लखनऊ में साधना शृंखला-2026 के शुभारंभ पर बोले सीएम योगी; 2017 से पहले की सरकारों पर साधा निशाना

लखनऊ में साधना शृंखला-2026 के शुभारंभ पर बोले सीएम योगी; 2017 से पहले की सरकारों पर साधा निशाना

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को सुशासन, प्रशासनिक सुधार और क्षमता निर्माण को लेकर दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन 'साधना शृंखला-2026' का भव्य शुभारंभ हुआ। इस ऐतिहासिक सम्मेलन के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत संदेश साझा करते हुए सुशासन की मूल अवधारणा को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी सरकार या प्रशासनिक मशीनरी की वास्तविक सार्थकता केवल फाइलों और नीतियों से तय नहीं होती, बल्कि आम जनमानस के जीवन में आने वाले प्रत्यक्ष सकारात्मक बदलाव से सिद्ध होती है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सुधारों की यात्रा में लोक सेवक सबसे मजबूत कड़ी हैं। जब शासन की नीतियां समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक बिना किसी भेदभाव और भ्रष्टाचार के पहुंचती हैं, तभी लोक कल्याणकारी राज्य की परिकल्पना धरातल पर साकार होती है।

संवेदनशील और उत्तरदायी लोक सेवक ही सुशासन के असली संवाहक: समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में लोक सेवकों की भूमिका पर विशेष बल देते हुए कहा कि आम नागरिक के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों का संवेदनशील होना अनिवार्य शर्त है। एक सक्षम, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासनिक तंत्र ही जन-आकांक्षाओं को पूरा कर सकता है। जब तंत्र के भीतर आम जनता के प्रति करुणा और कर्तव्यनिष्ठा की भावना होती है, तब जनकल्याणकारी योजनाएं मात्र कागजी आंकड़े बनकर नहीं रह जातीं, बल्कि वे गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों के जीवन में उम्मीद की नई किरण बनकर उभरती हैं। अंत्योदय के इस संकल्प को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने आह्वान किया कि प्रशासनिक मशीनरी को प्रक्रिया से आगे बढ़कर परिणाम-उन्मुख (रिजल्ट ओरिएंटेड) कार्यसंस्कृति अपनानी होगी, जिससे हर जरूरतमंद व्यक्ति को समयबद्ध तरीके से न्याय और सहायता मिल सके।

2017 से पहले की बीमार मानसिकता ने बर्बाद की कार्यसंस्कृति: परिवारवाद और भ्रष्टाचार पर तीखा हमला

विगत वर्षों के बदलावों की तुलना करते हुए मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की व्यवस्था पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि 2017 से पूर्व उत्तर प्रदेश में शासन करने वाली सरकारों की संकीर्ण और बीमार मानसिकता ने प्रदेश की प्रशासनिक साख को गहरी चोट पहुंचाई थी। उस दौर में परिवारवाद, तुष्टीकरण और नीतिगत अनिर्णय को प्राथमिकता दी गई, जिसने राज्य के प्रशासनिक ढांचे, कार्यकुशलता और कार्य-संस्कृति को गंभीर रूप से खोखला कर दिया था। अपराध, संगठित माफियाराज और नीतिगत उदासीनता के चलते प्रदेश गंभीर पहचान के संकट से जूझ रहा था और उत्तर प्रदेश की असीम संभावनाओं पर ग्रहण लग चुका था। योग्य अधिकारियों का मनोबल गिरा हुआ था और विकास परियोजनाएं राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में ठप पड़ी थीं, जिससे पूरा प्रदेश एक बीमारू राज्य की छवि में बंधकर रह गया था।

'बॉटलनेक से ब्रेकथ्रू' स्टेट बना उत्तर प्रदेश: मिशन कर्मयोगी से प्रशासनिक तंत्र में आया ऐतिहासिक मोड़

मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार ने प्रदेश की इस नकारात्मक पहचान को पूरी तरह बदल दिया है। उत्तर प्रदेश ने पिछले साढ़े नौ वर्षों के दौरान अपनी बीमारू छवि को समाप्त कर 'बॉटलनेक से ब्रेकथ्रू' स्टेट बनने की एक अविश्वसनीय और ऐतिहासिक यात्रा तय की है। केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई 'मिशन कर्मयोगी' जैसी क्रांतिकारी पहल ने सिविल सेवा की कार्यसंस्कृति को आधुनिक, तकनीकी रूप से दक्ष और नागरिक-केंद्रित बनाने में युगांतरकारी भूमिका निभाई है। उत्तर प्रदेश ने अपने प्रशासनिक, वित्तीय और संस्थागत ढांचे को नए सिरे से री-डिफाइन किया है, जिससे प्रदेश आज ई-गवर्नेंस, कानून व्यवस्था, औद्योगिक निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हो चुका है।

लखनऊ में 8 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों का महामंथन: 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस' का संकल्प

लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन साधना शृंखला-2026 में प्रशासनिक नवाचारों और क्षमता निर्माण पर वृहद चर्चा हो रही है। इस कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ केंद्रीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। सम्मेलन में देश के 8 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ नीति-निर्माता, प्रशासनिक अधिकारी और विशेषज्ञ एक मंच पर एकत्रित होकर प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने के तौर-तरीकों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस' के सिद्धांत को अपनाते हुए उत्तर प्रदेश विकसित भारत के निर्माण में इंजन की तरह काम कर रहा है। सम्मेलन में भाग ले रहे सभी प्रतिनिधियों को शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण के यह आधुनिक प्रयास देश के प्रशासनिक ढांचे को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में मील का पत्थर साबित होंगे।