मुलायम के करीबी रहे पूर्व मंत्री भगवती सिंह के परिवार को खाली करना होगा बंगला: नगर निगम ने जारी किया अंतिम नोटिस

मुलायम के करीबी रहे पूर्व मंत्री भगवती सिंह के परिवार को खाली करना होगा बंगला: नगर निगम ने जारी किया अंतिम नोटिस

समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शुमार और धरतीपुत्र मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी सिपहसालार रहे पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय भगवती सिंह के परिवार पर लखनऊ नगर निगम ने बड़ा प्रशासनिक चाबुक चलाया है। लखनऊ की पॉश रिवर बैंक कॉलोनी स्थित नगर निगम के सरकारी बंगले का आवंटन निरस्त करने के बाद अब निगम प्रशासन ने परिवार को मकान खाली करने का अंतिम नोटिस जारी कर दिया है। नगर निगम ने साफ चेतावनी दी है कि तय समय-सीमा के भीतर यदि बंगला खाली कर उसकी चाबी प्रशासन को नहीं सौंपी गई, तो आवास में रह रहे लोगों को 'अवैध कब्जेदार' मानते हुए कानूनी प्रक्रिया के तहत जबरन बेदखली की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

रिवर बैंक कॉलोनी स्थित D-2/2 आवास का आवंटन रद्द, 14 सितंबर को हुआ था आदेश

नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, रिवर बैंक कॉलोनी में स्थित आवास संख्या डी-2/2 का आवंटन पूर्व मंत्री भगवती सिंह और राकेश कुमार सिंह के नाम पर दर्ज था। दोनों ही मूल आवंटियों के निधन के बाद भी इस सरकारी आवास पर परिजनों का कब्जा लगातार बना हुआ था। मामले की विस्तृत समीक्षा और पड़ताल के बाद नगर आयुक्त गौरव कुमार ने 14 सितंबर को ही इस बंगले का आवंटन निरस्त करने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया था।

अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई 26 जून 1978 के शासनादेश और आवंटन की मूल शर्तों के प्रावधानों के तहत की गई है। नगर निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड में मूल आवंटियों के देहावसान के बाद परिवार के सदस्यों द्वारा इस सरकारी आवास पर कब्जा बनाए रखने का कोई वैध कानूनी आधार नहीं पाया गया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वर्तमान में उस आवास में परिवार का एक सदस्य निवास कर रहा है, जो स्वयं सेक्शन ऑफिसर के पद पर कार्यरत है।

7 दिन की अंतिम मोहलत: नहीं छोड़ा तो चलेगा बेदखली का डंडा

मुख्य कर निर्धारण अधिकारी (रेंट) की ओर से जारी सार्वजनिक सूचना और अंतिम नोटिस में आवास में रह रहे सभी लोगों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे एक सप्ताह (7 दिन) के भीतर भवन को पूरी तरह खाली कर उसका कब्जा नगर निगम को सौंप दें।

अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि नोटिस की मियाद समाप्त होने के बाद किसी भी तरह की मोहलत या रियायत नहीं दी जाएगी। यदि निर्धारित अवधि में आवास खाली नहीं किया गया, तो उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम-1959 के सुसंगत प्रावधानों के तहत विधिक कार्रवाई करते हुए आवास को सील व खाली कराया जाएगा। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि यह कदम सार्वजनिक संपत्तियों और सरकारी आवासों पर अनधिकृत कब्जों को हटाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा है।

कौन थे भगवती सिंह: समाजवाद के प्रखर स्तंभ और मुलायम सिंह के संकटमोचक

स्वर्गीय भगवती सिंह उत्तर प्रदेश की राजनीति में सादगी, शुचिता और समाजवादी विचारधारा के मजबूत स्तंभ माने जाते थे। वे मुलायम सिंह यादव के सबसे भरोसेमंद और शुरुआती दौर के साथियों में से एक थे। 1992 में जब समाजवादी पार्टी की स्थापना हुई थी, तब वे उसके संस्थापक सदस्यों में अग्रणी रहे। उत्तर प्रदेश सरकार में वे कैबिनेट मंत्री और विधान परिषद सदस्य (MLC) जैसे अहम पदों पर रहे। अपनी बेबाकी और कार्यकर्ताओं के बीच जमीनी पकड़ के लिए पहचाने जाने वाले भगवती सिंह का निधन अप्रैल 2021 में 89 वर्ष की आयु में हुआ था। उनके निधन के बाद अब उनके लखनऊ स्थित आवास को लेकर नगर निगम की इस कार्रवाई से राजधानी के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।