मेरठ से प्रयागराज का सफर 6 घंटे में, 12 जिलों की खुली किस्मत

मेरठ से प्रयागराज का सफर 6 घंटे में, 12 जिलों की खुली किस्मत

उत्तर प्रदेश की सड़कों पर आधुनिक गतिशीलता और बुनियादी ढांचे के विकास ने राज्य की आर्थिक गतिविधियों को एक नई और तेज रफ्तार दे दी है। प्रदेश के पश्चिमी छोर को सीधे पूर्वी हिस्से से जोड़ने वाला महत्वाकांक्षी 'गंगा एक्सप्रेसवे' आज न केवल आम मुसाफिरों के सफर को आसान बना रहा है, बल्कि ट्रांसपोर्टरों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों, टूर-ट्रैवल ऑपरेटरों और किसानों के लिए एक जीवनदायिनी आर्थिक गलियारा साबित हो रहा है। मेरठ से शुरू होकर पावन संगम नगरी प्रयागराज तक 594 किलोमीटर की लंबाई में फैला यह 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, जिसे भविष्य की जरूरतों के अनुसार 8-लेन तक विस्तारित किया जा सकता है, लगभग ₹36,230 करोड़ की भारी लागत से तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र को समर्पित किए जाने के बाद से ही इस हाई-स्पीड मार्ग ने पूरे उत्तर भारत में माल ढुलाई और सार्वजनिक आवाजाही के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। यात्रा के समय में 50 प्रतिशत तक की ऐतिहासिक कटौती और वाहनों के ईंधन व रखरखाव के खर्च में भारी कमी के चलते स्थानीय व्यापारिक इकाइयों और परिवहन कंपनियों की परिचालन लागत (ऑपरेटिंग कॉस्ट) काफी घट गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में व्यावसायिक समृद्धि की नई लहर देखने को मिल रही है।

माल ढुलाई में समय और ईंधन की भारी बचत: सहारनपुर से प्रयागराज का 22 घंटे का सफर अब महज 11 घंटे में

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा विकसित गंगा एक्सप्रेसवे राज्य में भारी मालवाहक ट्रकों और कंटेनरों के लिए सबसे पसंदीदा और सुरक्षित मार्ग बन चुका है। पुराने राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगने वाले भीषण जाम, चौराहों के ठहराव और शहर के आंतरिक रास्तों से मुक्ति मिलने के कारण ट्रकों की गति निरंतर बनी रहती है। सहारनपुर के उपकार ट्रांसपोर्ट के संचालक अमित शर्मा का कहना है कि पहले सहारनपुर से कच्चा माल या औद्योगिक उत्पाद लेकर प्रयागराज जाने वाले ट्रकों को 20 से 22 घंटे का थकाऊ समय लगता था, लेकिन अब यह दूरी मात्र 11 से 12 घंटे में पूरी हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक्सप्रेसवे पर नियमित टोल टैक्स चुकाने के बावजूद ईंधन की भारी बचत, टायरों के कम घिसने और वाहनों के इंजन का मेंटेनेंस खर्च घटने से कुल परिचालन लागत में उल्लेखनीय गिरावट आई है। वहीं मेरठ के गुडलक ट्रांसपोर्ट के शिव कुमार यादव के अनुसार, समय पर डिलीवरी होने से बड़े व्यापारियों, विनिर्माताओं और उद्योगपतियों का ट्रांसपोर्टरों पर भरोसा बहुत मजबूत हुआ है। इसके परिणामस्वरूप कृषि उपज, औद्योगिक स्पेयर पार्ट्स, फार्मास्यूटिकल्स और दैनिक उपभोग की वस्तुओं (FMCG) की तेजी से आवाजाही के लिए निरंतर नए व्यावसायिक सौदे मिल रहे हैं।

टूर-ट्रैवल कारोबार में आई ऐतिहासिक छलांग: कार से महज 6 घंटे में मेरठ से प्रयागराज, धार्मिक पर्यटन को पंख

