पंजाब में परविंदर सिंह झोटा मर्डर केस पर बवाल: भाजपा का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन, फरीदकोट जिला प्रधान हिरासत में
पंजाब की सियासत और कानून-व्यवस्था को लेकर इस वक्त सबसे बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। नशा विरोधी मुहिम के चर्चित चेहरे परविंदर सिंह झोटा की नृशंस हत्या के बाद पूरे राज्य में भारी जन-आक्रोश फूट पड़ा है। भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले को लेकर पंजाब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पूरे राज्य में जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। फरीदकोट से लेकर चंडीगढ़ तक सियासी पारा चढ़ चुका है। इसी कड़ी में फरीदकोट में प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे भाजपा जिला प्रधान को पुलिस ने भारी तनाव के बीच हिरासत में ले लिया है, जिसके बाद स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।
परविंदर सिंह झोटा मर्डर केस: पंजाब की सड़कों पर उतरी भाजपा
परविंदर सिंह झोटा पंजाब में नशा तस्करों के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाने वाले प्रमुख चेहरों में से एक थे। मानसा में दिनदहाड़े हुए उनके कत्ल ने पूरे सूबे में कानून और व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतीय जनता पार्टी ने इसे राज्य में बढ़ते जंगलराज का सीधा प्रमाण बताते हुए जिला स्तर पर धरने-प्रदर्शनों का ऐलान किया। फरीदकोट की सड़कों पर सुबह से ही भाजपा कार्यकर्ताओं का जुटना शुरू हो गया था। कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां और झंडे लेकर राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब नशे के खिलाफ लड़ने वाले आम नागरिक ही सुरक्षित नहीं हैं, तो राज्य के आम परिवार कैसे महफूज रह सकते हैं।
प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पंजाब पुलिस ने शहर भर में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे। पुलिस बैरिकेड्स लगाकर कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोका गया, जिससे कई जगहों पर पुलिस और भाजपा नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे फरीदकोट भाजपा जिला अध्यक्ष ने जब सचिवालय और मुख्य मार्ग की ओर कूच करने की कोशिश की, तो पुलिस बल ने उन्हें हिरासत में ले लिया। जिला प्रधान के साथ कई वरिष्ठ पदाधिकारियों को पुलिस वाहनों में बैठाकर अज्ञात स्थान पर ले जाया गया, जिससे प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कार्यकर्ता और उग्र हो गए।
फरीदकोट में जिला प्रधान हिरासत में, पुलिस और प्रदर्शनकारियों में टकराव
फरीदकोट के मुख्य चौक पर घंटों तक अफरातफरी का माहौल बना रहा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शहर में शांति बनाए रखने और यातायात सुचारू रखने के लिए एहतियातन यह कदम उठाया गया। पुलिस ने साफ किया कि किसी को भी कानून हाथ में लेने या सार्वजनिक शांति भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दूसरी ओर, हिरासत में लिए जाने से ठीक पहले मीडिया से बातचीत में भाजपा जिला प्रधान ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नशा माफियाओं को संरक्षण दे रही है और जब विपक्ष या सामाजिक कार्यकर्ता आवाज उठाते हैं, तो उनकी आवाज दबाने के लिए पुलिस का दुरुपयोग किया जाता है।
भाजपा नेताओं ने दावा किया कि परविंदर सिंह झोटा को लंबे समय से धमकियां मिल रही थीं, जिसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन को भी थी। इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई। नेताओं का तर्क है कि झोटा का कत्ल सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं है, बल्कि पंजाब की उस पीढ़ी पर हमला है जो नशे के दलदल से बाहर निकलने की कोशिश कर रही है। फरीदकोट के अलावा बठिंडा, मानसा, पटियाला, जालंधर और अमृतसर में भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने उपायुक्त कार्यालयों के बाहर रोष रैलियां निकालीं और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे।
नशा विरोधी जंग और सवालों के घेरे में कानून-व्यवस्था
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के पीछे नशा माफिया की सीधी संलिप्तता का अंदेशा जताया जा रहा है। झोटा अक्सर अपने वीडियो और अभियानों के जरिए स्थानीय स्तर पर बिक रहे चिट्टे और मेडिकल नशे के नेटवर्क को बेनकाब करते थे। उनके इस आक्रामक रुख से कई बड़े गिरोह असहज थे। उनकी दिनदहाड़े हत्या ने न केवल सामाजिक कार्यकर्ताओं के मनोबल को चोट पहुंचाई है, बल्कि आम जनता में भी भारी भय पैदा कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में नशा हमेशा से एक बेहद संवेदनशील और भावनात्मक चुनावी मुद्दा रहा है। झोटा हत्याकांड ने विपक्ष को सरकार के खिलाफ एक मजबूत हथियार दे दिया है। भाजपा इस मुद्दे को सिर्फ स्थानीय अपराध के रूप में नहीं, बल्कि सरकार की प्रशासनिक विफलता और राज्य की आंतरिक सुरक्षा से जोड़कर पेश कर रही है। भाजपा का स्पष्ट रुख है कि जब तक इस मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच नहीं होती और सभी हत्यारों समेत पर्दे के पीछे बैठे सिंडिकेट को जेल नहीं भेजा जाता, तब तक उनका आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।
क्या पंजाब में बेकाबू हो रहा है नशा माफिया?
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर पंजाब के सीमावर्ती और मालवा क्षेत्र में सक्रिय ड्रग कार्टेल पर बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों का आरोप है कि पंजाब में गैंगस्टरों और ड्रग माफियाओं का एक गठजोड़ काम कर रहा है, जो किसी भी विरोधी आवाज को खत्म करने में हिचकिचाता नहीं है। फरीदकोट में हुई गिरफ्तारियों के बाद भाजपा की प्रदेश इकाई ने आपात बैठक बुलाई है। पार्टी नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि यदि हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं और नेताओं को तुरंत रिहा नहीं किया गया और मुख्य आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे पूरे पंजाब के राष्ट्रीय राजमार्गों को जाम करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
स्थानीय प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फरीदकोट और आसपास के संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी है। अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से निपटा जा सके। जनता की निगाहें अब पंजाब सरकार की कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह इस बहुचर्चित हत्याकांड के असल गुनहगारों को कब तक सलाखों के पीछे पहुंचाती है और नशा विरोधी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।