प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचा बेबस परिवार: लापता बेटे प्रिंस की तस्वीर थामे रोती मां ने लगाई वापसी की गुहार
वृंदावन स्थित पूज्य संत प्रेमानंद महाराज के श्री राधा केली कुंज आश्रम में रोजाना देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु अपनी मानसिक शांति, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और जीवन की उलझनों के समाधान के लिए पहुंचते हैं। लेकिन हाल ही में आश्रम के बाहर का माहौल उस वक्त बेहद गमगीन और भावुक हो गया, जब उत्तर प्रदेश के मेरठ से आया एक बेबस परिवार आश्रम के द्वार पर हाथ में एक युवक की तस्वीर लिए खड़ा दिखाई दिया। लापता बेटे प्रिंस की तस्वीर सीने से लगाए उसकी मां आश्रम परिसर के बाहर रोते-बिलखते हुए बस एक ही गुहार लगाती रही—"महाराज जी, मेरे बेटे को वापस बुला दीजिए, वह जहां भी हो उसे सद्बुद्धि दीजिए।"
इस मार्मिक दृश्य ने वहां मौजूद सैकड़ों श्रद्धालुओं और आश्रम के सेवादारों को झकझोर कर रख दिया। बेटे के वियोग में बदहवास मां के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे, वहीं लाचार पिता हाथ जोड़े महाराज जी के एकांतिक वार्तालाप और दर्शन के इंतजार में पथराई आंखों से टक टकी लगाए खड़े थे।
क्या है पूरा मामला? महीनों से लापता है मेरठ का प्रिंस
पीड़ित परिवार मेरठ जनपद का रहने वाला है। परिजनों के अनुसार, उनका बेटा प्रिंस कई महीने पहले बिना किसी को कुछ बताए अचानक घर से लापता हो गया था। काफी खोजबीन करने, रिश्तेदारों के यहां तलाशने और स्थानीय पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने के बावजूद जब उसका कोई सुराग नहीं मिला, तो परिवार अंदर से टूट गया।
परिजनों ने बताया कि प्रिंस घर छोड़ने से पहले धार्मिक स्वभाव का था और अक्सर संतों के प्रवचन और भजन सुना करता था। उसे वृंदावन और संतों के सानिध्य में जाने का गहरा आकर्षण था। इसी बात को ध्यान में रखते हुए परिवार को आशंका है कि शायद प्रिंस गृहस्थ जीवन से विरक्त होकर या किसी उलझन के चलते साधु वेश में वृंदावन या मथुरा के किसी आश्रम या घाटों के आसपास रह रहा है।
आश्रम के बाहर रोती मां: 'महाराज जी, एक बार अपने मंच से प्रिंस का नाम ले दीजिए'
प्रिंस की मां ने रोते हुए बताया कि वे कई दिनों से मथुरा और वृंदावन के गली-कूचों, मंदिरों और धर्मशालाओं में बेटे की तस्वीर दिखाकर उसे ढूंढ रहे हैं, लेकिन कोई अता-पता नहीं चल पा रहा। थक-हारकर जब सारे सांसारिक रास्ते बंद नजर आए, तो वे प्रेमानंद महाराज की शरण में पहुंचे।
मां का कहना था कि देश-विदेश के लाखों युवा प्रेमानंद महाराज के एक-एक वचन को ब्रह्मवाक्य मानते हैं। उनका मानना है कि यदि महाराज जी अपने प्रवचन के दौरान केवल एक बार प्रिंस का नाम ले लें या उसे घर लौटने का संदेश दे दें, तो उनका बेटा जहां कहीं भी होगा, वह महाराज जी की आज्ञा मानकर अपनी मां के आंचल में लौट आएगा। उन्होंने हाथ जोड़कर कहा—"एक मां का कलेजा फट रहा है, अब सिर्फ राधा रानी और महाराज जी की कृपा ही मेरे बच्चे को मुझसे मिला सकती है।"
प्रेमानंद महाराज का रुख: माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ी भक्ति
प्रेमानंद महाराज अपने एकांतिक वार्तालाप में अक्सर उन युवाओं को कड़ी फटकार लगाते हैं जो अपने जीवित माता-पिता को रोता-बिलखता छोड़कर संन्यास या वैराग्य के नाम पर घर से भागकर वृंदावन आ जाते हैं। महाराज जी कई बार स्पष्ट शब्दों में कह चुके हैं:
"जो व्यक्ति अपने जन्मदाता माता-पिता को तड़पता हुआ छोड़कर भगवान को पाने का दावा करता है, उसे कभी ईश्वर की प्राप्ति नहीं हो सकती। माता-पिता के आंसुओं पर खड़ी की गई भक्ति कभी फलदायी नहीं होती। यदि संन्यास लेना ही है, तो माता-पिता की आज्ञा और उनके भरण-पोषण की व्यवस्था करके लो, उन्हें अनाथ छोड़कर नहीं।"
आश्रम के सेवादारों ने मेरठ से आए इस पीड़ित परिवार की पीड़ा को संज्ञान में लिया और उन्हें धैर्य बंधाया। सेवादारों ने परिवार से प्रिंस की पूरी जानकारी और फोटो लेकर आश्रम से जुड़े नेटवर्क और स्थानीय संपर्कों में साझा करने का आश्वासन दिया, ताकि यदि वह परिक्रमा मार्ग या किसी साधु सेवा दल के संपर्क में हो, तो उसकी पहचान की जा सके।
सोशल मीडिया पर भी तस्वीर वायरल, लोगों से मदद की अपील
आश्रम के बाहर प्रिंस की मां की इस करुण पुकार का वीडियो और फोटो वहां मौजूद श्रद्धालुओं ने भी अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया, जो अब ब्रज क्षेत्र के सोशल मीडिया ग्रुप्स और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया जा रहा है। स्थानीय लोग और श्रद्धालु भी प्रिंस की तस्वीर को शेयर करते हुए अपील कर रहे हैं कि यदि कोई भी इस युवक को देखे, तो तुरंत उसके लाचार माता-पिता या स्थानीय पुलिस को सूचना दे।
पुत्र वियोग में दर-दर भटक रहे इस परिवार की आस अब राधा रानी की कृपा और संत प्रेमानंद महाराज के आशीर्वाद पर टिकी है।