यूपी चुनाव से पहले अयोध्या पहुंचे बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े
उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी तैयारियों और संगठनात्मक मजबूती को धार देने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी राजनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। इसी कड़ी में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं पार्टी के शीर्ष रणनीतिकार विनोद तावड़े शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को धर्मनगरी अयोध्या पहुंचे। अयोध्या की पावन भूमि पर कदम रखते ही तावड़े सीधे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूरे विधि-विधान से रामलला के दर्शन-पूजन किए और देश व प्रदेश के कल्याण की कामना की। दर्शन-पूजन के उपरांत भाजपा महासचिव का यह दौरा पूरी तरह से संगठनात्मक बैठकों, बूथ स्तर की तैयारियों की समीक्षा और आगामी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने पर केंद्रित रहने वाला है। अवध क्षेत्र के राजनीतिक केंद्र के रूप में अयोध्या से शुरू हुआ यह मंथन पूरे उत्तर प्रदेश में पार्टी की चुनावी रणनीति की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट पर जोरदार स्वागत: वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने की अगवानी
शनिवार दोपहर जब भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े अयोध्या स्थित महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पहुंचे, तो वहां पहले से मौजूद स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विधायकों और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उनका फूल-मालाओं और गर्मजोशी के साथ भव्य स्वागत किया। तावड़े की अगवानी करने वालों में स्थानीय विधायक अभय सिंह, विधायक चंद्रभानु पासवान, भाजपा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष अवधेश पांडेय बादल तथा पूर्व महानगर अध्यक्ष अभिषेक मिश्र प्रमुख रूप से शामिल रहे। एयरपोर्ट पर संक्षिप्त औपचारिक मुलाकातों के बाद तावड़े का काफिला सीधे अयोध्या धाम स्थित राम जन्मभूमि परिसर के लिए रवाना हुआ। स्थानीय नेताओं के अनुसार, राष्ट्रीय महासचिव का यह दौरा न केवल कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने का काम करेगा, बल्कि अवध क्षेत्र के सभी जिलों में पार्टी की पकड़ को और अधिक मजबूत बनाएगा।
रामलला के दरबार में मत्था टेककर की शुरुआत: आगामी रणनीतिक बैठकों का खाका तैयार
अयोध्या धाम पहुंचने के बाद विनोद तावड़े ने भव्य राम मंदिर में रामलला के विग्रह के समक्ष शीश नवाया और विशेष पूजा-अर्चना संपन्न की। रामलला का आशीर्वाद लेने के बाद उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों के साथ अपने मैराथन बैठकों के सिलसिले की शुरुआत की। तय कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रीय महासचिव सबसे पहले जिला प्रभारियों और जिलाध्यक्षों के साथ एक उच्चस्तरीय संगठनात्मक समीक्षा बैठक करेंगे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा जिलेवार चल रही संगठनात्मक गतिविधियों का विस्तृत लेखा-जोखा लेना, सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करना और आगामी चुनावों के मद्देनजर विपक्ष के नैरेटिव का मुकाबला करने के लिए ठोस रणनीति बनाना है। तावड़े प्रत्येक जिले की स्थानीय समस्याओं, जातीय समीकरणों और कार्यकर्ताओं की सक्रियता की सीधे समीक्षा कर रहे हैं।
अवध क्षेत्र की क्षेत्रीय कार्यसमिति और सभी मोर्चों की संयुक्त बैठक: जमीन पर उतरेगा संगठन
जिलाध्यक्षों के साथ मंथन के तुरंत बाद विनोद तावड़े अवध क्षेत्र के पदाधिकारियों के साथ एक वृहद क्षेत्रीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक में अवध क्षेत्र की कार्यसमिति के सदस्यों के अलावा युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, किसान मोर्चा, पिछड़ा वर्ग मोर्चा और अनुसूचित जाति मोर्चा सहित भाजपा के सभी अग्रिम संगठनों के अध्यक्ष और प्रदेश स्तर के पदाधिकारी अनिवार्य रूप से शामिल होंगे। इस बैठक का मूल उद्देश्य संगठन के हर विंग को चुनावी मोड में लाना है। तावड़े मोर्चों के पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देंगे कि वे अपने-अपने वर्गों के बीच सघन जनसंपर्क अभियान चलाएं, चौपालों का आयोजन करें और बूथ स्तर तक संगठन की उपस्थिति को अभेद्य बनाएं ताकि आगामी चुनावों में भाजपा का संगठनात्मक ढांचा हर चुनौती का सामना मजबूती से कर सके।
विचार परिवार के साथ संवाद बैठक अहम: संघ और संगठन के बीच बेहतर समन्वय पर जोर
विनोद तावड़े के इस अयोध्या प्रवास का एक सबसे अहम और रणनीतिक पहलू राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) यानी 'विचार परिवार' के प्रमुख सदस्यों के साथ होने वाली समन्वय बैठक है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में चुनाव जीतने के लिए पार्टी संगठन और संघ परिवार के बीच जमीनी स्तर पर अटूट तालमेल होना अनिवार्य है। इस संवाद बैठक में संघ के वरिष्ठ प्रचारकों और भाजपा के शीर्ष रणनीतिकारों के बीच वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर खुलकर चर्चा होगी। कार्यकर्ताओं की शिकायतों, वैचारिक मुद्दों और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ जुड़ाव को लेकर विचार परिवार के फीडबैक पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाएगा, जिससे चुनावी मैदान में उतरने से पहले किसी भी प्रकार के गतिरोध या संवादहीनता को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।