'कमर कसे INDIA एकजुट है, यही भाजपा का सबसे बड़ा दुख...', दिल्ली में विपक्ष की बैठक के बीच अखिलेश यादव ने कसा तीखा तंज
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विपक्षी 'इंडिया' (I.N.D.I.A.) गठबंधन के शीर्ष नेताओं की अहम रणनीतिक बैठक के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर जोरदार सियासी हमला बोला है। गठबंधन में सीटों के बंटवारे और मतभेदों की उड़ती अफवाहों को पूरी तरह खारिज करते हुए अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तंज कसा कि 'यही भाजपा का सबसे बड़ा दुख है कि कमर कसे INDIA एकजुट है'। सपा प्रमुख के इस एक पंक्ति के तीखे वार ने राजनीतिक गलियारों में उस चर्चा पर भी विराम लगाने की कोशिश की है जिसमें दावा किया जा रहा था कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
बुधवार को दिल्ली में मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं का बड़ा जमावड़ा हुआ, जहां देश के मौजूदा राजनीतिक हालात, चुनावी रणनीतियों और भविष्य के साझा कार्यक्रमों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इस बैठक के समानांतर लखनऊ में सपा प्रत्याशियों के राज्यसभा नामांकन में व्यस्त रहने के बावजूद अखिलेश यादव ने दिल्ली की हलचल पर पूरी नजर रखी और भाजपा की बेचैनी को अपने निशाने पर ले लिया।
'एक छत के नीचे विपक्ष', भाजपा की चिंता पर अखिलेश का सीधा वार
अखिलेश यादव ने अपने बयान के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया कि भाजपा इस बात से घबराई हुई है कि देश भर की प्रमुख विपक्षी ताकतें एक बार फिर राष्ट्रीय राजधानी में एक छत के नीचे मजबूती से खड़ी हो गई हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा की पूरी राजनीतिक रणनीति विपक्ष के बिखराव और मतभेदों पर टिकी रहती है, लेकिन जब-जब विपक्षी दल एकजुट होकर जनहित, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का संकल्प दोहराते हैं, तब-तब सत्ता पक्ष का आत्मविश्वास डगमगाने लगता है।
सपा प्रमुख का मानना है कि भाजपा गठबंधन को कमजोर दिखाने के लिए तरह-तरह के भ्रामक प्रचार और नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रही है। हालांकि, जमीनी सच्चाई यह है कि जनसरोकारों, बेरोजगारी, महंगाई, पेपर लीक और सामाजिक न्याय के मोर्चे पर इंडिया ब्लॉक पूरी तरह लामबंद है और चुनावी बिसात पर सत्ताधारी दल को हर कदम पर कड़ी चुनौती देने के लिए तैयार है।
सीट शेयरिंग की तनातनी और अखिलेश की गैर-मौजूदगी पर सफाई
गौरतलब है कि दिल्ली में आयोजित इस अहम बैठक से पहले राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर थी कि क्या अखिलेश यादव व्यक्तिगत तौर पर इसमें शामिल होंगे। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 और उप-चुनावों को लेकर कांग्रेस द्वारा 150 सीटों के दावे और सपा के कड़े रुख के चलते दोनों दलों के बीच खींचतान की खबरें लगातार आ रही थीं। अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज नथवानी के राज्यसभा नामांकन के व्यस्त कार्यक्रम के चलते खुद दिल्ली जाने के बजाय पार्टी के वरिष्ठ प्रतिनिधियों को बैठक में भेजा था।
विपक्षी खेमे में इस गैर-मौजूदगी को लेकर शुरू हुई कयासबाजियों पर भाजपा नेताओं ने तंज कसना शुरू कर दिया था। इसी पृष्ठभूमि में अखिलेश यादव का 'कमर कसे INDIA एकजुट है' वाला बयान सामने आया, जिसने यह साफ कर दिया कि भौतिक रूप से मौजूद न होने के बावजूद सपा गठबंधन की रीढ़ बनी हुई है और दोनों दलों के बीच का रणनीतिक तालमेल पूरी तरह अटूट है।
यूपी की सियासत में हलचल, बृजभूषण के बयान के बाद अखिलेश का दांव
अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब कुछ ही घंटे पहले भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी कांग्रेस की 150 सीटों की मांग पर चुटकी लेते हुए कहा था कि 'अखिलेश के बिना सब सूना है'। भाजपा के अंदरूनी खेमों से लेकर विरोधी दलों तक अखिलेश के बढ़ते सियासी कद को स्वीकार किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव एक सधी हुई रणनीति के तहत काम कर रहे हैं। वे एक तरफ उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की अगुवाई में 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के सामाजिक समीकरण को मजबूत बनाए रखना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन के बैनर तले भाजपा विरोधी ताकतों को बिखरने नहीं देना चाहते। उनका यह ट्वीट भाजपा के उस नैरेटिव को काटने की कोशिश है जिसमें विपक्ष की एकता को कागजी करार दिया जा रहा था।
आगामी रणनीति: देश भर में साझा रैलियों का खाका
दिल्ली में हुई इंडिया ब्लॉक की बैठक में सिर्फ बातचीत नहीं हुई, बल्कि आने वाले दो महीनों के भीतर देश के विभिन्न राज्यों में पांच बड़ी संयुक्त रैलियां आयोजित करने और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रपति से मुलाकात करने का भी बड़ा खाका तैयार किया गया है।
सपा नेताओं का कहना है कि संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष का यह साझा अभियान भाजपा की जनविरोधी नीतियों को बेनकाब करेगा। अखिलेश यादव के इस आक्रामक रुख ने साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक, 2027 और उसके आगे की सियासी लड़ाई में इंडिया गठबंधन पूरी मजबूती के साथ अपनी जमीन तैयार कर चुका है।