचिन पायलट ने पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की संभावित 'घर वापसी' पर एक बड़ा बयान दिया। कैप्टन अमरिंदर सिंह के दोबारा कांग्रेस में लौटने की चर्चाओं पर पूछे गए सीधे सवाल के जवाब में पायलट ने कहा कि राजनीति में कुछ भी संभव है और आने वाले वक्त में क्या करवट लेगा, यह कोई नहीं कह सकता। पायलट ने कहा, "मैंने उनके साथ लंबे समय तक बहुत करीब से काम किया है। मेरी तरह वे भी सशस्त्र बलों (आर्म्ड फोर्सेज) से जुड़े रहे हैं। उन्होंने पंजाब की लंबे समय तक बहुत अच्छी सेवा की है और वे निश्चित तौर पर बेहद ऊंचे कद के नेता हैं। राजनीति में जैसा कि हमेशा कहा जाता है—'कुछ भी हो सकता है'।" हालांकि पायलट ने यह भी साफ किया कि कैप्टन के किसी पार्टी में शामिल होने या छोड़ने की निजी योजनाओं को लेकर उनकी अभी सीधे कोई बातचीत नहीं हुई है, लेकिन उनके इस सधे हुए और सकारात्मक रुख ने पंजाब से लेकर दिल्ली तक सियासी कयासों को नया पंख दे दिया है।
कैप्टन की भाजपा से नाराजगी और उठती सुगबुगाहट
कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस में वापसी की अटकलें अचानक ही शुरू नहीं हुई हैं, बल्कि इसके पीछे हाल के दिनों में सामने आए कई घटनाक्रम हैं। सितंबर 2021 में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू से तनातनी के बाद कैप्टन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर अपनी नई पार्टी 'पंजाब लोक कांग्रेस' बनाई थी और बाद में उसका विलय भारतीय जनता पार्टी (BJP) में कर दिया था। लेकिन पिछले कुछ समय से कैप्टन अमरिंदर सिंह भाजपा की आंतरिक कार्यशैली और पंजाब के अहम फैसलों में खुद को पर्याप्त तवज्जो न मिलने को लेकर परोक्ष रूप से अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने एक सार्वजनिक मंच पर कहा था कि पार्टी को पंजाब की जमीनी हकीकत से अवगत कराना उनका कर्तव्य है। दूसरी तरफ, भाजपा में उनके पूरे परिवार—पत्नी व पूर्व सांसद परणीत कौर, बेटे रणिंदर सिंह और बेटी जय इंदर कौर—के शामिल होने के बावजूद उन्हें राज्य की राजनीति में वह केंद्रीय धुरी नहीं मिल सकी, जिसके वे आदी रहे हैं। इसी असहजता के बीच चर्चाएं तैरने लगीं कि क्या 'पटियाला के कैप्टन' एक बार फिर अपने पुराने घर का रुख कर सकते हैं।
पंजाब कांग्रेस में नया नेतृत्व और समीकरणों का संतुलन
सचिन पायलट का यह बयान ऐसे समय आया है जब पंजाब कांग्रेस खुद एक बड़े सांगठनिक बदलाव के दौर से गुजरी है। हाल ही में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद पूर्व हॉकी कप्तान और तीन बार के विधायक परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) की नई कमान सौंपी गई है। पंजाब प्रभारी के रूप में सचिन पायलट लगातार सभी गुटों—चाहे वह पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी का खेमा हो, प्रताप सिंह बाजवा हों या सुखजिंदर सिंह रंधावा—को एक मंच पर लाकर एकजुट करने में जुटे हैं। ऐसे नाजुक मोड़ पर कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसे कद्दावर चेहरे के प्रति नरम रुख दिखाकर सचिन पायलट ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि कांग्रेस 2027 में आम आदमी पार्टी को सत्ता से बेदखल करने के लिए किसी भी बड़े समीकरण और पुराने दिग्गजों के स्वागत से परहेज नहीं करेगी।
क्या वाकई मुमकिन है कैप्टन की वापसी? आगे की राह में कई पेच
भले ही पायलट के बयान ने सियासी चर्चाओं को गर्मा दिया हो, लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस में वापसी की राह इतनी सीधी और आसान भी नहीं मानी जा रही है। कैप्टन जब पार्टी से अलग हुए थे, तो उनके जाने के बाद संगठन के कई बड़े नेताओं ने उनके खिलाफ बेहद कड़े व्यक्तिगत और राजनीतिक हमले बोले थे। पार्टी के भीतर यह सवाल भी गहराएगा कि यदि इतने बड़े कद का नेता वापस आता है, तो प्रदेश के वर्तमान स्थापित नेतृत्व और मुख्यमंत्री पद के कई दावेदारों के बीच संतुलन कैसे साधा जाएगा। जब पायलट से पूछा गया कि क्या कैप्टन जैसे वरिष्ठ नेता वापसी के लिए बड़े पद की उम्मीद करेंगे, तो उन्होंने दो टूक कहा कि कैप्टन के मन में क्या चल रहा है यह केवल वही जानते हैं और वक्त ही बताएगा कि आगे क्या तस्वीर बनती है। फिलहाल, पायलट के 'कुछ भी संभव' वाले बयान ने पंजाब के विपक्षी दलों और खुद भाजपा खेमे को चौकन्ना जरूर कर दिया है।