गंगा एक्सप्रेसवे के संचालन ने प्रदेश में अंतर-जिला पर्यटन और ट्रैवल एजेंसियों के कारोबार को एक बड़ा उछाल दिया है। मेरठ से ज्योति टूर एंड ट्रैवल के संचालक मूलक सिंह और सहारनपुर के अमित गुप्ता बताते हैं कि पूर्व में मेरठ से प्रयागराज के लिए निजी कार या वोल्वो बस से यात्रा करने में 10 से 12 घंटे का समय खप जाता था, जिससे लोग लंबी सड़क यात्रा से कतराते थे। अब यह सफर घटकर मात्र 6 घंटे का रह गया है। यात्रा समय में इस चमत्कारी कमी के चलते प्रयागराज में त्रिवेणी संगम स्नान, काशी विश्वनाथ धाम के दर्शन, अयोध्या और आसपास के ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों के लिए वीकेंड टूर, फैमिली पैकेज और टैक्सी व कैब की बुकिंग में अभूतपूर्व उछाल आया है। दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग अब सप्ताहांत में बिना किसी थकावट के अपने निजी वाहनों से धार्मिक यात्राएं पूरी कर रहे हैं, जिससे हाईवे किनारे स्थित होटलों, रेस्तरां, ढाबों और स्थानीय बाजारों में स्थानीय रोजगार और आमदनी कई गुना बढ़ गई है।

12 जिलों की बदली तकदीर: किसानों की उपज को मिली मंडियों की सीधी पहुंच और शाहजहांपुर में एयरस्ट्रिप

गंगा एक्सप्रेसवे राज्य के 12 प्रमुख जिलों—मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज को एक मजबूत आर्थिक माला में पिरोता है। इस एक्सप्रेसवे ने ग्रामीण भारत और कृषि अर्थव्यवस्था को सीधे बड़े शहरी बाजारों से जोड़ दिया है। गंगा के उपजाऊ कछार वाले इन जिलों में पैदा होने वाले ताजे फल, हरी सब्जियां, दूध और जल्दी खराब होने वाले डेयरी उत्पाद अब कुछ ही घंटों के भीतर देश की सबसे बड़ी मंडियों और फूड प्रोसेसिंग इकाइयों तक पहुंच रहे हैं। इससे किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों पर बेचने की मजबूरी से मुक्ति मिली है और उन्हें उनकी मेहनत का वाजिब व बेहतर बाजार मूल्य मिल रहा है। इसके साथ ही सामरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी इस एक्सप्रेसवे का महत्व असाधारण है। शाहजहांपुर में एक्सप्रेसवे पर 3.5 किलोमीटर लंबी एक अत्याधुनिक आपातकालीन हवाई पट्टी (इमरजेंसी एयरस्ट्रिप) का निर्माण किया गया है, जहां भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान सुखोई, मिराज और राफेल जैसे फाइटर जेट्स आपात स्थिति में सीधे लैंड और टेकऑफ कर सकते हैं।

2,635 हेक्टेयर में लॉजिस्टिक्स व मैन्युफैक्चरिंग हब: योगी सरकार के मॉडल से पैदा होंगे लाखों रोजगार

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के विजन के अनुसार, गंगा एक्सप्रेसवे केवल तेज रफ्तार से चलने वाली सड़क भर नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के औद्योगिक कायाकल्प का सबसे बड़ा इंजन है। सरकार के एक्सप्रेसवे-आधारित विकास मॉडल के तहत मार्ग के दोनों किनारों पर लगभग 2,635 हेक्टेयर भूमि पर एक विशाल एकीकृत विनिर्माण एवं लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर (Integrated Manufacturing & Logistics Hub) स्थापित करने का काम तेज गति से चल रहा है। इस कॉरिडोर में वेयरहाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज चेन, टेक्सटाइल पार्क, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट क्लस्टर और आईटी पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। एक्सप्रेसवे के प्रवेश और निकास इंटरचेंज के पास विकसित किए जा रहे इन इंडस्ट्रियल हब्स से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लाखों युवाओं को अपने ही गृह जनपद के समीप सीधे रोजगार और अप्रत्यक्ष स्वरोजगार के बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे, जिससे बड़े शहरों की ओर होने वाले अनियंत्रित पलायन पर भी अंकुश लगेगा।