यूपी चुनाव से पहले रामविलास पासवान की पुण्यतिथि पर लखनऊ में लोजपा का शक्ति प्रदर्शन, चिराग के न्योते पर पहुंचे सीएम योगी
उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है और इसी क्रम में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने राजधानी लखनऊ में एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया है। पार्टी के संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय रामविलास पासवान की पुण्यतिथि के अवसर पर लखनऊ के सुल्तानपुर रोड स्थित दयाल बाग इन इको रिसॉर्ट में भव्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान के विशेष निमंत्रण पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वर्गीय रामविलास पासवान के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और वंचितों के उत्थान में उनके योगदान को याद किया। राजनीतिक गलियारों में इस आयोजन को केवल एक रस्मी श्रद्धांजलि सभा के रूप में नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में लोजपा (रामविलास) के संगठनात्मक विस्तार और चुनावी दखल के बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
सीएम योगी ने सराहा चिराग का प्रयास, संसद के दिनों को किया याद
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लगभग पांच दशक पहले भारतीय राजनीति के पटल पर एक युवा नेता के रूप में रामविलास पासवान का उदय हुआ था। उन्होंने सदैव शोषित, वंचित और गरीब तबके की आवाज को प्रमुखता से देश की सबसे बड़ी पंचायत तक पहुंचाया। सीएम योगी ने संसद में रामविलास पासवान के साथ लंबे समय तक काम करने के अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि उनके मन में भारत की परंपरा और संस्कृति के प्रति अगाध निष्ठा थी। मुख्यमंत्री ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सुपुत्र चिराग पासवान अपने पिता के उसी मिशन और सामाजिक चेतना को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। चिराग पासवान ने भी मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि सीएम योगी की मौजूदगी यह दर्शाती है कि उनके पिता के साथ मुख्यमंत्री का रिश्ता केवल सार्वजनिक जीवन तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें गहरा आत्मीय और व्यक्तिगत सम्मान जुड़ा था।
पासी और दलित वोट बैंक को लामबंद करने की सियासी रणनीति
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार के बाहर लखनऊ में इतना बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने के पीछे लोजपा की गहरी चुनावी रणनीति काम कर रही है। उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति में पासी समाज एक अत्यंत प्रभावशाली और निर्णायक वोट बैंक माना जाता है, जो अवध और पूर्वांचल की दर्जनों सीटों पर सीधे नतीजे तय करता है। इससे पहले 5 जुलाई को पार्टी ने लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान (IGP) में रामविलास पासवान की जयंती का भव्य कार्यक्रम किया था। इसके बाद प्रयागराज और पटना में 'यूथ बोले तो' संवाद कार्यक्रमों के जरिए युवाओं, शिक्षा, रोजगार और आरक्षण के मुद्दों को उठाकर पार्टी ने प्रदेश के युवाओं को साधने की शुरुआत की थी। अब राजधानी लखनऊ में पुण्यतिथि का यह आयोजन पासी समाज और दलित वर्ग के बीच चिराग पासवान को एक सर्वमान्य विकल्प के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक सोचा-समझा कदम है।
403 सीटों पर तैयारी और एनडीए गठबंधन के बीच संतुलन साधते चिराग
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान पहले ही यह सार्वजनिक ऐलान कर चुके हैं कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर संगठन को मजबूत कर रही है। पार्टी ने सभी प्रमुख जिलों में प्रभारियों की तैनाती कर बूथ स्तर पर कैडर खड़ा करना शुरू कर दिया है। हालांकि एनडीए में सीट शेयरिंग के सवाल पर अभी औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है, लेकिन लोजपा नेताओं का स्पष्ट कहना है कि यदि झारखंड, बिहार और दिल्ली में एनडीए के साथ मिलकर चुनाव लड़ा जा सकता है, तो उत्तर प्रदेश में भी सम्मानजनक साझेदारी मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस कार्यक्रम में उपस्थिति ने यह संकेत दे दिया है कि एनडीए गठबंधन में चिराग पासवान की स्थिति बेहद मजबूत है। चिराग जहां एक तरफ एनडीए के घटक दल के रूप में अपनी अहमियत दर्ज करा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ 403 सीटों पर जमीनी तैयारी दिखाकर वे भविष्य में बीजेपी पर सीटों के लिए बेहतर मोलभाव का सियासी दबाव भी बना रहे हैं।