अमित शाह के 2027 में UCC लागू करने वाले बयान पर अखिलेश यादव का तीखा पलटवार
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सियासी गलियारों में जुबानी जंग अपने चरम पर पहुंच गई है। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 2027 में सरकार बनने पर उत्तर प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के बड़े ऐलान के कुछ ही घंटों बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मोर्चा खोल दिया। लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में आयोजित एक खचाखच भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने अमित शाह के बयान पर फिल्मी और शायराना अंदाज में चुटकी लेते हुए कहा कि 'बड़ी देर कर दी मेहरबां आते-आते'। अखिलेश यादव के इस एक जुमले ने भाजपा के नए वैचारिक एजेंडे की हवा निकालने की कोशिश करते हुए यह संदेश देने का प्रयास किया कि जब सरकार के जाने का वक्त करीब आ चुका है, तब जनता को भरमाने के लिए पुराने और भावनात्मक मुद्दों की धूल झाड़ी जा रही है।
'बड़ी देर कर दी मेहरबां आते-आते': 10 साल सत्ता में रहकर अब क्यों याद आया कानून?
अखिलेश यादव ने भाजपा के 10 वर्षों के शासनकाल का हिसाब मांगते हुए गृह मंत्री के बयान की टाइमिंग पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार पिछले 12 सालों से है और उत्तर प्रदेश में खुद भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार लगभग 10 वर्षों से राज कर रही है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले अचानक समान नागरिक संहिता का राग अलापना यह साबित करता है कि सरकार अपने वादों और जमीनी विकास के मोर्चे पर पूरी तरह दिवालिया हो चुकी है। सपा मुखिया ने कहा कि जब जनता महंगाई, बिजली की मार, छुट्टा पशुओं के आतंक और भ्रष्टाचार से त्राहि-त्राहि कर रही है, तब गृह मंत्री को विकास का रिपोर्ट कार्ड पेश करने के बजाय यूसीसी जैसा शिगूफा छोड़ना पड़ रहा है। अखिलेश ने दो-टूक कहा कि चुनाव में जीत और हार का फैसला मंचों से दिए जाने वाले लंबे-चौड़े और भड़काऊ भाषणों से नहीं, बल्कि जनता की जेब, उसकी थाली और उसके वोट से तय होता है।
एमएलसी चुनाव नतीजों की चोट: 'वाराणसी और अयोध्या में जनता ने दिखा दिया आईना'
प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने हाल ही में संपन्न हुए उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) शिक्षक और स्नातक खंड के चुनाव परिणामों का हवाला देते हुए भाजपा पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आज भाजपा के शीर्ष नेता लखनऊ में बैठकर जो दावे कर रहे हैं, उसकी असली हकीकत जनता ने कुछ दिन पहले ही दिखा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में शिक्षक और स्नातक दोनों ही सीटों पर भाजपा की करारी हार का उल्लेख करते हुए अखिलेश ने कहा कि जो दल खुद को अजेय बताता था, उसे काशी के प्रबुद्ध मतदाताओं ने डबल इंजन को 'डबल जीरो' में बदल दिया है। इसके साथ ही अयोध्या और फैजाबाद क्षेत्र में समाजवादी पार्टी को मिले भारी जनसमर्थन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जनता अब किसी झांसे में नहीं आने वाली। भाजपा भले ही 6 सीटें प्रशासनिक हेराफेरी से जीतने का ढोंग कर ले, लेकिन प्रदेश के 50 से अधिक जिलों के शिक्षित युवाओं और शिक्षकों ने सत्ता पक्ष को सिरे से खारिज कर दिया है।
असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की साजिश: पेपर लीक, बेरोजगारी और बंद होते स्कूलों पर सवाल
अखिलेश यादव ने सरकार की नीति और नीयत पर वार करते हुए कहा कि यूसीसी की बहस केवल एक सुनियोजित 'डायवर्जन टैक्टिक' यानी ध्यान भटकाने की चाल है ताकि प्रदेश के युवाओं का ध्यान असल बर्बादी से हटाया जा सके। सपा प्रमुख ने आधिकारिक आंकड़ों को सामने रखते हुए आरोप लगाया कि पिछले दशक में प्रदेश में तीन दर्जन से अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, जिससे करोड़ों नौजवानों का भविष्य अंधकारमय हो गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक तरफ 27 हजार प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को बंद या मर्ज कर दिया, जबकि दूसरी तरफ 27 हजार शराब के नए ठेके खोल दिए। आज जब शिक्षित स्नातक सड़क पर नौकरी मांग रहा है, शिक्षामित्र और अनुदेशक अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, और किसान खाद व न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए लाइनों में लगा है, तब गृह मंत्री इन बुनियादी सवालों का जवाब देने से भाग रहे हैं।
पीडीए की एकजुटता से घबराई भाजपा: 2027 में विभाजनकारी राजनीति पर जनता का प्रहार
समाजवादी पार्टी के सामाजिक समीकरण 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की ताकत का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव ने दावा किया कि भाजपा का सामाजिक आधार पूरी तरह दरक चुका है। उन्होंने कहा कि आज पीडीए का दायरा समाज के 95 फीसदी शोषित, पीड़ित और प्रबुद्ध तबके तक फैल चुका है, जिसमें अगड़े समाज के न्यायप्रिय लोग भी शामिल हैं। गृह मंत्री द्वारा समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद और तुष्टीकरण के लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए अखिलेश ने कहा कि भाजपा जब भी अपनी नाकामियों में घिरती है, तो उसे समाज में नफरत और विभाजन की दीवारें खड़ी करने की आदत है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण और महिलाओं के अधिकारों की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली भाजपा यह बताए कि उसने सदन में महिलाओं को उनका वाजिब हक कब दिया। अखिलेश ने घोषणा की कि 2027 के चुनाव में समाजवादी पार्टी भाजपा से कहीं अधिक महिलाओं, युवाओं और जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को टिकट देकर विधानसभा भेजेगी।
2027 का सियासी महामुकाबला: क्या ध्रुवीकरण के जाल में फंसेगा यूपी का वोटर?
लखनऊ में अमित शाह के आक्रामक भाषण और उसके तुरंत बाद अखिलेश यादव के इस तीखे पलटवार ने स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव का रण पूरी तरह सज चुका है। एक तरफ जहां भाजपा समान नागरिक संहिता, राम मंदिर, अपराध-मुक्त प्रदेश और डबल इंजन की स्थिरता को अपनी मुख्य ढाल बना रही है, वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी बेरोजगारी, महंगाई, पेपर लीक, संविधान रक्षा और सामाजिक न्याय के धरातल पर सत्ता पक्ष को घेरने की रणनीति पर अडिग है। अखिलेश यादव के 'देर कर दी मेहरबां' वाले तंज ने भाजपा को यह संदेश देने की कोशिश की है कि अब पुराने भावनात्मक मुद्दों की मियाद खत्म हो चुकी है। आने वाले महीनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि उत्तर प्रदेश का जागरूक मतदाता विकास और रोजगार के जमीनी सवालों पर अपनी मुहर लगाता है या फिर वैचारिक और ध्रुवीकरण की राजनीति एक बार फिर प्रदेश के जनादेश को नई दिशा देती है।