कानपुर की सीमाओं पर बनेंगे 5 भव्य एंट्री गेट, 24 करोड़ से संवरेगा हर रूट; दिखेगी 1857 की क्रांति

कानपुर की सीमाओं पर बनेंगे 5 भव्य एंट्री गेट, 24 करोड़ से संवरेगा हर रूट; दिखेगी 1857 की क्रांति

औद्योगिक नगरी और स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक गवाह रही कानपुर नगरी में प्रवेश करने वाले आगंतुकों को अब सीमा पर पहुंचते ही शहर के समृद्ध इतिहास, वास्तुकला और आधुनिक प्रगति का भव्य दीदार होगा। उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और सांस्कृतिक केंद्र कानपुर के पांचों प्रमुख बॉर्डर मार्गों पर नगर निगम द्वारा 24 करोड़ रुपये की लागत से भव्य और नक्काशीदार 'गेट-वे' (प्रवेश द्वार) तैयार करने की कार्ययोजना को अंतिम रूप दे दिया गया है। प्रयागराज, इटावा (आगरा), हमीरपुर, जीटी रोड (अलीगढ़ मार्ग) और गंगा बैराज (लखनऊ-सीतापुर रूट) से शहर में दाखिल होने वाले लोगों का स्वागत अलग-अलग थीम पर आधारित कलाकृतियों और स्थापत्य कला के जरिए किया जाएगा। किसी मार्ग पर 'मैनचेस्टर ऑफ द ईस्ट' कहलाने वाले कानपुर की कपड़ा और लेदर इंडस्ट्री की गाथा दिखेगी, तो कहीं 1857 के गदर के नायक नाना साहेब पेशवा और बिठूर के स्वतंत्रता संग्राम की अमर गाथा सजीव होगी।

कानपुर नगर निगम ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली है और टेंडर प्रक्रिया को भी गति दे दी गई है। वर्तमान में शहर में जाजमऊ गंगा पुल के पास केवल एक भव्य गेट मौजूद है, जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की प्रेरणा से केडीए ने 13 करोड़ की लागत से बनवाया था। अब शासन के निर्देश पर नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय की देखरेख में शहर की सभी मुख्य दिशाओं को दर्शनीय और आकर्षक प्रवेश द्वारों से सुसज्जित किया जा रहा है।

रूमा और भौंती गेट-वे पर दिखेगी उद्योग व पौराणिक पहचान

प्रयागराज और वाराणसी से कानपुर को जोड़ने वाले हाईवे पर स्थित रूमा एंट्री गेट को काशी की पावन वास्तुकला और कानपुर के विनिर्माण क्षेत्र के अनूठे संगम के रूप में विकसित किया जाएगा। इस गेट-वे के दोनों तरफ 30 मीटर लंबी दीवार का निर्माण होगा, जिस पर टेक्सटाइल, मैन्युफैक्चरिंग और विश्व प्रसिद्ध लेदर इंडस्ट्री की छाप दिखेगी। डिवाइडर के दोनों ओर 10-10 मीटर की सड़क के किनारों पर मनमोहक लैंडस्केपिंग और औषधीय पौधे लगाए जाएंगे।

वहीं इटावा-आगरा हाईवे पर बनने वाला भौंती गेट-वे सांस्कृतिक, पौराणिक और धार्मिक दरबार का स्वरूप लिए होगा। ब्रज भूमि, मथुरा और वृंदावन के जुड़ाव को दर्शाते हुए इस गेट पर भगवान श्रीकृष्ण के मोर पंख की नक्काशी उभारी जाएगी। अर्धचंद्राकार आकार में बनने वाले इस विशाल गेट के बाईं तरफ कानपुर के ऐतिहासिक संस्थापक 'राजा हिंदू सिंह द्वार' का नाम अंकित होगा, जबकि गेट के शीर्ष पर गर्व के साथ 'कानपुर-मैनचेस्टर ऑफ ईस्ट' लिखा जाएगा, जो औद्योगिक व सांस्कृतिक विरासत का अनूठा मेल कराएगा।

हमीरपुर रोड पर 1857 की क्रांति और नाना साहेब का शौर्य

बुंदेलखंड की तरफ से आने वाले मार्ग पर बनने वाला हमीरपुर रोड गेट-वे पूरी तरह से प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की क्रांति और क्रांतिवीर नाना साहेब पेशवा के बलिदान को समर्पित किया गया है। 34.5 मीटर चौड़े इस विशाल प्रवेश द्वार में छह मीटर ऊंची वास्तुकला से सजी दीवारें बनाई जाएंगी।

इसके 23 मीटर के मुख्य सेंट्रल पैनल में नाना साहेब पेशवा की शौर्य गाथा और स्वतंत्रता संग्राम के अन्य महानायकों के चित्र उकेरे जाएंगे। सात मीटर चौड़े पहले पैनल पर कानपुर की ऐतिहासिक पहचान और उसके संघर्षशील अतीत को दर्शाया जाएगा, जिससे इस रूट से शहर में प्रवेश करते ही लोगों के भीतर राष्ट्रभक्ति और आजादी के संघर्ष की यादें ताजा हो सकें।

गंगा बैराज पर 'सिटी ऑफ गंगा' और नारामऊ में दिखेगा हाईटेक कानपुर

सीतापुर और लखनऊ मार्ग से गंगा बैराज होकर शहर में दाखिल होने वाले वाहनों के लिए गंगा बैराज वेलकम एंट्री गेट का निर्माण किया जाएगा। यह प्रवेश द्वार मां गंगा और कानपुर के आध्यात्मिक संबंध को झलकाएगा। इस गेट की दीवारें गंगा की चंचल लहरों की तरंगों जैसी डिजाइन में ढाली जाएंगी और द्वार पर बड़े अक्षरों में 'सिटी ऑफ गंगा' अंकित होगा। इसके साथ ही बिठूर के पावन घाटों और महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि की बारीक नक्काशी भी दर्शकों को आकर्षित करेगी।

दूसरी ओर जीटी रोड पर बनने वाला नारामऊ गेट शहर के आधुनिक, शैक्षिक और तकनीकी विकास को समर्पित होगा। इसमें देश के शीर्ष तकनीकी संस्थान आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur), डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, आधुनिक शोध केंद्रों और स्मार्ट सिटी की पहलों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। यह गेट कानपुर के पारंपरिक उद्योगों से आगे बढ़कर रक्षा नवाचार, विज्ञान और आधुनिक तकनीकी शक्ति के रूप में तेजी से उभरते चेहरे को बयां करेगा।

शहर की ब्रांडिंग और पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

इस बहुप्रतीक्षित परियोजना के जरिए प्रशासन का मुख्य उद्देश्य बाहर से आने वाले पर्यटकों, व्यापारियों और दैनिक यात्रियों को शहर में प्रवेश करते ही एक सुखद, सकारात्मक और विशिष्ट अहसास कराना है। अगले महीने तक निर्माण एजेंसियों को वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद युद्धस्तर पर काम शुरू किया जाएगा।

इन पांचों भव्य प्रवेश द्वारों के निर्माण से न केवल कानपुर की सीमाओं का सौंदर्यीकरण होगा, बल्कि ऐतिहासिक बिठूर और कानपुर के गौरवशाली अतीत को राष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान भी मिलेगी। हर दिशा से आने वाले यात्री कानपुर की इस बदली हुई, स्वच्छ और सांस्कृतिक छवि को अपने जेहन में संजोकर ले जाएंगे।