ICC टेस्ट रैंकिंग में भारी फेरबदल: टॉप 100 से बाहर चल रहे मैट रेनशॉ ने लगाई 147 पायदानों की ऐतिहासिक छलांग

ICC टेस्ट रैंकिंग में भारी फेरबदल: टॉप 100 से बाहर चल रहे मैट रेनशॉ ने लगाई 147 पायदानों की ऐतिहासिक छलांग

इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) की ओर से जारी ताजा वैश्विक रैंकिंग में केवल टी20 अंतरराष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि टेस्ट क्रिकेट के समीकरणों में भी जोरदार फेरबदल देखने को मिला है। एक तरफ जहां सीमित ओवरों के प्रारूप में भारतीय बल्लेबाजों का दबदबा कायम हुआ है, वहीं दूसरी तरफ पारंपरिक लाल गेंद के खेल में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज मैट रेनशॉ ने एक ऐसा रिकॉर्डतोड़ उछाल मारा है जिसकी मिसाल हाल के वर्षों में कम ही देखने को मिलती है। शीर्ष 100 बल्लेबाजों की सूची से भी कोसों दूर चल रहे रेनशॉ ने अपने बल्ले के दम पर एक ही झटके में 147 स्थानों की लंबी छलांग लगाई है। इस असाधारण प्रदर्शन के बाद वह अब 196वें पायदान से सीधे संयुक्त रूप से 49वें स्थान पर पहुंच गए हैं और दुनिया के शीर्ष 50 टेस्ट बल्लेबाजों की विशिष्ट सूची में अपनी जगह पक्की कर ली है।

डरबन टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ऐतिहासिक 190 रनों का कमाल

मैट रेनशॉ की रैंकिंग में आया यह भूचाल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ डरबन में खेले गए पहले टेस्ट मुकाबले में उनकी मैच-जिताऊ पारी का सीधा नतीजा है। लंबे समय बाद ऑस्ट्रेलियाई प्लेइंग इलेवन में वापसी कर रहे बाएं हाथ के इस सलामी बल्लेबाज ने मुश्किल और उछाल भरी परिस्थितियों में दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाजों का डटकर सामना किया। पहली पारी में संकट में फंसी कंगारू टीम को संभालते हुए रेनशॉ ने 190 रनों की मैराथन और धैर्यपूर्ण शतकीय पारी खेली। इस मुकाबले में उन्होंने कुल 272 रन बनाए और बल्ले के साथ-साथ एक उपयोगी पार्ट-टाइम स्पिनर के तौर पर गेंदबाजी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। रेनशॉ के इस धैर्यवान और आक्रामक खेल ने न केवल ऑस्ट्रेलिया को मुकाबले में जीत की दहलीज पर खड़ा किया, बल्कि आईसीसी की रेटिंग तालिका में उन्हें सीधे 147 पायदान ऊपर पहुंचा दिया।

गुमनामी के दौर से निकलकर टॉप 50 में वापसी की प्रेरणादायक कहानी

मैट रेनशॉ का टेस्ट करियर हमेशा से उतार-चढ़ाव भरा रहा है। साल 2016 में अपने टेस्ट करियर का शानदार आगाज करने वाले रेनशॉ को बीच के वर्षों में खराब फॉर्म और टीम संयोजन के चलते बार-बार राष्ट्रीय टीम से बाहर होना पड़ा था। नियमित रूप से अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच न खेल पाने के कारण उनकी आईसीसी रेटिंग लगातार गिरती गई और वे लुढ़कते-लुढ़कते 196वें स्थान पर पहुंच गए थे। हालांकि, उन्होंने घरेलू शेफील्ड शील्ड और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में लगातार पसीना बहाया। जब चयनकर्ताओं ने उन्हें विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के इस अहम दौरे के लिए दोबारा मौका दिया, तो उन्होंने दोनों हाथों से इस अवसर को भुनाया। लगभग सौ से अधिक स्थानों को एक साथ पार कर टॉप-50 में सीधे 49वें नंबर पर पहुंचना उनके कड़े संघर्ष और मानसिक मजबूती की कहानी बयान करता है।

शीर्ष टेस्ट बल्लेबाजों और अन्य खिलाड़ियों की रैंकिंग की स्थिति

आईसीसी की ताजा टेस्ट बल्लेबाजों की सूची पर नजर डालें तो शीर्ष पायदानों पर भी रोचक मुकाबला चल रहा है। इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज जो रूट दुनिया के नंबर-1 टेस्ट बल्लेबाज की कुर्सी पर मजबूती से काबिज हैं। उनके पीछे न्यूजीलैंड के दिग्गज केन विलियमसन, ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ और भारतीय टेस्ट कप्तान व सीनियर बल्लेबाजों के बीच कड़ा मुकाबला बना हुआ है। रेनशॉ की इस लंबी छलांग ने ऑस्ट्रेलियाई मध्यक्रम और शीर्ष क्रम के संतुलन को और अधिक मजबूती दी है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करने वाले अन्य ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को भी इस रैंकिंग अपडेट में कुछ अंकों का फायदा हुआ है, जिससे ऑस्ट्रेलिया आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की अंक तालिका और टीम रैंकिंग दोनों में अपनी स्थिति को सुदृढ़ करने में सफल रहा है।

टेस्ट गेंदबाजों और ऑलराउंडर्स की ताजा रैंकिंग के समीकरण

बल्लेबाजों के साथ-साथ टेस्ट गेंदबाजों की ताजा रैंकिंग में भी हलचल देखी गई है। भारतीय अनुभवी तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस के बीच दुनिया के नंबर-1 टेस्ट गेंदबाज बनने की होड़ जारी है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ डरबन टेस्ट में घातक गेंदबाजी करने वाले गेंदबाजों को रेटिंग अंकों का लाभ मिला है, जबकि दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाजों को घरेलू परिस्थितियों में निराशाजनक प्रदर्शन के कारण कुछ पायदानों का नुकसान उठाना पड़ा है। ऑलराउंडर्स की सूची में भारतीय दिग्गज रवींद्र जडेजा का वर्चस्व बना हुआ है, जबकि निचले क्रम में बल्ले और गेंद दोनों से योगदान देने वाले खिलाड़ियों की रेटिंग में मामूली फेरबदल दर्ज किए गए हैं।

ऑस्ट्रेलियाई टीम प्रबंधन के लिए बढ़ी सुखद सिरदर्दी

मैट रेनशॉ के इस धमाकेदार प्रदर्शन और रैंकिंग में आई ऐतिहासिक उछाल ने ऑस्ट्रेलियाई चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट के सामने एक सुखद सिरदर्दी खड़ी कर दी है। उस्मान ख्वाजा के संन्यास की आहट और शीर्ष क्रम में नए विकल्प तलाशने की प्रक्रिया के बीच रेनशॉ ने यह साबित कर दिया है कि वे लाल गेंद के प्रारूप में लंबी पारियां खेलने के लिए पूरी तरह परिपक्व हो चुके हैं। आगामी एशेज और भारत के खिलाफ होने वाली आगामी बॉर्डर-गावस्कर टेस्ट सीरीज के रणनीतिक खाके में अब रेनशॉ का नाम सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल हो गया है। क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि यदि रेनशॉ इसी निरंतरता के साथ खेलते रहे, तो वे बहुत जल्द टेस्ट रैंकिंग के शीर्ष 20 बल्लेबाजों में भी अपनी दस्तक देंगे।