कंप्यूटर से डिजिटल डेटा व अहम दस्तावेज चोरी, प्रयागराज में दो पर गंभीर धाराओं में FIR
उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और प्रयागराज शहर दक्षिणी से भारतीय जनता पार्टी के विधायक नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी के कार्यालय में एक सनसनीखेज धोखाधड़ी और डिजिटल सेंधमारी का मामला प्रकाश में आया है। मंत्री के कार्यालय में लगे कंप्यूटर सिस्टम से गोपनीय डिजिटल डेटा, तस्वीरें, हार्ड डिस्क बैकअप और अलमारी में सुरक्षित रखे गए कई महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों को चोरी कर लिया गया है। इसके साथ ही मंत्री के आधिकारिक और सरकारी लेटरपैड की कूटरचना (जालसाजी) कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका अवैध रूप से अलग-अलग स्थानों पर दुरुपयोग करने की एक सुनियोजित आपराधिक साजिश का भंडाफोड़ हुआ है। इस पूरे मामले में मंत्री के मीडिया सलाहकार की औपचारिक लिखित शिकायत के आधार पर प्रयागराज के कोतवाली थाने में दो नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने घटना की गहनता से पड़ताल शुरू करते हुए डिजिटल सर्विलांस और फॉरेंसिक साक्ष्यों को खंगालना शुरू कर दिया है।
प्रयागराज के कोतवाली थाने में दर्ज हुआ मुकदमा: मीडिया सलाहकार दिव्यांश शेखर सिंह की तहरीर पर पुलिसिया कार्रवाई
यह पूरा मामला तब सामने आया जब कैबिनेट मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी के इंटरनेट मीडिया व मीडिया सलाहकार दिव्यांश शेखर सिंह ने प्रयागराज के कोतवाली थाने में एक विस्तृत तहरीर सौंपी। पुलिस को दी गई तहरीर में बताया गया कि कार्यालय की आंतरिक व्यवस्था के दौरान डिजिटल रिकॉर्ड्स और फाइलों में भारी गड़बड़ी पकड़ी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली थाना पुलिस ने बिना किसी देरी के तुरंत नामजद एफआईआर दर्ज की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल सामान्य चोरी का नहीं है, बल्कि एक कैबिनेट स्तर के मंत्री के सरकारी लेटरपैड की कूटरचना और महत्वपूर्ण डेटा के दुरुपयोग से जुड़ा है, जिसका इस्तेमाल किसी बड़े प्रशासनिक या वित्तीय फर्जीवाड़े के लिए किया जा सकता था। पुलिस की साइबर और फॉरेंसिक टीम अब कंप्यूटर लॉग्स और एक्सेस हिस्ट्री की तकनीकी जांच में जुट गई है।
वीडियो एडिटर गौरव मिश्रा और पूर्व कर्मी दुर्गेश कुमार सिंह पर गंभीर आरोप: दराज और सिस्टम से उड़ाए गोपनीय दस्तावेज
दर्ज कराई गई एफआईआर में मुख्य रूप से दो व्यक्तियों को नामजद किया गया है, जिनके नाम गौरव मिश्रा और दुर्गेश कुमार सिंह हैं। तहरीर के अनुसार, गौरव मिश्रा मंत्री की मीडिया और डिजिटल टीम में लंबे समय से वीडियो एडिटर और ग्राफिक्स डिजाइनर के पद पर कार्यरत था। पद पर होने के कारण उसके पास मंत्री नन्दी से जुड़े डिजिटल डेटा, आधिकारिक वीडियो फुटेज, फोटोग्राफ्स, एक्सटर्नल हार्ड डिस्क और आधिकारिक यूट्यूब चैनल का पूरा एक्सेस और लॉगिन क्रेडेंशियल्स मौजूद थे। आरोप है कि गौरव मिश्रा ने पूर्व में अनुशासनहीनता और अनैतिक गतिविधियों के चलते नौकरी से निकाले जा चुके पूर्व कर्मचारी दुर्गेश कुमार सिंह के साथ मिलकर एक गहरी आपराधिक साजिश रची। दोनों ने मिलकर कार्यालय के कंप्यूटर सिस्टम से महत्वपूर्ण डिजिटल डेटा चुराया और कार्यालय की दराजों में रखे कई संवेदनशील मूल दस्तावेजों को भी गायब कर दिया।
सरकारी लेटरपैड की कूटरचना कर फर्जीवाड़े की थी पूरी तैयारी: आंतरिक जांच में खुली पोल
तहरीर में इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि जब कार्यालय के अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों ने सिस्टम, फाइलों और टेबल की दराजों का नियमित भौतिक सत्यापन किया, तो कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपनी जगह से गायब मिले। प्राथमिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपियों ने मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी के आधिकारिक लेटरपैड का अनधिकृत प्रारूप तैयार कर उसकी कूटरचना की थी। आरोपियों की योजना इस जाली लेटरपैड पर मंत्री के फर्जी हस्ताक्षर या सील लगाकर विभिन्न सरकारी विभागों, निजी संस्थानों और अन्य स्थानों पर अपने निजी लाभ और अवैध काम कराने के लिए इस्तेमाल करने की थी। समय रहते कार्यालय के सतर्क कर्मचारियों द्वारा इस धोखाधड़ी को पकड़ लिए जाने से एक बड़ा फर्जीवाड़ा होने से बच गया।
इंस्पेक्टर कोतवाली सुधीर कुमार सिंह का बयान: आरोपियों की तलाश में दबिश, डिजिटल फॉरेंसिक जांच जारी
मामले पर विस्तृत जानकारी देते हुए कोतवाली थाना प्रभारी (इंस्पेक्टर) सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि मीडिया सलाहकार दिव्यांश शेखर सिंह की तहरीर के आधार पर गौरव मिश्रा और दुर्गेश कुमार सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने कार्यालय से जुड़े कंप्यूटरों की हार्ड डिस्क और इंटरनेट लॉग्स को जांच के दायरे में लिया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन-कौन सा डेटा बाहर ट्रांसफर किया गया है या क्लाउड स्टोरेज पर अपलोड किया गया है। इंस्पेक्टर ने स्पष्ट किया कि दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि क्या इन दोनों के साथ कोई बाहरी सिंडिकेट या गिरोह भी इस डेटा और लेटरपैड के दुरुपयोग की साजिश में शामिल था।