राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दाखिल हुई चार्जशीट, बिना दिखाए जमा करने पर भड़के वकील; कोर्ट के बाहर प्रदर्शन, कार्य बहिष्कार
अयोध्या में राम जन्मभूमि परिसर स्थित राम मंदिर से दान और चढ़ावा चोरी के बहुचर्चित मामले में जांच एजेंसियों ने अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है। बुधवार सुबह अदालत खुलते ही पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) के विवेचक दो बड़े बक्सों में हजारों पन्नों की चार्जशीट लेकर विशेष अदालत पहुंचे और उसे गोपनीय तरीके से जमा करा दिया। हालांकि, इस प्रक्रिया की भनक लगते ही अयोध्या कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं का आक्रोश फूट पड़ा। वकीलों ने बिना दिखाए और बिना पारदर्शिता के गुपचुप तरीके से चार्जशीट दाखिल करने पर कड़ा एतराज जताते हुए न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर दिया और अदालत कक्ष के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
90 दिन की मियाद पूरी होने पर दाखिल हुई चार्जशीट, डिफॉल्ट बेल पर लगा विराम
इस पूरे मामले में गिरफ्तार किए गए आठ नामजद आरोपियों की 90 दिनों की न्यायिक हिरासत की कानूनी अवधि पूरी हो रही थी। यदि तय समय सीमा के भीतर आरोप पत्र दाखिल नहीं किया जाता, तो आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 167(2) के तहत आरोपियों को स्वतः 'डिफॉल्ट बेल' (वैधानिक जमानत) मिल सकती थी।
एसआईटी के विवेचकों ने विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा की अदालत में चार्जशीट दाखिल की। लगभग 7 हजार से अधिक पन्नों की इस चार्जशीट में आरोपियों के खिलाफ जुटाए गए डिजिटल साक्ष्य, फोरेंसिक ऑडिट और गवाहों के बयानों को शामिल किया गया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हाल ही में कई मुख्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दी थीं।
बिना दिखाए चार्जशीट जमा करने पर वकीलों का हंगामा, बुलाई आपात बैठक
चार्जशीट दाखिल होते ही अयोध्या बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं ने इस पर सवाल खड़े कर दिए। वकीलों का आरोप है कि इतने बड़े और संवेदनशील मामले में चार्जशीट को वकीलों से छिपाकर गुपचुप तरीके से अदालत में क्यों पेश किया गया?
बार एसोसिएशन ने तत्काल आपात बैठक बुलाई और एक प्रस्ताव पारित कर अदालत से अपील की कि चार्जशीट पर औपचारिक संज्ञान लेने से पहले बार अध्यक्ष का पक्ष सुना जाए। अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने अदालत पहुंचकर अपनी मांग रखी, जिस पर कोर्ट ने बार अध्यक्ष को अपनी बात रखने के लिए समय दिया है।
ट्रस्ट के बड़े चेहरों की भूमिका पर वकीलों का सवाल
विरोध प्रदर्शन कर रहे वकीलों ने जांच की निष्पक्षता और दायरे को लेकर भी तीखे सवाल दागे हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि वे यह जानना चाहते हैं कि इस चार्जशीट में सिर्फ छोटे कर्मचारियों और बैंककर्मियों को ही बलि का बकरा बनाया गया है या फिर मंदिर ट्रस्ट के तत्कालीन शीर्ष पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच की गई है।
अधिवक्ता यह मांग कर रहे हैं कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों और प्रबंधन से जुड़े जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ भी स्पष्ट कानूनी जवाबदेही तय होनी चाहिए। बार एसोसिएशन के सदस्यों ने साफ कहा कि जब तक पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता नहीं दिखाई जाती, उनका विरोध जारी रहेगा।
105 बार हुई थी चोरी, 80 लाख कैश हुआ था बरामद
गौरतलब है कि जून के महीने में राम मंदिर के दानपात्रों और काउंटिंग रूम से नकदी गायब होने की शिकायत के बाद हड़कंप मच गया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार और फिर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में एसआईटी का गठन किया गया था।
जांच के दौरान काउंटिंग रूम के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिसमें 105 बार अनधिकृत रूप से नकदी छिपाने और चोरी करने की घटनाएं कैमरे में कैद पाई गईं। आरोपी नोटों की गड्डियों को जेबों, कपड़ों और जूतों में छिपाकर बाहर ले जाते थे। जांच एजेंसियों ने मुख्य आरोपियों के घरों, गुप्त ठिकानों और भूसे के ढेरों से करीब 79.85 लाख रुपये नकद बरामद किए थे। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब अदालत के रुख और वकीलों की आपत्तियों पर कानूनी बहस तेज होने के आसार हैं।