मध्यावधि चुनाव से ऐन पहले डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा यू-टर्न: कनाडा के सामान पर इंपोर्ट टैक्स घटाया
संयुक्त राज्य अमेरिका में तीन नवंबर को होने वाले बेहद कड़े और निर्णायक मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) से ठीक दो हफ्ते पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी आक्रामक व्यापारिक नीतियों में अचानक एक बड़ा रणनीतिक यू-टर्न लिया है। व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण नीतिगत घोषणा करते हुए पड़ोसी मुल्क कनाडा से आयात होने वाले चुनिंदा सामानों पर लगाए गए भारी टैरिफ को तत्काल प्रभाव से हटाने का फैसला किया है। वैश्विक कूटनीति के जानकारों के अनुसार, रूस पर लगे कड़े प्रतिबंधों में व्यावहारिक ढील देकर भारत और चीन को राहत पहुंचाने के बाद अब ट्रंप प्रशासन का यह कदम उत्तरी अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार में व्याप्त भारी तनाव को शांत करने की एक सोची-समझी राजनीतिक चाल माना जा रहा है। कड़े ट्रेड वॉर के बीच अचानक हुए इस नीतिगत बदलाव ने अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है, क्योंकि इस फैसले का सीधा संबंध अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी के घटते सियासी दबदबे और सीमावर्ती राज्यों में मतदाताओं के आक्रोश को थामने से जोड़ा जा रहा है।
कनाडा के इन सामानों को मिली टैरिफ से राहत: प्लाईवुड, मशीनरी और रेफ्रिजरेशन उपकरण हुए सस्ते
व्हाइट हाउस की ओर से जारी आधिकारिक कार्यकारी आदेश के अनुसार, शुल्क में दी गई यह विशेष छूट व्यापक नहीं बल्कि अत्यधिक लक्षित और विशिष्ट क्षेत्रों तक सीमित रखी गई है। इस नई नीति के तहत कनाडा से आयात होने वाली प्लाईवुड शीट्स, लकड़ी और कुछ विशेष श्रेणी के कागज उत्पादों, विशिष्ट औद्योगिक मशीनों और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल रेफ्रिजरेशन उपकरणों पर लगने वाले दंडात्मक आयात शुल्क को पूरी तरह हटा लिया गया है। सीमा पार व्यापार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इन वस्तुओं पर से शुल्क हटने से निर्माण (कंस्ट्रक्शन), पैकेजिंग और कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स से जुड़े अमेरिकी छोटे और मध्यम व्यापारियों को लागत में बड़ी राहत मिलेगी। इन उत्पादों पर भारी शुल्क के कारण अमेरिकी उपभोक्ताओं और कारोबारियों के लिए स्थानीय स्तर पर लागत काफी बढ़ गई थी, जिसे लेकर पिछले कई महीनों से व्यापारिक संगठन और स्थानीय चैंबर ऑफ कॉमर्स ट्रंप प्रशासन पर फैसले वापस लेने का कड़ा दबाव बना रहे थे।
मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की अग्निपरीक्षा: मेन राज्य में सीनेटर सुसान कोलिन्स की सीट बचाने की जुगत
राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि इस नीतिगत नरमी के पीछे का सबसे प्रमुख कारण तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव हैं, जहां विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी रिपब्लिकन पार्टी से अमेरिकी संसद (कांग्रेस) का नियंत्रण छीनने के लिए पूरा जोर लगा रही है। कई प्रमुख चुनावी सर्वेक्षणों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए मुकाबला बेहद कड़ा और चुनौतीपूर्ण बताया जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप के इस नए फैसले से कनाडा की अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे