'भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाकर बचाई 3 करोड़ लोगों की जान': UN महासभा में डोनाल्ड ट्रंप का फिर बड़ा दावा

'भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाकर बचाई 3 करोड़ लोगों की जान': UN महासभा में डोनाल्ड ट्रंप का फिर बड़ा दावा

न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें वार्षिक सत्र के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक मंच से एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को लेकर सनसनीखेज दावा किया है। विश्व नेताओं को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनके प्रशासन ने दुनिया भर में आठ बड़े युद्धों को सुलझाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है, जिसमें मई 2025 में हुआ भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव भी शामिल था। ट्रंप ने दावा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने व्यक्तिगत रूप से उनसे कहा था कि अमेरिकी हस्तक्षेप की वजह से कम से कम 3 करोड़ (30 मिलियन) लोगों की जान बची और संभवतः यह आंकड़ा इससे भी कहीं अधिक है। हालांकि, भारत ने हमेशा की तरह अमेरिकी मध्यस्थता के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि सीजफायर दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधी बातचीत से हुआ था।

शहबाज शरीफ ने कहा- आपने 3 करोड़ जानें बचाईं: ट्रंप

संयुक्त राष्ट्र के मंच पर अपने कार्यकाल की कूटनीतिक उपलब्धियों को गिनाते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "जब से मैंने कार्यभार संभाला है, मुझे आठ युद्धों को सुलझाने का सौभाग्य मिला है और इस प्रक्रिया में कई देशों के नेताओं के साथ मेरे बहुत अच्छे संबंध बने हैं। जिन देशों के विवादों को हमने सुलझाया, उनके राष्ट्राध्यक्षों ने मुझे धन्यवाद पत्र भेजे हैं।"

ट्रंप ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का विशेष रूप से जिक्र करते हुए कहा, "पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, जो एक बेहद शानदार इंसान (टेरिफिक मैन) हैं, उन्होंने खुद मुझसे कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने 3 करोड़ लोगों की जान बचाई है, और शायद इससे भी बहुत ज्यादा।" ट्रंप ने आगे दावा किया कि अगर वे समय रहते दखल न देते, तो दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसियों के बीच की यह जंग भीषण रूप ले सकती थी और किसी बड़ी महाविनाशकारी तबाही में तब्दील हो सकती थी।

टैरिफ और व्यापार की धमकी से सुलझाए विवाद

ट्रंप ने बताया कि वे दुनिया भर के बड़े टकरावों को सुलझाने में इसलिए कामयाब रहे क्योंकि उन्होंने अपने व्यक्तिगत संबंधों के साथ-साथ अमेरिकी आर्थिक ताकत का भरपूर इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, "मैंने इन समझौतों को कराने के लिए अपने विशेष संबंधों, व्यापार, कड़े टैरिफ लगाने की शक्तियों और टैरिफ की धमकियों का उपयोग किया।" ट्रंप के मुताबिक, जब दोनों देश युद्ध के मुहाने पर खड़े थे, तब अमेरिकी दबाव और कूटनीतिक बातचीत की 'लंबी रात' के बाद सीजफायर पर सहमति बनी थी।

बता दें कि यह पहला मौका नहीं है जब ट्रंप ने यह दावा किया हो। इससे पहले भी वे कई मौकों पर कह चुके हैं कि मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में जब भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था, तब दोनों देशों के 11 लड़ाकू विमान गिरे थे और स्थिति परमाणु युद्ध तक पहुंचने वाली थी, जिसे उन्होंने रुकवाया।

भारत का दो टूक जवाब: तीसरे पक्ष की कोई मध्यस्थता नहीं थी

डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे पर भारत का रुख पहले दिन से बिल्कुल स्पष्ट और अडिग रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय और सैन्य नेतृत्व ने लगातार यह साफ किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम (सीजफायर) किसी तीसरे देश या अमेरिका की मध्यस्थता से नहीं हुआ था।

नई दिल्ली का आधिकारिक स्टैंड रहा है कि:

  • सीधी सैन्य बातचीत: 10 मई 2025 को दोनों देशों के बीच गोलीबारी और तनाव रोकने का फैसला भारत और पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMOs) के बीच सीधी हॉटलाइन बातचीत के बाद तय हुआ था।

  • द्विपक्षीय मुद्दा: शिमला समझौते और लाहौर घोषणापत्र के तहत भारत का यह बुनियादी सिद्धांत रहा है कि पाकिस्तान के साथ आतंकवाद, सीमा और जम्मू-कश्मीर से जुड़े सभी मुद्दे पूरी तरह से 'द्विपक्षीय' (Bilateral) हैं और इसमें किसी भी तीसरे पक्ष के दखल या पंचायती की कोई गुंजाइश नहीं है।

  • पाकिस्तान का दोहरा रवैया: दूसरी ओर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सार्वजनिक मंचों पर ट्रंप को 'शांतिदूत' बताते रहे हैं और संघर्ष विराम के लिए उनका आभार जताते रहे हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण किया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप आगामी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों और अपनी घरेलू राजनीति को ध्यान में रखते हुए खुद को एक वैश्विक 'पीसमेकर' के रूप में पेश कर रहे हैं। इसी कड़ी में वे बार-बार 3 करोड़ जानें बचाने और नोबेल शांति पुरस्कार की दावेदारी का जिक्र करते हैं, भले ही जमीनी कूटनीतिक हकीकत इससे काफी अलग हो।