पंजाब में SIR पर घमासान: बैठक में हामी और बाहर विरोध, सुनील जाखड़ ने AAP-कांग्रेस का दोहरा चरित्र किया बेनकाब

पंजाब में SIR पर घमासान: बैठक में हामी और बाहर विरोध, सुनील जाखड़ ने AAP-कांग्रेस का दोहरा चरित्र किया बेनकाब

पंजाब की सियासत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर घमासान छिड़ गया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील जाखड़ ने आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के रुख पर कड़ा एतराज जताते हुए उनके राजनीतिक आचरण पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चंडीगढ़ में पंजाब की मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) अनिंदिता मित्रा से मुलाकात करने के बाद मीडिया से मुखातिब हुए जाखड़ ने आरोप लगाया कि दोनों दल बंद कमरों की आधिकारिक बैठकों में प्रक्रिया पर पूर्ण सहमति जताते हैं, लेकिन बाहर जनता के बीच आते ही विरोध का दिखावा कर जनता को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने इसे विपक्षी दलों का खुला दोहरापन करार दिया है।

पंजाब के आगामी राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए मतदाता सूचियों का यह पुनरीक्षण बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुका है। सुनील जाखड़ ने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा चलाई जा रही इस व्यापक चुनावी समीक्षा प्रक्रिया को लेकर विपक्ष अनावश्यक भ्रम फैला रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष चुनाव प्रणाली के तहत मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना आयोग का संवैधानिक दायित्व है, जिसमें राज्य के सभी राजनीतिक दलों की आधिकारिक सहभागिता तय की गई थी। इसके बावजूद दिल्ली से लेकर पंजाब तक विरोध प्रदर्शनों की पटकथा लिखकर केवल सियासी रोटियां सेंकने का प्रयास किया जा रहा है।

आयोग की बैठकों में लिखित सहमति और सड़कों पर विरोध का दोहरा रवैया

सुनील जाखड़ ने पूरे घटनाक्रम की परतें खोलते हुए कहा कि चुनाव आयोग द्वारा राज्य के सभी पच्चीस हजार से अधिक मतदान केंद्रों पर पंजीकृत राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को बूथ लेवल एजेंट (BLA) के रूप में सीधे जोड़ा गया था। इस व्यवस्था के तहत हर इलाके के सरकारी बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने नियमित अंतराल पर सभी दलों के नुमाइंदों के साथ बैठकें कीं। इन बैठकों में प्रगति रिपोर्ट साझा की गई और सूचियों पर लिखित रूप में आपत्तियां या सहमतियां दर्ज करने का पूरा मौका दिया गया।

भाजपा नेता के अनुसार, संबंधित बूथों पर एएसडीडी (Absent, Shifted, Dead, Duplicate) सूची में शामिल नामों की संख्या और पूरा ब्यौरा राजनीतिक दलों को विधिवत सौंपा गया था। इन सूचियों की प्राप्ति रसीद पर विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों के दस्तखत मौजूद हैं। अंदरूनी बैठकों में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के प्रवक्ताओं और बीएलए ने प्रक्रिया को संतोषजनक बताते हुए चुनाव अधिकारियों को बधाई तक दी, लेकिन जब राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन खड़ा करने की बारी आई तो वे सड़कों पर उतरकर व्यवस्था पर सवाल उठाने लगे। जाखड़ ने पूछा कि यदि प्रक्रिया में कोई तकनीकी या प्रशासनिक त्रुटि थी, तो उसे संबंधित मंच पर लिखित आपत्ति दर्ज कराते हुए क्यों नहीं उठाया गया।

दिल्ली प्रदर्शन में पंजाब के नेताओं की मौजूदगी और कठपुतली बनने का आरोप

दिल्ली के जंतर-मंतर पर एसआईआर प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष द्वारा किए गए प्रदर्शनों का हवाला देते हुए जाखड़ ने कहा कि यह पूरी कवायद केवल सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का माध्यम है। उन्होंने पंजाब कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य की कांग्रेस इकाई अब केंद्रीय नेतृत्व के हाथों की कठपुतली बनकर रह गई है। पंजाब से जुड़े कई बड़े नेता दिल्ली पहुंचकर लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहे थे, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि उनके अपने बूथ एजेंटों ने संबंधित चुनाव अधिकारियों के साथ मिलकर पूरी प्रक्रिया का सत्यापन किया है।

जाखड़ ने स्पष्ट किया कि अबोहर समेत राज्य के तमाम विधानसभा क्षेत्रों में जिन मतदाताओं के नाम कटे हैं, वे तय नियमों के अनुसार अपात्र पाए जाने पर ही हटाए गए हैं। यदि किसी वैध नागरिक का नाम गलती से हटा है, तो उसके लिए आयोग के पास औपचारिक दावा पेश करने का सीधा और पारदर्शी रास्ता हमेशा खुला रहता है। लेकिन विपक्ष का मकसद समाधान खोजना नहीं, बल्कि चुनाव से पहले संस्थागत विश्वसनीयता पर चोट पहुंचाना है। उन्होंने चुनौती दी कि यदि कांग्रेस या आम आदमी पार्टी के पास धांधली का कोई पुख्ता प्रमाण है, तो वे मीडिया स्टंट करने के बजाय उसे सार्वजनिक मंच और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सामने प्रस्तुत करें।

चुनावी पारदर्शिता और जवाबदेही पर सुनील जाखड़ का संदेश

सुनील जाखड़ ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती सही और पारदर्शी मतदाता सूची पर टिकी होती है। फर्जी, दोहरे या मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाना किसी दल विशेष का नहीं बल्कि निष्पक्ष चुनावी व्यवस्था का एजेंडा होना चाहिए। निर्वाचन तंत्र पर बार-बार अविश्वास जताकर विपक्षी दल संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। उन्होंने आम आदमी पार्टी की राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सत्ताधारी दल अपनी प्रशासनिक विफलताओं और बिगड़ती कानून व्यवस्था से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे निराधार विवादों को हवा दे रहा है।

उन्होंने दोहराया कि यदि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान किसी स्तर पर किसी बीएलओ या कर्मचारी द्वारा कोई लापरवाही बरती गई है, तो आयोग द्वारा उसकी निष्पक्ष जांच कराकर जवाबदेही तय होनी चाहिए, जिसका भारतीय जनता पार्टी भी समर्थन करती है। मगर पूरी संवैधानिक प्रक्रिया को ही कटघरे में खड़ा कर देना गैर-जिम्मेदाराना राजनीति का सबसे बड़ा उदाहरण है। पंजाब की जनता अब इन दलों की दोहरी रणनीति को भली-भांति समझ चुकी है और आने वाले समय में राजनीतिक पाखंड का माकूल जवाब देगी।