'5 सीटों पर नहीं, 50 जिलों में हारी BJP': MLC नतीजों पर गदगद अखिलेश का वार, बोले- धूमधाम करने वाले धड़ाम से गिरे

'5 सीटों पर नहीं, 50 जिलों में हारी BJP': MLC नतीजों पर गदगद अखिलेश का वार, बोले- धूमधाम करने वाले धड़ाम से गिरे

उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) की 11 शिक्षक और स्नातक खंड सीटों के चुनावी परिणाम घोषित होने के बाद समाजवादी पार्टी के हौसले सातवें आसमान पर हैं। पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में नवनिर्वाचित विधान परिषद सदस्यों और चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा के लोग केवल सीटों की संख्या देखकर अपनी पीठ थपथपाने का भ्रम न पालें। यह शिक्षक और स्नातक क्षेत्र कई-कई जिलों को मिलाकर बनते हैं; ऐसे में आधिकारिक गिनती में भले ही यह 5 सीटें दिख रही हों, लेकिन असलियत यह है कि भाजपा उत्तर प्रदेश के 50 से अधिक जिलों में सीधे तौर पर चुनाव हार चुकी है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग नतीजों के बाद विजय जुलूस और धूमधाम करने की तैयारी में थे, वे जनता के जनादेश से धड़ाम से नीचे गिर गए हैं।

'सपा जीती जनता के बल से, भाजपा जीती छल से': मतगणना में धांधली का लगाया आरोप

अखिलेश यादव ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों ने यह ऐतिहासिक जीत जनता, शिक्षकों और बेरोजगार युवाओं के अटूट समर्थन के बल पर हासिल की है, जबकि भाजपा ने अपने खाते की 6 सीटें केवल छल-कपट और प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग से निकाली हैं। उन्होंने कहा कि अगर मतगणना में बेईमानी और रातभर अधिकारियों पर दबाव बनाने की साजिशें न रची गई होतीं, तो भाजपा उन छह सीटों पर भी कहीं टिकने वाली नहीं थी। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी को हराने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी झोंक दी गई और बेहद कम अंतर से नतीजे बदले गए। उन्होंने कहा कि रातभर काउंटिंग रोककर और मतदाताओं को परेशान कर सरकार ने अपनी किरकिरी खुद कराई है, जिससे पूरे प्रदेश में यह साफ संदेश चला गया है कि भाजपा निष्पक्ष वोट से नहीं बल्कि खोट से चुनाव जीतना चाहती है।

'वाराणसी में डबल इंजन हुआ डबल जीरो': पीएम के संसदीय क्षेत्र के नतीजों पर कसा तंज

प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के एमएलसी नतीजों को भाजपा की सबसे बड़ी राजनीतिक नाकामी करार दिया। उन्होंने कहा कि जो दल हर मंच से 'डबल इंजन की सरकार' का दंभ भरता था, वाराणसी के जागरूक शिक्षक और स्नातक मतदाताओं ने उसे 'डबल जीरो' थमा दिया है। वाराणसी की दोनों महत्वपूर्ण सीटों—शिक्षक खंड (जहां लाल बिहारी यादव विजयी हुए) और स्नातक खंड (जहां आशुतोष सिन्हा ने 19 हजार से अधिक मतों से बड़ी जीत दर्ज की)—पर सपा ने एकतरफा परचम लहराया है। इसके साथ ही इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर डॉ. मान सिंह यादव की 27 हजार से अधिक मतों की रिकॉर्ड जीत और लखनऊ व आगरा की ऐतिहासिक सफलताओं ने साबित कर दिया है कि भाजपा का तथाकथित अभेद्य दुर्ग अब ढह चुका है।

27 हजार स्कूल बंद, 27 हजार ठेके खुले: 10 साल के शासन पर खोला मोर्चा

अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार के पिछले 10 वर्षों के कामकाज का ब्योरा रखते हुए कहा कि यह जनादेश शिक्षकों, छात्रों और पढ़े-लिखे नौजवानों के आक्रोश का सीधा विस्फोट है। उन्होंने आंकड़ों के साथ आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल में प्रदेश के लगभग 27 हजार प्राथमिक और माध्यमिक सरकारी स्कूलों को बंद करने या मर्ज करने का काम किया, जबकि इसके उलट 27 हजार नई शराब की दुकानें खोलकर राज्य को किस दिशा में धकेला गया, यह सब जानते हैं। उन्होंने कहा कि तीन दर्जन से अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने, आरक्षित पदों की लूट और लाखों रिक्त पदों को न भरे जाने से नाराज बेरोजगार स्नातकों ने वोट की चोट से सरकार को जवाब दिया है। अखिलेश ने यह भी रेखांकित किया कि विधान परिषद चुनाव में महिला शिक्षिकाओं ने शत-प्रतिशत भाजपा के खिलाफ लामबंद होकर मतदान किया है।

'पीडीए का दायरा अब 95 फीसदी': 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए बड़ा ऐलान

सपा प्रमुख ने इस जीत को 2027 के विधानसभा चुनाव की मजबूत प्रस्तावना बताया। उन्होंने कहा कि जब किसी राजनीतिक दल का ग्राफ ऊपर की ओर उठता है, तो वह नीचे नहीं आता; 2027 में सपा गठबंधन रिकॉर्ड बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रहा है। उन्होंने घोषणा की कि आगामी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी भाजपा से कहीं अधिक संख्या में महिलाओं को टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारेगी। साथ ही 26 नवंबर को पार्टी शिक्षकों और शिक्षित बेरोजगारों के अधिकारों के लिए एक विशेष नीतिगत घोषणा पत्र भी जारी करेगी।

गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लखनऊ में दिए गए बयानों और यूसीसी के वादे पर पलटवार करते हुए अखिलेश ने कहा कि 'बड़ी देर कर दी मेहरबां आते-आते'। उन्होंने दो-टूक कहा कि चुनाव में हार और जीत का फैसला नेताओं के लंबे-चौड़े भाषणों से नहीं, बल्कि जनता की अदालत में वोट से तय होता है, और यूपी के प्रबुद्ध वर्ग ने 2027 की सियासी इबारत अभी से लिख दी है।