नोएडा में दिखावे का GRAP! 9 साल में लगा ₹34 करोड़ का जुर्माना, वसूली मात्र 3%; प्रदूषण फैलाने वाले बेखौफ

नोएडा में दिखावे का GRAP! 9 साल में लगा ₹34 करोड़ का जुर्माना, वसूली मात्र 3%; प्रदूषण फैलाने वाले बेखौफ

दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख औद्योगिक और रिहायशी केंद्र नोएडा में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति से निपटने के लिए लागू किया गया ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) महज कागजों तक सीमित होकर रह गया है। ग्रैप के पहले चरण की कड़ी पाबंदियां लागू होने के बावजूद शहर की आबोहवा में जहरीला धुआं और धूल लगातार घुल रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय विकास प्राधिकरण के अधिकारी हर साल की तरह इस बार भी ताबड़तोड़ चालान और जुर्माना लगाने की रस्म अदायगी तो कर रहे हैं, लेकिन जब बात इस जुर्माने की वास्तविक वसूली की आती है, तो पूरा प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह पंगु साबित हो जाता है। एक चौंकाने वाले खुलासे के मुताबिक, पिछले नौ वर्षों के दौरान नोएडा में प्रदूषण फैलाने वालों पर लगभग ₹34 करोड़ का भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया, मगर इसमें से वसूली मात्र 3 प्रतिशत यानी करीब ₹1 करोड़ ही की जा सकी है। जुर्माने की यह शून्य के बराबर रिकवरी दर्शाती है कि जिम्मेदार विभागों की सुस्ती के चलते शहर में प्रदूषण फैलाने वाले बिल्डर्स, ठेकेदार और फैक्ट्रियां नियमों की धज्जियां उड़ाने में जरा भी नहीं हिचकिचा रहे हैं।

हवा हुई 'खराब' श्रेणी में दर्ज: नोएडा का एक्यूआई पहुंचा 251, ग्रेटर नोएडा भी 219 पर बेहाल

अक्टूबर का महीना आते ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर फिसलने लगी है। बृहस्पतिवार को नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 251 के पार पहुंच गया, जो 'खराब' श्रेणी में आता है, जबकि पड़ोसी औद्योगिक शहर ग्रेटर नोएडा में एक्यूआई 219 दर्ज किया गया। हवा में घुले पीएम 2.5 और पीएम 10 के महीन कण बुजुर्गों, बच्चों और सांस की बीमारियों से पीड़ित मरीजों के फेफड़ों पर सीधा हमला बोल रहे हैं। प्रदूषण के बढ़ते ग्राफ को रोकने के लिए सड़कों पर पानी के छिड़काव, एंटी-स्मॉग गन चलाने और निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के तमाम वादे कागजी साबित हो रहे हैं। जमीन पर हकीकत यह है कि खुले में पड़ी निर्माण सामग्री, अनकवर्ड ट्रांसपोर्टेशन और टूटी सड़कों से उड़ती धूल हवा को जहरीला बना रही है, जबकि संबंधित एजेंसियां फील्ड में उतरकर ठोस कार्रवाई करने के बजाय केवल दिखावे के अभियान चलाने तक सीमित हैं।

RTI में हुआ बड़ा खुलासा: ₹34 करोड़ के जुर्माने पर महज ₹1 करोड़ की रिकवरी, 97% बकाया

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में प्रदूषण नियंत्रण की असल पोल पर्यावरणविद् अमित गुप्ता द्वारा दाखिल की गई सूचना का अधिकार (RTI) याचिका के जवाब से खुली है। आरटीआई से प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों से यह सनसनीखेज सच सामने आया है कि वर्ष 2017 से लेकर 2026 तक के 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) और नोएडा प्राधिकरण ने नियमों का उल्लंघन करने वाली 3,000 से अधिक निर्माण साइटों पर करीब 34 करोड़ रुपये का जुर्माना ठोका था। लेकिन जब इन बकाएदारों से वसूली का रिकॉर्ड खंगाला गया, तो पता चला कि विभाग अब तक सिर्फ 1 करोड़ रुपये ही वसूल कर पाया है। यानी कुल पेनल्टी का लगभग 97 प्रतिशत हिस्सा आज भी हवा में तैर रहा है। वर्ष 2026 में ही जनवरी से अक्टूबर के बीच 120 से अधिक निर्माण स्थलों पर नियमों की अवहेलना करने पर 2.62 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया, लेकिन इसमें से कितने पैसों की वसूली हुई, इसका कोई पुख्ता आंकड़ा या ब्योरा संबंधित विभाग के पास मौजूद ही नहीं है।

केवल नोटिस और चालान तक सीमित कार्रवाई: वसूली का अधिकार न होने का रोना रो रहे अधिकारी

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्राधिकरण के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। जमीनी स्तर पर अधिकारियों की सक्रियता केवल साइट विजिट करने, चालान काटने और कारण बताओ नोटिस जारी करने की फोटो खिंचवाने तक सिमट कर रह गई है। नोटिस तामील होने के बाद जब उल्लंघनकर्ता जुर्माना जमा नहीं करते, तो उनके खिलाफ राजस्व वसूली प्रमाण पत्र (आरसी) जारी करने या बैंक खातों को सीज करने जैसी सख्त कानूनी कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है। जब इस प्रशासनिक विफलता को लेकर जिम्मेदारों से जवाब मांगा जाता है, तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि उनके पास केवल पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत पेनाल्टी लगाने की शक्ति है, जबकि मौके पर वसूली कराने या संपत्तियों को कुर्क करने का सीधा अधिकार उनके पास नहीं है। विभागों के बीच तालमेल की इसी कमी का फायदा उठाकर बड़े रियल एस्टेट डेवलपर्स और खनन माफिया बिना किसी डर के निर्माण कार्य जारी रखते हैं।

अक्टूबर में फिर लगा 65 लाख का जुर्माना: बिना डर के चल रहे हैं अवैध निर्माण और धुआं उगलते प्लांट

हर साल की तरह इस बार भी जैसे ही सर्दियों की शुरुआत में हवा का दम घुटने लगा और ग्रैप-1 प्रभावी हुआ, प्रशासनिक अमला अचानक सक्रिय हो गया। अकेले अक्टूबर माह के शुरुआती हफ्तों में प्रदूषण मानकों की अनदेखी करने वाली साइटों पर करीब 65 लाख रुपये का नया जुर्माना ठोक दिया गया। लेकिन सवाल वही बना हुआ है कि जब पिछले नौ सालों के 33 करोड़ रुपये वसूले नहीं जा सके, तो इस नए 65 लाख की वसूली कैसे सुनिश्चित होगी। जब तक उल्लंघन करने वालों पर आर्थिक चोट नहीं पहुंचेगी और उनकी साइटों को स्थायी रूप से सील नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसे दिखावे के चालानों का कोई असर नहीं पड़ने वाला है। कागजी जुर्माने और नाममात्र की रिकवरी के इस खेल में शहर के लाखों आम नागरिकों को जहरीली हवा में सांस लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे नोएडा और एनसीआर के अस्पतालों में सांस और दमे के मरीजों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है।