लखनऊ नगर निगम में लापरवाही पर बड़ा प्रशासनिक चाबुक: जीएम जलकल और चीफ इंजीनियर समेत 6 आला अफसरों को नोटिस

लखनऊ नगर निगम में लापरवाही पर बड़ा प्रशासनिक चाबुक: जीएम जलकल और चीफ इंजीनियर समेत 6 आला अफसरों को नोटिस

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुनियादी विकास और नागरिक सुविधाओं से जुड़ी सरकारी परियोजनाओं में लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर नगर निगम प्रशासन ने कड़ा शिकंजा कस दिया है। 15वें वित्त आयोग, अमृत योजना 2.0, अवस्थापना निधि, वायु गुणवत्ता सुधार और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट जैसी अहम योजनाओं की प्रगति लक्ष्य से काफी पीछे पाए जाने पर नगर आयुक्त ने कड़ा प्रशासनिक रुख अपनाया है। कार्यों में देरी और हीलाहवाली को लेकर जलकल विभाग के महाप्रबंधक (जीएम), मुख्य अभियंता (विद्युत) और कई सहायक अभियंताओं सहित 6 प्रमुख अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस थमाया गया है। नगर आयुक्त ने सभी संबंधित अधिकारियों को 7 दिन के भीतर स्पष्टीकरण दाखिल करने का अल्टीमेटम दिया है और दो टूक चेतावनी दी है कि जवाब संतोषजनक न होने पर शासन को सीधे अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति भेजी जाएगी।

समीक्षा बैठक में खुली पोल, बार-बार निर्देश के बाद भी नहीं सुधरी चाल

19 सितंबर को नगर निगम की विभिन्न विकास परियोजनाओं की प्रगति को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में जब फाइलों और धरातल की वास्तविक प्रगति का मिलान किया गया, तो कई चौंकाने वाली खामियां उजागर हुईं। वित्तीय वर्ष के कई महीने बीत जाने के बावजूद कई अहम योजनाओं में भौतिक और वित्तीय प्रगति बेहद सुस्त पाई गई। बार-बार चेतावनी और दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बाद भी संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली में कोई सुधार नहीं दिखा। इसके बाद 26 सितंबर को कड़ा संज्ञान लेते हुए लापरवाह अधिकारियों की सूची तैयार कर नोटिस जारी करने की औपचारिक कार्रवाई अमल में लाई गई।

किस अधिकारी पर क्या आरोप: खरीद से लेकर झील सौंदर्यीकरण तक अटके काम

समीक्षा के दौरान सामने आई लापरवाहियों के आधार पर अलग-अलग विभागों के अफसरों की जवाबदेही तय की गई है:

  • मनोज कुमार प्रभात (मुख्य अभियंता, विद्युत): इनके जिम्मे सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत कूड़ा निस्तारण के लिए ट्रैक्टर, रोड रोलर और एक्सीवेटर जैसे जरूरी भारी वाहनों की खरीद का काम था। इसके अलावा शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए तय स्थानों पर वाटर फाउंटेन लगाए जाने थे, लेकिन इन दोनों ही प्राथमिकताओं में प्रगति बेहद असंतोषजनक मिली।

  • कुलदीप सिंह (महाप्रबंधक, जलकल): शहर में 15वें वित्त आयोग की ग्रांट के तहत शुद्ध पेयजल आपूर्ति और नए नलकूपों (ट्यूबवेल) के निर्माण का दायित्व जलकल जीएम के पास था। समीक्षा में पाया गया कि योजनाओं में न तो भौतिक प्रगति हुई और न ही तय बजट का सही उपयोग हो सका।

  • संजीव प्रधान (पर्यावरण अभियंता): शहर की स्वच्छता व्यवस्था से जुड़े डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन, मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) स्टेशन, शिवरी सॉलिड वेस्ट प्लांट के संचालन और नए सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण में भारी लापरवाही और शिथिलता पाई गई।

  • शशिकांत (उद्यान अधीक्षक): राजधानी में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए जापानी तकनीक पर आधारित मियावाकी पौधारोपण, प्रमुख पार्कों का सौंदर्यीकरण और वीआईपी इलाके कालिदास चौराहे पर वर्टिकल गार्डन विकसित करने का काम तय समय-सीमा के भीतर पूरा नहीं कराया जा सका।

  • आलोक कुमार श्रीवास्तव (सहायक अभियंता): अमृत योजना 2.0 के तहत शहर के ऐतिहासिक राधा तालाब, प्रेम तालाब और हैबतमऊ झील के कायाकल्प व सौंदर्यीकरण का जिम्मा इनके पास था, जिसमें अत्यधिक विलंब और उदासीनता दर्ज की गई।

  • झिल्लू राम (सहायक अभियंता): कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड से राजधानी के विभिन्न पार्कों में आम जनता के लिए स्थापित होने वाले ओपन जिम और अन्य नागरिक सुविधाओं के क्रियान्वयन में सुस्ती पर इनसे जवाब तलब किया गया है।

7 दिन में मांगा लिखित जवाब, नहीं तो होगी विभागीय जांच

नगर आयुक्त ने स्पष्ट कर दिया है कि जनहित से जुड़ी विकास योजनाओं में लेटलतीफी और बजट की बर्बादी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी छह अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए निर्देशित किया गया है कि वे बिंदुवार अपनी स्थिति स्पष्ट करें कि तय समय पर काम क्यों पूरा नहीं हुआ। यदि 7 कार्यदिवसों के भीतर अधिकारियों की तरफ से दिया गया जवाब तार्किक और संतोषजनक नहीं पाया गया, तो नगर निगम अधिनियम और सिविल सेवा आचरण नियमावली के तहत उनके खिलाफ निलंबन और विभागीय जांच के लिए शासन को संस्तुति भेज दी जाएगी।