शिष्य की संदिग्ध मौत के बाद प्रेमानंद महाराज के आश्रम में बड़ा फैसला, केली कुंज में अब नहीं दी जाएगी गुरु दीक्षा
वृंदावन के विख्यात संत पूज्य प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम 'केली कुंज' से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। आश्रम से जुड़े एक युवा शिष्य की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद प्रबंधन ने आश्रम व्यवस्था और धार्मिक अनुष्ठानों में बड़ा और कड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। केली कुंज आश्रम प्रबंधन द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, आश्रम में दी जाने वाली 'गुरु दीक्षा' और 'मंत्र दीक्षा' की प्रक्रिया को आगामी आदेश तक पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। देश-विदेश से रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु महाराज जी से दीक्षा लेने और उनके दर्शन के लिए वृंदावन पहुंचते हैं, ऐसे में इस अचानक लिए गए फैसले से भक्तों के बीच काफी हलचल मच गई है।
शिष्य की मौत के बाद आश्रम प्रशासन का सख्त कदम
जानकारी के अनुसार, हाल ही में प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़े एक परिकर (शिष्य) का शव आश्रम परिसर या उससे जुड़े क्षेत्र में संदिग्ध हालत में मिलने की घटना सामने आई थी। इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की और आश्रम के सुरक्षा प्रबंधों की भी समीक्षा की गई। हालांकि घटना के पीछे के कारणों को लेकर जांच जारी है, लेकिन इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से आश्रम की मर्यादा, आंतरिक व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे थे। इसी को ध्यान में रखते हुए पूज्य प्रेमानंद महाराज और आश्रम की कोर प्रबंधन समिति ने आंतरिक अनुशासन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई कड़े निर्णय लिए हैं।
केली कुंज में अब नहीं मिलेगी दीक्षा, नए नियमों की रूपरेखा तैयार
आश्रम प्रबंधन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि केली कुंज में अब बाहरी व्यक्तियों को सीधे तौर पर दीक्षा नहीं दी जाएगी। पूर्व में भक्तजन प्रार्थना पत्र देकर और सत्संग में शामिल होकर गुरु दीक्षा प्राप्त करते थे, लेकिन अब इस पूरी प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
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अनिश्चितकाल के लिए रोक: दीक्षा प्रक्रिया को कब से दोबारा शुरू किया जाएगा, इसे लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक समय-सीमा तय नहीं की गई है।
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आश्रम में बाहरी लोगों के प्रवेश पर सख्ती: केली कुंज में रुकने, सेवा देने और परिकर बनने की प्रक्रिया को भी बेहद कड़ा किया जा रहा है। अब बिना पूर्ण सत्यापन और पृष्ठभूमि जांच के किसी भी नए व्यक्ति को आश्रम के आंतरिक कार्यों में शामिल नहीं किया जाएगा।
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सत्संग और दर्शन व्यवस्था: हालांकि महाराज जी के नियमित सत्संग और एकांतिक वार्तालाप के नियमों को लेकर आश्रम प्रबंधन अलग से दिशानिर्देश जारी कर रहा है, ताकि व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चल सकें और अनुशासन भंग न हो।
श्रद्धालुओं और परिकरों के लिए जारी की गई अपील
आश्रम की ओर से देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे दीक्षा के उद्देश्य से फिलहाल वृंदावन की यात्रा करने से बचें और आश्रम के नियमों का सम्मान करें। प्रबंधन का कहना है कि पूज्य महाराज जी का स्वास्थ्य पहले से ही संवेदनशील रहता है और वे नियमित डायलिसिस पर रहते हैं। ऐसे में आश्रम परिसर में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अनुशासनहीनता महाराज जी के स्वास्थ्य और आश्रम के आध्यात्मिक वातावरण को प्रभावित करती है। प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से नाम जप करने और घर पर रहकर ही महाराज जी के विचारों व सत्संग का अनुसरण करने का आग्रह किया है।