31 दिसंबर को खत्म हो रहा गुटेरस का कार्यकाल, पहली महिला चीफ बनने पर टिकी निगाहें
दुनिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंच संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) में शीर्ष नेतृत्व के चुनाव को लेकर सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच चुकी हैं। मौजूदा महासचिव एंटोनियो गुटेरस का दूसरा कार्यकाल आगामी 31 दिसंबर को समाप्त होने जा रहा है, और उनके उत्तराधिकारी के चयन को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में जारी गहरे गतिरोध के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने एक बड़ा रणनीतिक दांव खेल दिया है। यूएई ने अपनी विदेश मामलों की राज्यमंत्री और अनुभवी राजनयिक लाना नुसेइबेह को आधिकारिक रूप से इस सर्वोच्च पद के लिए नामित कर दिया है। नुसेइबेह के मैदान में उतरने से महासचिव पद की वैश्विक दौड़ अब और भी ज्यादा रोमांचक तथा त्रिकोणीय हो गई है। इसके साथ ही यूएन चीफ की कुर्सी हासिल करने के लिए ताल ठोक रहे आधिकारिक उम्मीदवारों की कुल संख्या बढ़कर आठ हो गई है। सुरक्षा परिषद के भीतर वीटो पावर रखने वाले पांच स्थायी सदस्यों के बीच पैदा हुए मतभेदों के दौर में नुसेइबेह की उम्मीदवारी को एक बेहद संतुलित और कूटनीतिक रूप से प्रभावी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
यूएन में पहली महिला महासचिव की मांग तेज: 80 वर्षों के इतिहास में नौ पुरुष ही संभाल चुके हैं कमान
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के 80 वर्षों के लंबे इतिहास पर नजर डालें तो इस विश्व संस्था में अब तक कुल नौ महासचिव हुए हैं और ये सभी के सभी पुरुष रहे हैं। ट्रिगवे ली से लेकर डैग हैमरशॉल्ड, यू थांट, कर्ट वाल्डहाइम, जेवियर पेरेज डी कुएइलर, बुतरस बुतरस-घाली, कोफी अन्नान, बान की-मून और मौजूदा प्रमुख एंटोनियो गुटेरस तक किसी भी महिला को इस सर्वोच्च कमान तक पहुंचने का अवसर नहीं मिला है। यही वजह है कि इस बार वैश्विक मानवाधिकार संगठनों, नागरिक मंचों और दर्जनों सदस्य राष्ट्रों की ओर से यह पुरजोर मांग उठ रही है कि 21वीं सदी में दुनिया की सर्वोच्च कूटनीतिक संस्था की बागडोर किसी योग्य महिला के हाथों में सौंपी जानी चाहिए। लाना नुसेइबेह की उम्मीदवारी ने इस ऐतिहासिक मांग को नई ऊर्जा दी है। अरब जगत से निकलकर वैश्विक स्तर पर एक आधुनिक, प्रगतिशील और शांतिदूत की छवि रखने वाली नुसेइबेह को महिला सशक्तिकरण की एक मजबूत मिसाल के तौर पर पेश किया जा रहा है, जिससे उन्हें गैर-स्थायी सदस्य देशों और विकासशील मुल्कों का बड़ा नैतिक समर्थन मिलने की उम्मीद है।
सुरक्षा परिषद में छाया गतिरोध: हालिया अनौपचारिक मतदान में दिग्गजों को मिले नकारात्मक वोट
नुसेइबेह ऐसे बेहद संवेदनशील समय में मैदान में उतरी हैं जब सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों (P5) के बीच उम्मीदवारों को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है। हाल ही में सुरक्षा परिषद द्वारा कराए गए गुप्त अनौपचारिक स्ट्रॉ पोल (मतदान) में पहले से रेस में शामिल प्रमुख चेहरों को भारी झटके लगे हैं। दौड़ में शामिल संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD) की प्रमुख रेबेका ग्रीनस्पैन, गुयाना की पूर्व विदेश मंत्री कैरोलिन रोड्रिग्स-बिरकेट और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रोसी को कम से कम दो-दो स्थायी सदस्यों के नकारात्मक यानी 'डिस्क्रेज' वोटों का सामना करना पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र के नियमों के मुताबिक, महासचिव पद के प्रत्याशी को सुरक्षा परिषद के 15 में से कम से कम 9 सदस्यों का समर्थन मिलना जरूरी होता है, और साथ ही पांचों स्थायी सदस्यों (अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस) में से किसी का भी वीटो नहीं होना चाहिए। दिग्गजों के खिलाफ वीटो के संकेत मिलने के बाद अब एक ऐसे सर्वमान्य चेहरे की तलाश तेज हो गई है जो पूर्व और पश्चिम के साथ-साथ ग्लोबल साउथ को भी स्वीकार्य हो, और इसी शून्य को भरने के लिए यूएई ने नुसेइबेह का नाम आगे बढ़ाया है।
11 साल तक यूएन में यूएई की आवाज रहीं नुसेइबेह: भारत संग योग दिवस से लेकर कूटनीति तक गहरा नाता
लाना नुसेइबेह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में कोई अनजाना नाम नहीं हैं। वे एक मंझी हुई रणनीतिकार मानी जाती हैं, जिन्होंने वर्ष 2013 से 2024 तक लगातार 11 वर्षों तक संयुक्त राष्ट्र में यूएई की स्थायी प्रतिनिधि (राजदूत) के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। इस दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के रूप में अपने देश का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया और कई जटिल अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित कराने में केंद्रीय भूमिका निभाई। 2024 में अपना लंबा कार्यकाल पूरा करने के बाद उन्हें यूएई की संघीय कैबिनेट में विदेश मामलों का राज्यमंत्री बनाया गया था, लेकिन इस चुनाव की निष्पक्षता और पूर्ण समर्पण को बनाए रखने के लिए वे अब मंत्री पद से इस्तीफा दे रही हैं। खास बात यह भी है कि नुसेइबेह एक उत्साही योग प्रेमी हैं। यूएन मुख्यालय न्यूयॉर्क में जब भारत की पहल पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन शुरू हुआ, तो नुसेइबेह ने कार्यक्रमों के आयोजन, अंतर-सांस्कृतिक संवाद और एशियाई परंपराओं को बढ़ावा देने में अत्यंत सक्रिय और ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी, जिससे भारतीय राजनयिक हलकों में भी उनके प्रति गहरा सम्मान देखा जाता है।
पी-5 देशों को साधना होगी सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा: 31 दिसंबर से पहले तय होगा नया वैश्विक नेतृत्व
महासचिव पद की यह डगर लाना नुसेइबेह के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं होने वाली है। सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षा परिषद के पांचों स्थायी सदस्यों के परस्पर विरोधी भू-राजनीतिक हितों के बीच खुद को एक तटस्थ और निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में स्थापित करना है। यूक्रेन युद्ध के कारण रूस और पश्चिमी देशों (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस) के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हैं, वहीं अमेरिका और चीन के बीच भी कड़ा मुकाबला जारी है। खाड़ी देश की प्रतिनिधि होने के नाते नुसेइबेह के पास यह अवसर है कि वे मॉस्को, बीजिंग और वाशिंगटन तीनों के साथ यूएई के संतुलित और व्यावहारिक संबंधों का लाभ उठाकर एक 'आम सहमति की उम्मीदवार' (कंसेंसस कैंडिडेट) के रूप में उभर सकें। 31 दिसंबर 2026 को एंटोनियो गुटेरस की विदाई तय है, ऐसे में आने वाले कुछ सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद के चैंबर्स में बेहद गहमागहमी से भरे रहने वाले हैं, जहां यह तय होगा कि क्या दुनिया को संयुक्त राष्ट्र के इतिहास की पहली महिला महासचिव मिलने जा रही है