रणनीतिक राज्य मेन (Maine) में रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कोलिन्स को अपनी सीट बचाने में बड़ी राजनीतिक मदद मिल सकती है। मेन राज्य में सीनेटर कोलिन्स को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार से बहुत कड़ी टक्कर मिल रही है। दरअसल, ट्रंप प्रशासन द्वारा कनाडा पर लगातार लगाए जा रहे सख्त व्यापारिक शुल्कों और आयात प्रतिबंधों के चलते मेन राज्य के सीमा पार व्यापार, लकड़ी मिलों, लॉबस्टर उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र को भारी आर्थिक आघात पहुंचा था, जिससे स्थानीय मतदाताओं में गहरा असंतोष पनप रहा था। एक प्रमुख रिपब्लिकन नेता ने सार्वजनिक दावा भी किया है कि उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों की आर्थिक तबाही का हवाला देकर ही राष्ट्रपति से इस राहत पैकेज की पैरवी की थी।
30 अक्टूबर से नए उत्पादों पर लगेगा टैक्स: कालीन, वाल्व और वेस्ट प्रोडक्ट्स पर सख्त हुआ रुख
एक तरफ जहां कुछ क्षेत्रों को राहत देकर सुलह का संदेश दिया गया है, वहीं व्हाइट हाउस ने यह भी साफ कर दिया है कि उसकी 'टैरिफ डिप्लोमेसी' पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। आदेश के तहत कई नए सामानों को कड़े आयात शुल्क के दायरे में शामिल भी कर लिया गया है। प्रशासन द्वारा जारी ताजा टैरिफ सूची के अनुसार, कालीन (कार्पेट्स), विभिन्न प्रकार के औद्योगिक वाल्व और अपशिष्ट उत्पादों (वेस्ट प्रोडक्ट्स) पर नए और कड़े आयात शुल्क लगाए जा रहे हैं। ये नए टैरिफ नियम आगामी 30 अक्टूबर से दोनों देशों के बीच औपचारिक रूप से लागू हो जाएंगे। कनाडा की पूरी अर्थव्यवस्था के लिए अमेरिका का बाजार रीढ़ की हड्डी जैसा है, क्योंकि कनाडा का लगभग 70 प्रतिशत कुल निर्यात सीधे अमेरिकी बाजारों में ही खपता है। दोनों देशों के बीच यह ताजा व्यापारिक गतिरोध तब शुरू हुआ था जब अगस्त में कई दौर की द्विपक्षीय व्यापार वार्ताएं बिना किसी नतीजे के विफल हो गई थीं, जिसके बाद ट्रंप प्रशासन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए आयात शुल्कों की लंबी फेहरिस्त थोप दी थी।
मंदी की चपेट में आया कनाडा: ओटावा ने कहा- हम नए अमेरिकी कदमों का करेंगे गहन मूल्यांकन
अमेरिकी शुल्कों के लंबे दौर ने कनाडा की घरेलू अर्थव्यवस्था को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है। ट्रंप के टैरिफ फैसलों का सबसे विनाशकारी असर कनाडा के ऑटोमोबाइल, स्टील, एल्युमिनियम और पारंपरिक लंबर (लकड़ी) उद्योग पर पड़ा है, जहां हजारों लोगों की नौकरियां चली गईं और कई उत्पादन संयंत्र बंद होने की कगार पर पहुंच गए। लगातार दो तिमाहियों तक जीडीपी में दर्ज की गई गिरावट के कारण कनाडा इस साल आधिकारिक तौर पर तकनीकी मंदी (Technical Recession) के भंवर में फंस चुका है। ओटावा में इस पूरे मामले पर बयान देते हुए अमेरिका-कनाडा व्यापार के प्रभारी वरिष्ठ कनाडाई मंत्री डोमिनिक लेब्लैंक ने कहा कि उनकी सरकार वाशिंगटन द्वारा उठाए गए इन नवीनतम कदमों पर बारीक नजर रखे हुए है। लेब्लैंक ने स्पष्ट किया कि कनाडा सरकार इस आंशिक शुल्क छूट और नए शुल्कों के प्रभाव का समग्र आर्थिक मूल्यांकन करेगी। इसके साथ ही उन्होंने कूटनीतिक रुख दोहराते हुए कहा कि कनाडा अपने श्रमिकों और उद्योगों के हितों की रक्षा करते हुए अमेरिका के साथ रचनात्मक, निष्पक्ष और ईमानदारीपूर्ण तरीके से वार्ता की मेज पर समाधान खोजने के लिए हमेशा तैयार है।